त्रिवेणी संगम साहित्य समिति द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन, शिक्षा और संदेशप्रद कविता का किया पाठ

राजिम। राजिम माघी पुन्नी मेला में 13 फरवरी को संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सौजन्य से सांस्कृतिक मंच क्र. 2 में त्रिवेणी संगम साहित्य समिति राजिम नवापारा द्वारा कवि सम्मेलन किया गया। इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष पुष्पा जगन्नाथ साहू एवं नगर पंचायत अध्यक्ष रेखा जितेन्द्र सोनकर, राजिम के पार्षद पुष्पा गोस्वामी अतिथि के रूप में मौजूद थे।

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0

अतिथि उद्बोधन में जनपद अध्यक्ष पुष्पा साहू ने कहा कि साहित्य समाज का सृजन करता है एवं संस्कृति को आगे बढ़ाता है। नगर पंचायत अध्यक्ष रेखा जितेन्द्र सोनकर ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। समाज को अच्छा व बुरा का दिशा निर्देश देते हुए अपने शब्दों को पिरो कर कविता के माध्यम से हम सबको सचेत करते रहते है। जिसके लिए धन्यवाद के पात्र है। पुष्पा गोस्वामी ने कहा कि कवि लोग हमारे समाज को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है। कार्यक्रम में सुखेन साहू, नदी मंच प्रभारी किशोर निर्मलकर, मंच संचालक दिनेश्वर साहू का विशेष सहयोग रहा।

तुषार शर्मा के द्वारा माता सरस्वती वन्दना से कविता की बौछार

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)

कार्यक्रम में सर्वप्रथम तुषार शर्मा के द्वारा माता सरस्वती वन्दना से कविता की बौछार कर दी। जिसमें मकसूदन साहू बरीवाला ने कोका कोला कोल्ड्रिंग एवं भारतीय पेय पदार्थ नींबू पानी पर जबरदस्त व्यंग्यात्मक कविता पाठ किया। कई आवार्डां से सम्मानित एवं मीरा से सम्बोधित होने वाली कवयित्री केंवरा यदु ने बेटी पर कविता पढ़ी। मोहनलाल मानिकपन ने संस्कार पर कविता पढ़ा। रोहित साहू माधुर्य ने भारतीय जवानों पर कविता सुनाई। संतोष प्रकृति ने त्रिवेणी संगम, डॉ. रमेश कुमार सोनसायटी ने समसामयिक नशा नाश की जड़ है एवं राजिम माघी पुन्नी मेला पर कविता पढ़ा। किशोर निर्मलकर ने भेद झन करव बेटी अउ बेटा में, प्रिया देवांगन मत काटो गा पेड़ ला, तुषार शर्मा ने कांवरिया और महादेव पर जबरदस्त चित्रण करते हुए कविता पढ़ा।

छत्तीसगढ़ महतारी पर कविता

रामेश्वर रंगीला ने राजिम महात्मय, छग्गूयास आडिल ने श्रृंगार रस एवं नूतन साहू छत्तीसगढ़ की बासी चटनी एवं संस्कृति थामसिंग ने छत्तीसगढ़ महतारी पर कविता पढ़ा। इस प्रकार से कवियों ने अलग-अलग रस और शिक्षा व संदेशप्रद कविता पाठ किया।