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रायपुर में नीति आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला: शिक्षा में मेंटरशिप से घटेगी ड्रॉपआउट दर, बोले वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी

रायपुर में नीति आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला में वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि शिक्षा में मेंटरशिप सामाजिक न्याय और समान अवसर की कुंजी है। डॉ. वी. के. पॉल ने इसे हर बच्चे का मानवाधिकार बताया।

शिक्षा में मेंटरशिप सामाजिक न्याय और समान अवसर का मजबूत आधार: वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी
ड्रॉपआउट दर घटाने और युवाओं को कौशल से जोड़ने पर रायपुर में नीति आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

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रायपुर, 29 अगस्त 2025/ नीति आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में “Fostering Mentorship in Education: A Pathway to Equity” विषय पर राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने के लिए मेंटॉरशिप के राष्ट्रीय ढांचे पर विमर्श करना रहा।

मेंटॉरशिप युवाओं को सशक्त करने की कुंजी: ओ. पी. चौधरी

विशेष अतिथि और वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि शिक्षा में समानता और सशक्तिकरण की दिशा में मेंटॉरशिप की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने कहा—

“17 वर्षों की पढ़ाई के बाद भी कई युवाओं को स्पष्ट नहीं होता कि उन्हें जीवन में आगे क्या करना है। कैरियर गाइडेंस और मेंटरशिप इस कमी को दूर कर सकती है।”

उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई की, जहां सुविधाओं की भारी कमी थी। मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि स्थानीय भाषा और संस्कृति आधारित शिक्षा बच्चों के जीवन से जोड़कर उन्हें आत्मविश्वास दिलाती है।

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श्री चौधरी ने कहा कि भारत की औसत आयु 28 वर्ष है, जबकि छत्तीसगढ़ की औसत आयु 24 वर्ष है। यह युवाशक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है और हमें इसे अर्थव्यवस्था और कौशल विकास से जोड़ना होगा।

“हर बच्चे को मेंटरशिप मिलना उसका अधिकार”: डॉ. वी. के. पॉल

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने कहा कि शिक्षा मानव पूंजी निर्माण का आधार है और हर बच्चे को समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि—

  • प्राथमिक स्कूलों में नामांकन 93% है, लेकिन अपर प्राइमरी में 3% बच्चे छूट जाते हैं।

  • सेकेंडरी स्तर पर यह संख्या घटकर 56% रह जाती है।

  • 12वीं तक केवल 23% छात्र ही पहुंच पाते हैं।

  • 2019 से 2023 तक, केंद्रीय विश्वविद्यालयों से 15,000 ओबीसी, एससी, एसटी छात्र और IIT व IIM से 4,000 से अधिक छात्र पढ़ाई छोड़ चुके हैं।

उन्होंने कहा कि ड्रॉपआउट सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय क्षति है। मेंटरशिप से बच्चों को आत्मविश्वास, जीवन कौशल और मार्गदर्शन मिलता है। “हर बच्चे को मेंटरशिप मिलना उसका मानवाधिकार है,” उन्होंने जोर देकर कहा।

सहभागी विशेषज्ञ

कार्यशाला में योजना विभाग के सचिव अंकित आनंद, नीति आयोग के संयुक्त सचिव के. एस. रेजिमोन, फेलो डॉ. आई. वी. सुब्बा राव (IAS, सेवानिवृत्त), राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा, और नीति आयोग के उप सचिव अरविंद कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे

Ashish Sinha

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