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टोकन और तौलाई में हिल हवाला से धान खरीदी की रफ़्तार धीमी, व्यवस्था दुरुस्त कर तारीख बढ़ाए

टोकन और तौलाई में हिल हवाला से धान खरीदी की रफ़्तार धीमी, व्यवस्था दुरुस्त कर तारीख बढ़ाए

21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 32.99 लाख़ हेक्टेयर पंजीकृत रकबा पर 170 लाख़ मिट्रिक टन का संशोधित लक्ष्य तय करे सरकार

रायपुर/धान खरीदी का लक्ष्य और तिथि बढ़ाने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वर्ष प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आते ही प्रदेश में टोकन जारी करने की व्यवस्था से लेकर तौलाई और संग्रहण केंद्रों से धान का उठाव भी धीमा हो गया है। किसानों का शोषण और किसान विरोधी षड्यंत्र ही भाजपा का मूल चरित्र है। पूर्ववर्ती सरकार ने खरीफ सीजन 2023-24 के लिए 20 क्विटंल प्रति एकड़ की दर से खरीदी करने के लिए कुल लक्ष्य 135 से 140 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया था। विष्णुदेव सरकार ने एक तरफ तो 21 क्विटंल प्रति एकड़ खरीदी का आदेश जारी किया लेकीन दुर्भावना पूर्वक कुल धान खरीदी का लक्ष्य घटाकर 130 लाख मीट्रिक टन कर दिया। किसानों से धान की कम खरीदी करने के लिए ही षडयंत्र पूर्वक टोकन जारी करने में कोताही बरती जा रही है। तौलाई की रफ्तार भी दुर्भावना पूर्वक घटा दी गई है। 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 32.99 लाख़ हेक्टेयर पंजीकृत रकबा पर 170 लाख़ मिट्रिक टन का संशोधित लक्ष्य तय करे साय सरकार।

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प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि लगभग 7 लाख किसान अब तक अपना धान नहीं बेच पाए हैं। अनेकों धान खरीदी केंद्रों में टोकन और तौलाई के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही है। भाजपा सरकार की अवस्था और दुर्भावना के चलते ही किसान तकलीफ़ पा रहे हैं। साय सरकार व्यवस्था सुधारने के बजाय लक्ष्य घटाकर किसानों के हक का गला घोट रहे हैं।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि धान और किसान भाजपा के लिए केवल चुनावी लिहाज़ से ही जरूरी है। भारतीय जनता पार्टी के नेता बताएं कि 3100 प्रति क्विंटल की दर से गांव में ही भुगतान कब मिलेगा। पिछ्ले खरीफ़ सीजन की न्याय योजना का चौथा किस्त जिसका बजट प्रावधान पूर्ववर्ती सरकार ने किया है उसे कब देंगे या हड़पने की साज़िश है। भाजपा के तमाम वादे और दावे चुनाव जीतने के बाद जुमला हो जाता है। जिस तरह से 2022 तक किसानों की आय दुगनी करने का वादा था। 2014 में स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश लागू कर सी- 2 फार्मूले पर 50 प्रतिशत लाभ देकर एमएसपी तय करने की गारंटी दी गई थी, जिस तरह से एमएसपी की कानूनी गारंटी के लिए कमेटी बनाने का वादा था, इस तरह छत्तीसगढ़ में 3100 का वादा करके 2183 दे रहे हैं, 917 रुपया प्रति क्विटंल किसानों के जेब में डकैती डालने वाले भाजपाई छत्तीसगढ़ में अब धान खरीदी की रफ़्तार धीमी कर किसानों को धान बेचने से भी वंचित कर रहे हैं। 21 क्विटंल प्रति एकड़ के हिसाब से संशोधित लक्ष्य निर्धारित कर टोकन और तौलाई की व्यवस्था दुरुस्त करें, धान खरीदी की समय सीमा कम से कम एक महीना बढ़ाएं।

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