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दूर हुआ पहाड़ी कोरवा दुखुराम का दुख, नौकरी से मिला जीवन का सुख

दूर हुआ पहाड़ी कोरवा दुखुराम का दुख, नौकरी से मिला जीवन का सुख

शिक्षक बनने के साथ रहन-सहन में आया बदलाव

तेजी से सुधर रही है आर्थिक स्थिति

कोरबा // पहाड़ी कोरवा युवक दुखुराम की अब दिनचर्या ही बदल गई है। राज्य शासन से नौकरी मिलने के पश्चात एक नया सपना सजने लगा है। कुछ साल पहले रोजगार नहीं होने से पूरा दिन जंगलों में चार, तेंदू, महुआ आदि फल-फूल एकत्रित करने में समय गुजर जाता था। भूख मिटाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती थी। ऐसे में एक सामान्य जनजीवन व्यतीत करना एक कल्पना ही थी। लेकिन यह कल्पना एक दिन हकीकत में बदल जायेगी यह पहाड़ी कोरवा दुखुराम ने भी नहीं सोचा था। राज्य शासन की पहल ने आज उसे इस मुकाम पर ला खड़ा किया है कि अब वह इतिहास में जाना नही चाहता। सरकारी नौकरी के बाद अपनी दुखों से दूर हुए पहाड़ी कोरवा दुखुराम अपना भविष्य सुधारने के साथ बच्चों का भविष्य बनाने की सोचने लगा है। नौकरी से न सिर्फ दुखुराम का जीवन बदला है, उनकी पत्नी सहित परिवार को भी जीवन का सुख मिलने लगा है।
वर्तमान में कोरबा विकासखंड के ग्राम पेण्ड्रीडीह में रहने वाला पहाड़ी कोरवा युवक दुखुराम को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सहायक शिक्षक के रूप में नौकरी प्रदान की गई है। वह कोरबा मुख्यालय के सुदूरवर्ती क्षेत्र श्यांग-अमलडीहा से लगे ग्राम आमाडांड के शासकीय प्राथमिक शाला में बच्चों को अध्यापन कराता है। प्रतिदिन ग्राम पेण्ड्रीडीह से अपने स्कूल आमाडांड की दूरी बाइक से तय करने वाले दुखुराम ने बताया कि वह समय पर स्कूल पहुंच जाता है। पेण्ड्रीडीह में उनके रिश्तेदार रहते हैं, इसलिए यहीं निवास करता है। उन्होंने बताया कि शुरूआत में नौकरी करना कठिन लगा क्योंकि उसे जंगल में रहने की आदत थी। लेकिन धीरे-धीरे आदत बदल गई और स्कूल माहौल में रहने से काम करने में झिझक भी मिटने लगी।
गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से समय-समय पर जिले में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार के सदस्यों को उनकी योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी से जोड़कर उनके जीवन स्तर को बदलने का कार्य किया जाता है। पहाड़ी कोरवा दुखुराम भी इन्हीं प्रयास का एक हिस्सा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कलेक्टर अजीत वसंत ने कोरबा जिले में बड़ी संख्या में निवासरत पीवीटीजी के उत्थान की दिशा में 8 वीं से लेकर उच्च शिक्षा हासिल करने वाले पहाड़ी कोरवाओं को डीएमएफ के माध्यम से मानदेय के आधार पर स्कूल तथा अस्पताल में रोजगार देने का न सिर्फ पहल किया है बल्कि सभी का बेहतर भविष्य बनाने के साथ आने वाले पीढ़ियों को भी समाज के मुख्यधारा में जोड़ने की दिशा में कदम उठाया है। कोरबा जिले में डीएमएफ से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार के सदस्यों को नौकरी मिली है।
नौकरी से बदली लाइफ स्टाइल- शासकीय सेवा में आने के साथ ही कोरवा युवक दुखुराम का रहन-सहन में काफी परिवर्तन आ गया है। एक शिक्षक के रूप में पहनावा और स्कूली विद्यार्थियों के बीच उनके व्यवहार में परिवर्तन आया है। नौकरी के बाद प्रतिमाह समय पर वेतन मिल जाने से उसकी आर्थिक स्थिति भी सुधरने लगी है। दुखुराम ने बताया कि वेतन का कुछ रकम बचत करता है ताकि वह भी आने वाले समय में अपने बच्चों का भविष्य बना सके। दो साल पहले ही शादी के बंधन में बंधे दुखुराम ने बताया कि उसे भी मोटर साइकिल चलाने, मोबाइल का शौक था। नौकरी पाकर मोटर साइकिल और मोबाइल की शौक पूरी कर चुका है, अब जल्दी ही घर में टीवी सहित अन्य जरूरी सामान भी लेगा। उधर दुखुराम की पत्नी जून बाई का कहना है कि अब पति नौकरी करते हैं तो फिर आस-पास की महिलाओं के साथ महुआ, चार, तेंदूपत्ता के लिए जंगल जाना छूट गया है और उनकी भी कोशिश है कि जंगल की ओर जाने की बजाय बेहतर है कि एक नया जीवन जीकर आने वाली पीढ़ी को संवारने का काम किया जाएं।
क्रमांक 519/कमलज्योति/फोटो-1,2,3

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एनएचएम परीक्षा के परिणाम वेबसाइट में अपलोड
कोरबा 24 अगस्त 2024/राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत विभिन्न पदों पर की जा रही संविदा भर्ती के लिए कोरबा जिले में लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया। शासकीय पीजी कॉलेज कोरबा में आज स्टाफ नर्स,एएनएम, एमपीडब्ल्यू, नर्सिंग ऑफिसर के पदों की परीक्षा आयोजित की गई। जिसमें प्रथम पाली में 83 उपस्थित, 31 अनुपस्थित, द्वितीय पाली में 72 उपस्थित और 58 अनुपस्थित रहे। कल 23 अगस्त को जूनियर सेक्रेटरी असिस्टेंट,संगवारी डाटा एण्ट्री ऑरेटर की परीक्षा ली गई थी। उक्त दोनों दिवस में आयोजित परीक्षाओं के परिणाम कोरबा जिले की वेबसाइट korba.gov.in पर जारी कर दी गई है। अभ्यर्थी परीक्षा परिणाम का अवलोकन कर सकते हैं।

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