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महानदी की महाआरती में गरियाबंद कलेक्टर दीपक कुमार अग्रवाल सपत्निक शामिल हुए

राजिम कुंभ में प्रतिदिन हो रही महानदी की महाआरती

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गरियाबंद / राजिम कुंभ कल्प मेला में जबलपुर से पधारे साध्वी प्रज्ञा भारती के सानिध्य में प्रतिदिन महानदी की महाआरती की जा रही है। इस महाआरती में बड़ी संख्या में साधु-संतों के अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधि व गणमान्य नागरिक शामिल होकर इसके साक्षी बन रहे हैं। रविवार को महाआरती में विशेष कर गरियाबंद कलेक्टर दीपक कुमार अग्रवाल सपत्निक शामिल हुए।
मेले में महाआरती की शुरूआत प्रतिदिन शाम 7 बजे 11 पंड़ितों द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ प्रारंभ होता है। इस दौरान आरती घाट की मनोरम दृश्य देखते बनता है। जबलपुर से पधारे विद्वान पंड़ितों द्वारा इस आरती की विधिरीति अपने आप में विलक्षण है। घाट पर जब आरती के समय शंखनाद होता है तब ऐसा प्रतीत होता है हम स्वयं प्रयागराज और बनारस के पावन तीर्थ पर आरती कर रहे हो। महाआरती का एक साथ प्रज्वलित होना शंख, कपूर, चवर, आचमन पूरे मेला परिसर आरती मंडप को भावविभोर कर देता है। वैसे राजिम कुंभ में आने वाला हर श्रद्धालुओं की एक ही ख्वाहिश रहती है कि वह हर-हाल में महानदी की महाआरती में शामिल होकर उसकी साक्षी बन सकें। महाआरती में शामिल होने प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
राजिम कुंभ कल्प मेला में मनोरंजन के लिए कई तरह के आकर्षण है। वहीं संत समागम परिसर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान होंगे। नदी क्षेत्र में ब्रह्माकुमारी प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा परमात्मा शिव की प्रदर्शनी व भविष्य में आने वाली नई दुनिया की झलक मूर्तियों के द्वारा दर्शाई गई है। श्री कुलेश्वर महादेव मंदिर के समीप लगे इस प्रदर्शनी का उद्घाटन रविवार को साध्वी प्रज्ञा भारती व धार्मिक प्रभाग के जोनल कोऑर्डिनेटर ब्रह्मा कुमार नारायण भाई आदि ने फीता काटकर किया। इसके बाद अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसी मंडप में शांति अनुभूति मंडप भी लगाया गया।
इस अवसर पर ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने बताया कि यह प्रदर्शनी 26 फरवरी महाशिवरात्रि तक लगे रहेगा। इस प्रदर्शनी में स्वयं की पहचान, परमात्मा की पहचान, त्रिमूर्ति परमात्मा शिव के कर्तव्य, समय की पहचान, आने वाली नई सृष्टि कैसी होगी, देवी-देवताओं का रास मंडल और विशेष राजयोग शांति मंडप बनाए गए है। जिससे भटके हुए मानव को अनेक अशांत आत्माओं को ही स्वत आत्मा बौद्ध होने लगता है। यह मंडप पूरे मेले का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसे देखने के लिए आकर्षित हो रहे हैं। यह प्रदर्शनी सुबह 10 बजे से रात्रि 10 बजे तक दिखाई जा रही है।

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