
1000 करोड़ का साइबर फ्रॉड: 111 शेल कंपनियों के जरिए विदेश से चल रहा था नेटवर्क, CBI ने 17 पर दाखिल की चार्जशीट
1000 Crore Cyber Fraud Case: CBI ने ट्रांसनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा करते हुए 17 आरोपियों और 58 कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। ठगी का संचालन विदेश से किया जा रहा था।
1000 करोड़ का साइबर फ्रॉड: 111 शेल कंपनियों के जरिए विदेश से चल रहा था पूरा नेटवर्क, CBI ने 17 पर दाखिल की चार्जशीट
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े साइबर वित्तीय घोटालों में से एक का खुलासा करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने करीब 1000 करोड़ रुपये के ट्रांसनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में CBI ने 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें 4 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके साथ ही 58 शेल कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है।
यह कार्रवाई CBI के विशेष अभियान Operation CHAKRA-V के तहत की गई है, जो संगठित और अंतरराष्ट्रीय साइबर वित्तीय अपराधों के खिलाफ चलाया जा रहा है।
111 शेल कंपनियां बनीं साइबर फ्रॉड की रीढ़
CBI की जांच में सामने आया है कि इस पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क की रीढ़ 111 शेल कंपनियां थीं। इन कंपनियों को—
- डमी डायरेक्टर्स
- फर्जी और भ्रामक दस्तावेज
- नकली पते
- झूठे कारोबारी उद्देश्यों
के आधार पर रजिस्टर कराया गया था।
इन शेल कंपनियों के नाम पर बैंक अकाउंट और पेमेंट गेटवे मर्चेंट अकाउंट खोले गए, जिनका इस्तेमाल अपराध से अर्जित धन की लेयरिंग और डायवर्जन के लिए किया गया।
Google Ads से लेकर SIM बॉक्स तक, हाई-टेक ठगी
CBI की जांच में खुलासा हुआ कि साइबर अपराधियों ने बेहद लेयर्ड और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन मॉडल अपनाया था। इसके तहत—
- Google Ads
- बल्क SMS कैंपेन
- SIM-Box आधारित मैसेजिंग सिस्टम
- क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर
- फिनटेक प्लेटफॉर्म
- म्यूल बैंक अकाउंट्स
का इस्तेमाल किया गया। ठगी के हर चरण को इस तरह डिजाइन किया गया था कि असल मास्टरमाइंड्स की पहचान छिपी रहे और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचा जा सके।
2020 से विदेश से हो रहा था ऑपरेशन
CBI की जांच में सामने आया कि साल 2020 से विदेशी हैंडलर्स के इशारे पर भारत में शेल कंपनियां बनाई जा रही थीं।
चार विदेशी मास्टरमाइंड्स की पहचान—
- Zou Yi
- Huan Liu
- Weijian Liu
- Guanhua Wang
के रूप में हुई है।
भारतीय सहयोगी आम लोगों से पहचान से जुड़े दस्तावेज जुटाकर उन्हीं के नाम पर कंपनियां रजिस्टर कराते और बैंक अकाउंट खुलवाते थे। बाद में इन खातों के जरिए ठगी की रकम को कई प्लेटफॉर्म पर घुमाया जाता था, ताकि मनी ट्रेल छुपाई जा सके।
विदेश से हो रहा था रियल-टाइम कंट्रोल
फॉरेंसिक जांच में यह भी सामने आया कि पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क का ऑपरेशनल कंट्रोल विदेश से किया जा रहा था।
जांच में पाया गया कि दो भारतीय आरोपियों के बैंक अकाउंट से जुड़ा एक UPI ID अगस्त 2025 तक विदेशी लोकेशन से एक्टिव था, जिससे यह साफ हो गया कि नेटवर्क पर विदेश से रियल-टाइम ऑपरेशन और मॉनिटरिंग हो रही थी।
लोन ऐप, निवेश, MLM और जॉब स्कैम— सब एक ही नेटवर्क
CBI के अनुसार, यह संगठित सिंडिकेट देश के कई राज्यों में फैला हुआ था और हजारों आम नागरिकों को निशाना बना चुका था।
ठगी के तरीके—
- भ्रामक लोन ऐप
- फर्जी निवेश योजनाएं
- पोंजी और MLM स्कीम
- नकली पार्ट-टाइम जॉब ऑफर
- धोखाधड़ी वाले ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म
जांच में सामने आया कि इन सभी गतिविधियों के पीछे एक ही संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
27 ठिकानों पर CBI की छापेमारी
CBI ने कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हरियाणा में कुल 27 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया।
इस दौरान बड़ी संख्या में—
- डिजिटल डिवाइस
- दस्तावेज
- बैंकिंग और वित्तीय रिकॉर्ड
जब्त किए गए, जिनकी फॉरेंसिक जांच की गई।
पहले ही हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
CBI ने अक्टूबर 2025 में इस मामले में तीन मुख्य भारतीय सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।
यह केस गृह मंत्रालय के तहत I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) से मिले इनपुट के आधार पर दर्ज किया गया था।












