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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और वैज्ञानिक समुदाय को आत्मनिर्भर भारत के लिए नवाचार और सहयोग के लिए प्रेरित किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और वैज्ञानिक समुदाय को आत्मनिर्भर भारत के लिए सहयोग और नवाचार की दिशा में प्रेरित किया

नई दिल्ली | 27 जनवरी 2026 |रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में अपने संबोधन में DRDO (Defence Research and Development Organisation) और देश के वैज्ञानिक समुदाय को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। मंत्री ने कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र का लक्ष्य केवल सरकार की मेहनत से नहीं बल्कि वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और टेक्निकल स्टाफ के सतत प्रयासों से ही संभव होगा।

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में वैज्ञानिकों को रिस्क लेने और नए क्षेत्रों में नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि DRDO को अब एकाधिकार वाले R&D मॉडल से हटकर एक collaborative ecosystem की ओर बढ़ना होगा। इसमें पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट इंडस्ट्रीज, MSMEs, स्टार्ट-अप्स और अकादमिक संस्थान के साथ सहयोग शामिल होगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि तभी भारत आत्मनिर्भर और सशक्त वैज्ञानिक राष्ट्र के रूप में स्थापित हो सकेगा।

रक्षा मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि Light Combat Aircraft (Tejas) के विकास में DRDO और Hindustan Aeronautics Limited (HAL) के बीच knowledge sharing ने देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की और भी कई उपलब्धियाँ आने वाली हैं, और इसके लिए वैज्ञानिकों को खुले मन से अपने intellectual property और ज्ञान को साझा करना होगा।

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राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को यह भी कहा कि किसी भी रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन की सबसे बड़ी पूंजी उसके लोग होते हैं। उनके scientists, engineers और technicians ही असली ताकत हैं। उन्हें सीखने के अवसर, नेतृत्व की जिम्मेदारी और यह भरोसा दिया जाना चाहिए कि उनके ideas और सुझावों को सुना जाएगा

उन्होंने DRDO को सुझाव दिया कि संगठन के भीतर एक अलग wing बनाई जाए, जो उन क्षेत्रों में रिस्क ले जहां सफलता की संभावना कम दिखाई देती हो, लेकिन सफलता मिलने पर वह historic साबित हो। मंत्री ने कहा कि यह साहस और नवाचार भारत को वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से और अधिक सशक्त बनाएगा।

राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से प्रयास निरंतर जारी हैं, लेकिन वास्तविक सफलता तभी संभव होगी जब वैज्ञानिक open collaboration और knowledge sharing की दिशा में कदम बढ़ाएँ। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक और टेक्निकल समुदाय की सहभागिता भारत को वैज्ञानिक रूप से, सोच और आत्मबल के स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मंत्री का यह संदेश न केवल DRDO और रक्षा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणास्पद है, बल्कि यह पूरे देश के युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को risk-taking, innovation और collaborative research की दिशा में आगे बढ़ने का मार्गदर्शन भी प्रदान करता है।

राजनाथ सिंह का यह दृष्टिकोण भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति का संकेत है।

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