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कोरबा में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: कटघोरा तहसील की सहायक ग्रेड-2 मंजू कृष्णा धिरही निलंबित, रिश्वत का वीडियो आया था सामने






कोरबा में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: कटघोरा तहसील कार्यालय की सहायक ग्रेड-2 मंजू कृष्णा धिरही निलंबित, रिश्वत मांगने का वीडियो आया था सामने


कोरबा में भ्रष्टाचार पर जिला प्रशासन का बड़ा प्रहार: कटघोरा तहसील की सहायक ग्रेड-2 मंजू कृष्णा धिरही तत्काल प्रभाव से निलंबित, रिश्वत का वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर ने की कार्रवाई

विशेष रिपोर्ट: प्रदेश खबर नेटवर्क |
स्थान: कोरबा, छत्तीसगढ़ |
दिनांक: 23 जून 2026

कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में शासकीय कामकाज में पारदर्शिता, ईमानदारी और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक और बड़ी और नज़ीर पेश करने वाली कार्रवाई की है। जिला प्रशासन द्वारा भ्रष्टाचार और कार्यप्रणाली में अनियमितताओं के मामलों में अपनाई जा रही ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने तहसील कार्यालय कटघोरा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कड़ी कार्रवाई शासकीय सेवा की आड़ में आम नागरिकों को परेशान करने और अवैध वसूली करने वाले तत्वों के खिलाफ एक स्पष्ट और कड़ा संदेश है।

क्या है पूरा मामला: नकल जारी करने के एवज में मांगी गई थी अवैध राशि

प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, पूरा मामला कटघोरा तहसील कार्यालय से जुड़ा हुआ है, जहां आम जनता के राजस्व मामलों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं के संपादन में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी बीच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं दण्डाधिकारी कटघोरा के समक्ष एक बेहद गंभीर लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई। इस शिकायत में सजग आवेदक किशन कुमार ने आरोप लगाया था कि तहसील कार्यालय कटघोरा में उनके एक आवश्यक दस्तावेज की नकल (Certified Copy) जारी करने के एवज में वहां पदस्थ सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही द्वारा सीधे तौर पर अवैध राशि यानी रिश्वत की मांग की जा रही है।

आवेदक किशन कुमार ने केवल शिकायत ही दर्ज नहीं कराई, बल्कि अपने आरोपों की पुष्टि के लिए जिला प्रशासन के समक्ष एक पुख्ता वीडियो रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की। इस वीडियो रिकॉर्डिंग में संबंधित महिला कर्मचारी द्वारा शासकीय कार्य के बदले खुलेआम पैसों के लेनदेन और अवैध मांग की पुष्टि हो रही थी। तकनीकी युग में इस प्रकार के डिजिटल साक्ष्यों ने शिकायत को बेहद मजबूत और अकाट्य बना दिया, जिसके बाद प्रशासन के लिए इस पर त्वरित कदम उठाना लाजिमी हो गया था।

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मामले के मुख्य बिंदु और कार्रवाई का घटनाक्रम:

  • आरोपी कर्मचारी: मंजू कृष्णा धिरही, सहायक ग्रेड-02, तहसील कार्यालय कटघोरा, जिला कोरबा।
  • शिकायतकर्ता: स्थानीय सजग नागरिक किशन कुमार।
  • मामले की प्रकृति: तहसील कार्यालय से जरूरी विभागीय नकल जारी करने के एवज में रिश्वत की मांग करना।
  • साक्ष्य: आवेदक द्वारा प्रस्तुत की गई प्रत्यक्ष वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल सबूत।
  • जांच अधिकारी: अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं दण्डाधिकारी, कटघोरा।
  • अंतिम कार्रवाई: कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत द्वारा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबन।

एसडीएम की जांच रिपोर्ट और कड़े कदम की अनुशंसा

शिकायत और वीडियो रिकॉर्डिंग के सामने आते ही जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा द्वारा पूरे प्रकरण की गहनता से जांच और परीक्षण किया गया। जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता किशन कुमार के बयानों, उनके द्वारा प्रस्तुत वीडियो फुटेज की सत्यता और कार्यालय के रिकॉर्ड का मिलान किया। प्राथमिक जांच और परीक्षण के उपरांत यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही के खिलाफ लगाए गए आरोप न केवल प्रथम दृष्टया सही हैं, बल्कि उनका यह कृत्य एक लोक सेवक की गरिमा के सर्वथा विपरीत है।

अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा ने अपनी जांच पूरी करने के बाद एक विस्तृत जांच प्रतिवेदन जिला मुख्यालय भेजा। इस प्रतिवेदन में उन्होंने संबंधित कर्मचारी मंजू कृष्णा धिरही के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की स्पष्ट और मजबूत अनुशंसा की थी। एसडीएम की इस रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया था कि शासकीय कार्यालयों में इस प्रकार की अनियमितता को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई

अनुविभागीय अधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन का बारीकी से परीक्षण और विधिक मूल्यांकन करने के बाद कलेक्टर कोरबा कुणाल दुदावत ने मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया। कलेक्टर ने पाया कि संबंधित कर्मचारी मंजू कृष्णा धिरही का यह कृत्य सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के प्रावधानों के पूर्णतः विपरीत और विचलित करने वाला है। नियम-3 स्पष्ट रूप से प्रत्येक शासकीय सेवक से पूर्ण सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता और ऐसा कुछ भी न करने की अपेक्षा करता है जो एक शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय हो।

इस गंभीर कदाचार और स्थापित शासकीय नियमों के उल्लंघन के आधार पर, कलेक्टर ने अपनी प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग किया। इसके तहत मंजू कृष्णा धिरही, सहायक ग्रेड-02, तहसील कार्यालय कटघोरा को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया गया।

निलंबन अवधि के नियम: मुख्यालय में बदलाव और जीवन निर्वाह भत्ता

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, निलंबन की इस अवधि के दौरान अनुशासनात्मक नियमों के तहत मंजू कृष्णा धिरही का मुख्यालय भी बदल दिया गया है। प्रशासनिक और निष्पक्ष जांच के दृष्टिकोण से उनका नया मुख्यालय तहसील कार्यालय पोंड़ीउपरोड़ा निर्धारित किया गया है। निलंबन काल के दौरान उन्हें अनिवार्य रूप से पोंड़ीउपरोड़ा कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी और वे बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगी। इसके साथ ही, शासन के नियमानुसार निलंबन की इस अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) पात्रता के अनुसार प्रदान किया जाएगा।

भ्रष्ट आचरण और अनियमितताओं पर जिला प्रशासन की दो टूक चेतावनी

इस बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के बाद कोरबा जिला प्रशासन ने जिले के सभी विभागों, अनुभागों और तहसील कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों को बेहद कड़े शब्दों में सचेत किया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आम नागरिकों के हक पर डाका डालने वाले या शासकीय कार्यों में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, भ्रष्ट आचरण अथवा अवैध वसूली में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

जिला प्रशासन की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि आम जनता को परेशान करने वाली हर शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। यदि भविष्य में भी किसी अन्य विभाग या कार्यालय से ऐसी शिकायतें प्राप्त होती हैं और जांच में उनकी संपुष्टि होती है, तो दोषियों के विरुद्ध इससे भी अधिक कठोर कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह कार्रवाई केवल एक निलंबन मात्र नहीं है, बल्कि यह कोरबा जिला प्रशासन की पारदर्शिता, जनता के प्रति जवाबदेही और एक जनहितैषी एवं संवेदनशील कार्यप्रणाली को जमीनी स्तर पर लागू करने की कटिबद्धता का जीवंत प्रमाण है।

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