“आप हमारे जीवन की सबसे बड़ी छतरी थे…”: पिता की पुण्यतिथि पर भावुक हुए टीएस सिंहदेव, सोशल मीडिया पर साझा किया मार्मिक संदेश
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व उपमुख्यमंत्री और सरगुजा रियासत के महाराजा त्रिभुवनेश्वर शरण सिंहदेव (टी. एस. सिंहदेव) ने अपने दिवंगत पिता महाराजा मदनेश्वर शरण सिंहदेव की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए एक बेहद भावुक और मार्मिक संदेश साझा किया है। ‘टीएस बाबा’ के नाम से लोकप्रिय राजनेता ने अपने पिता को अपने जीवन की ‘सबसे बड़ी छतरी’ बताया, जिसने उनके पूरे परिवार को हर परिस्थिति में सुरक्षा, संस्कार और सही मार्गदर्शन प्रदान किया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए इस संदेश में सिंहदेव का अपने पिता के प्रति गहरा सम्मान, प्रेम और उनके बिछड़ने का दर्द साफ झलक रहा है। इस पोस्ट के सामने आने के बाद सरगुजा संभाग सहित पूरे छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में लोग महाराजा मदनेश्वर शरण सिंहदेव को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं और उनके योगदानों को याद कर रहे हैं।
पिता की विरासत और सिंहदेव के जीवन पर उनका प्रभाव
महाराजा मदनेश्वर शरण सिंहदेव सरगुजा रियासत के इतिहास में एक बेहद सम्मानित नाम रहे हैं। वे न केवल एक कुशल प्रशासक थे, बल्कि लोकतांत्रिक भारत में प्रशासनिक सेवाओं में भी उन्होंने अपनी एक अमिट छाप छोड़ी थी। वे तत्कालीन अविभाजित मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary) जैसे सर्वोच्च प्रशासनिक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। यही कारण है कि टी एस सिंहदेव के व्यक्तित्व में शालीनता, प्रशासनिक सूझबूझ और जनसेवा के जो गुण दिखाई देते हैं, उनके पीछे उनके पिता की सीख और संस्कारों का सबसे बड़ा हाथ रहा है।
सिंहदेव ने अपने संदेश में स्पष्ट रूप से इस बात को स्वीकार किया है कि आज वे जीवन के जिस मुकाम पर हैं, उनके पास जो नैतिक मूल्य हैं और उन्होंने राजनीति व समाज सेवा में जो भी सफलताएं हासिल की हैं, वे सब उनके पिता के द्वारा दिए गए मार्गदर्शन का ही परिणाम हैं। राजपरिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद जनता के बीच बेहद सादगी से रहने की उनकी कला उन्हें अपने पिता से ही विरासत में मिली है।
सरगुजा राजपरिवार का गौरवशाली इतिहास
सरगुजा राजपरिवार का छत्तीसगढ़, विशेषकर उत्तर छत्तीसगढ़ (सरगुजा संभाग) के इतिहास और विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ब्रिटिश काल से लेकर स्वतंत्रता के बाद तक, इस परिवार ने इस क्षेत्र के आदिवासियों, पिछड़ों और आम नागरिकों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया है।
- महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव: टी एस सिंहदेव के परदादा, जिन्होंने ब्रिटिश काल के दौरान सरगुजा की कमान संभाली और क्षेत्र के ढांचागत विकास की नींव रखी।
- महाराजा अंबिकेश्वर शरण सिंहदेव: उनके दादा, जिन्होंने इस विरासत को आगे बढ़ाया।
- महाराजा मदनेश्वर शरण सिंहदेव: टी एस सिंहदेव के पिता, जिन्होंने वर्ष 1966 से लेकर 2001 में अपने निधन तक सरगुजा के 117वें महाराजा के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। इसके साथ ही वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के एक बेहद कड़क और ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने गए।
- महारानी देवेंद्र कुमारी: टी एस सिंहदेव की माता, जो स्वयं राजनीति में सक्रिय रहीं और मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
एक अद्वितीय संगम: राजशाही परंपरा और आधुनिक लोकसेवा
मदनेश्वर शरण सिंहदेव का जीवन इस बात का बेहतरीन उदाहरण था कि कैसे पुरानी परंपराओं को संजोते हुए आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी उपयोगिता सिद्ध की जा सकती है। एक तरफ जहां वे सरगुजा की जनता के लिए ‘महाराजा’ थे, वहीं दूसरी तरफ वे भारतीय संविधान और नियमों के तहत चलने वाले एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी थे। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव के रूप में उनके कार्यकाल को आज भी नौकरशाही में एक मिसाल के तौर पर याद किया जाता है।
डैडी की सीख पर चलते हुए: टीएस बाबा का राजनीतिक सफर
पिता मदनेश्वर शरण सिंहदेव के निधन के बाद, वर्ष 2001 में टी एस सिंहदेव का सरगुजा के महाराजा के रूप में प्रतीकात्मक राज्याभिषेक हुआ। हालांकि, उन्होंने कभी भी अपनी इस ‘शाही’ उपाधि का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया। उन्होंने हमेशा जनता के बीच एक जनसेवक और ‘बाबा’ के रूप में अपनी पहचान बनाना पसंद किया।
उनके राजनीतिक जीवन पर नज़र डालें तो उनके पिता की प्रशासनिक दूरदर्शिता उनके कार्यों में स्पष्ट झलकती है। वर्ष 2008 में पहली बार अंबिकेश्वर (अंबिकापुर) विधानसभा सीट से विधायक चुने जाने के बाद से वे लगातार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 2013 से 2018 के बीच छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के रूप में उन्होंने तत्कालीन सरकार की नीतियों का पुरजोर विरोध किया और जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाया।
घोषणा पत्र के शिल्पकार और स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कार्य
साल 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की बंपर जीत के पीछे टी एस सिंहदेव द्वारा तैयार किए गए ‘जन घोषणा पत्र’ की बहुत बड़ी भूमिका थी। उन्होंने राज्य के हर वर्ग से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझा था। इसके बाद भूपेश बघेल सरकार में उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, बीस सूत्रीय कार्यान्वयन, वाणिज्यिक कर (जीएसटी) और पंचायत एवं ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कोरोना महामारी के संकट काल के दौरान उनके द्वारा किए गए प्रबंधन की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हुई थी।
छत्तीसगढ़ के पहले उपमुख्यमंत्री बनने का गौरव
जून 2023 में, उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य का पहला उपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) नियुक्त किया। हालांकि यह कार्यकाल कुछ महीनों का ही रहा, लेकिन उन्होंने इस दौरान भी अपनी शालीन और विकासपरक राजनीति से लोगों का दिल जीता।
जनता और समर्थकों की प्रतिक्रियाएं
सिंहदेव की इस भावुक पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम जनता की ओर से प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। लोग दिवंगत महाराजा मदनेश्वर शरण सिंहदेव की पुरानी तस्वीरों को साझा कर उन्हें नमन कर रहे हैं। कई यूज़र्स ने लिखा कि ‘बाबा साहब’ आज जिस गरिमा और ईमानदारी के साथ राजनीति कर रहे हैं, वह उनके पिता के दिए गए महान संस्कारों की ही देन है।
सरगुजा संभाग के एक स्थानीय नागरिक ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा, “महाराजा मदनेश्वर शरण सिंहदेव जी ने हमेशा सरगुजा के लोगों को अपने परिवार की तरह समझा। आज टीएस बाबा भी उसी परंपरा को निभा रहे हैं। उनके पिता की स्मृति हमेशा इस अंचल के लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।”
यादें जो हमेशा रास्ता दिखाएंगी
एक राजनेता के रूप में टी एस सिंहदेव ने भले ही कई उतार-चढ़ाव देखे हों, लेकिन अपने परिवार और विशेषकर अपने पिता के प्रति उनकी यह अगाध श्रद्धा यह दर्शाती है कि वे अपने जड़ों से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं। उनका यह संदेश सिर्फ एक पुत्र द्वारा अपने पिता को दी गई श्रद्धांजलि नहीं है, बल्कि उन शाश्वत पारिवारिक मूल्यों की बानगी है जो किसी भी व्यक्ति को समाज में एक बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद भी जमीन से जोड़े रखते हैं।
महाराजा मदनेश्वर शरण सिंहदेव आज भले ही भौतिक रूप से इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन जैसा कि उनके सुपुत्र ने कहा—उनकी सीख, उनके जीवन के सबक और उनका आशीर्वाद आज भी उनके पूरे परिवार और सरगुजा की जनता का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।














