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सरगुजा: कलाकेन्द्र मैदान आबंटन ऑडियो कांड में सियासी भूचाल, कांग्रेस ने की SIT गठन की मांग






सरगुजा में सियासी भूचाल: कलाकेन्द्र मैदान आबंटन भ्रष्टाचार मामले में SIT गठन की मांग, कांग्रेस ने एसपी को सौंपा ज्ञापन


सरगुजा में सियासी भूचाल: कलाकेन्द्र मैदान आबंटन भ्रष्टाचार मामले में SIT गठन की मांग, कांग्रेस ने एसपी को सौंपा ज्ञापन

ब्यूरो रिपोर्ट, प्रदेश खबर न्यूज नेटवर्क | अंबिकापुर (सरगुजा)

अंबिकापुर। सरगुजा जिला मुख्यालय के प्रतिष्ठित कलाकेन्द्र मैदान में मीनाबाजार (मेला) आबंटन की अनुमति के एवज में लाखों रुपये के कथित लेन-देन का एक सनसनीखेज ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय राजनीति में जबरदस्त उबाल आ गया है। इस गंभीर मामले को लेकर सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी ने मोर्चा खोल दिया है। नगर पालिक निगम अंबिकापुर में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के नेतृत्व में कांग्रेस के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) सरगुजा से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए तत्काल एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की पुरजोर मांग की है।

वायरल ऑडियो से खुला भ्रष्टाचार का खेल: लाखों के लेन-देन का दावा

दरअसल, पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक टेलीफोनिक वार्तालाप का कथित ऑडियो तेजी से प्रसारित हुआ, जिसने नगर निगम से लेकर राजनीतिक गलियारों तक खलबली मचा दी है। इस वायरल ऑडियो में कलाकेन्द्र मैदान में मीनाबाजार लगाने की अनुमति देने के बदले लाखों रुपये की रिश्वत और गंभीर वित्तीय लेन-देन की बातें स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही हैं।

राजनीतिक हलकों और आम जनता के बीच यह चर्चा बेहद गर्म है कि इस ऑडियो में मौजूद आवाजें अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिला अध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया की हैं। इस खुलासे के बाद से ही शहर में भ्रष्टाचार के इस कथित सिंडिकेट को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जा रही हैं।

कांग्रेस का चरणबद्ध आंदोलन और प्रशासनिक घेराबंदी

इस मामले के प्रकाश में आते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे हाथों-हाथ लिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया। इस संबंध में अब तक निम्नलिखित घटनाक्रम सामने आए हैं:

  • 22 जून को कलेक्टर को ज्ञापन: ऑडियो के सार्वजनिक होने के तुरंत बाद, कांग्रेस ने 22 जून को कलेक्टर सरगुजा को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से निवेदन किया गया था कि करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि के व्यावसायिक उपयोग और आबंटन में हुए इस खेल की जांच के लिए एक विशेष टीम बनाई जाए।
  • 27 जून (शनिवार) को आजाक थाना का दौरा: महापौर मंजूषा भगत ने ऑडियो वायरल होने के बाद इसे पूर्णतः ‘एआई जनरेटेड’ (कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा तैयार फर्जी आवाज) और राजनीतिक साजिश बताते हुए 22 जून को ही आदिम जाति कल्याण (आजाक) थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत पर पुलिस द्वारा की गई प्रगति और विवेचना की स्थिति जानने के लिए 27 जून शनिवार को नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के नेतृत्व में कांग्रेस का एक दल आजाक थाना पहुंचा।
  • क्षेत्राधिकार का पेच और पुलिस का इनकार: आजाक थाने के अधिकारियों से चर्चा के दौरान कांग्रेस दल को यह चौकाने वाली जानकारी मिली कि यह पूरा मामला तकनीकी और विधिक रूप से आजाक थाने के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) में नहीं आता है। क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए आजाक थाना पुलिस ने न तो इस मामले में अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है और न ही किसी भी प्रकार की आधिकारिक विवेचना या जांच प्रारंभ की गई है।

एसपी कार्यालय पहुंचे कांग्रेसी, दिया 3 दिनों का अल्टीमेटम

आजाक थाने से बैरंग लौटने और पुलिसिया कार्रवाई में शून्यता दिखने के बाद, आज रविवार 28 जून को कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल सीधे पुलिस अधीक्षक सरगुजा के द्वार पर जा पहुंचा। नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के नेतृत्व में दर्जनों वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एसपी से मुलाकात कर एक नया और कड़ा शिकायती पत्र सौंपा।

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कांग्रेस की मुख्य मांगें और तकनीकी जांच के बिंदु:

  • मामले की बहुआयामी संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल SIT का गठन हो।
  • कथित ऑडियो की सत्यता जांचने के लिए दोनों पक्षों की वॉयस सैंपलिंग (Voice Sampling) कराई जाए।
  • वॉयस सैंपल को उच्च स्तरीय फोरेंसिक लैब (FSL) जांच के लिए भेजा जाए।
  • संबंधित नेताओं और मेला संचालकों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) की गहन जांच हो।

प्रशासकीय चर्चा के दौरान शफी अहमद ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष स्पष्ट किया कि महापौर के द्वारा दिए गए आवेदन के बाद अब यह पूरा मामला “बहुआयामी” और पेचीदा हो गया है। एक तरफ महापौर का आवेदन यह कह रहा है कि वे एक आदिवासी महिला हैं और उन पर अत्याचार तथा उनकी छवि खराब करने के लिए एआई (AI) तकनीक का सहारा लेकर फर्जी ऑडियो बनाया गया है। वहीं दूसरी तरफ, इसी ऑडियो का वास्तविक वार्तालाप सत्ता और शासन में बैठे रसूखदार लोगों के द्वारा किए जा रहे गंभीर और संगठित भ्रष्टाचार की पुष्टि करता है। ऐसे विरोधाभासी और संवेदनशील मामले में किसी एक साधारण थाने के भरोसे रहने के बजाय एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर समयबद्ध विवेचना उसके हाथों में सौंपना ही न्यायसंगत होगा।

“कॉल रिकॉर्ड सार्वजनिक करें या फिर दाल में कुछ काला है”

पुलिस अधीक्षक से मुलाकात और चर्चा के उपरांत नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने एसपी कार्यालय परिसर में ही मीडियाकर्मियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने इस दौरान सत्तापक्ष और मामले से जुड़े पदाधिकारियों पर तीखे सियासी तीर छोड़े।

“इस पूरे प्रकरण से दूध का दूध और पानी का पानी होना बेहद जरूरी है। यदि इस मामले से जुड़े लोग, जिनमें महापौर और भाजपा जिलाध्यक्ष का नाम आ रहा है, पूरी तरह साफ-पाक हैं, तो उन्हें स्वयं ही आगे आकर अपना-अपना मोबाइल कॉल रिकॉर्ड (CDR) सार्वजनिक कर देना चाहिए। अपने दामन में लगे इस बड़े दाग को धोने का यह सबसे सीधा तरीका है। अगर वे ऐसा करने में हिचकिचा रहे हैं, तो यह साफ है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है।”

— शफी अहमद, नेता प्रतिपक्ष, नगर पालिक निगम अंबिकापुर

नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने आवेदन के अनुरूप विशेष जांच दल के गठन हेतु केवल 3 दिनों का इंतजार करेगी। यदि इन 3 दिनों के भीतर पुलिस प्रशासन किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचता है या एसआईटी का गठन नहीं किया जाता है, तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी। इसके बाद शहर में एक व्यापक और उग्र जनांदोलन छेड़ा जाएगा, साथ ही इस महाभ्रष्टाचार के खिलाफ सीधे न्यायालय की शरण लेकर परिवाद (Private Complaint) पेश करने पर भी अंतिम फैसला लिया जाएगा।

प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने में ये रहे मौजूद

रविवार को एसपी सरगुजा को ज्ञापन सौंपने के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों, पार्षदों और कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही। भ्रष्टाचार के विरोध में एकजुटता प्रदर्शित करने वाले इस दल में मुख्य रूप से निम्नलिखित नेता सम्मिलित रहे:

इस बड़े घटनाक्रम ने अंबिकापुर की स्थानीय राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। अब देखना यह है कि कांग्रेस की इस 3 दिनों की समय-सीमा पर सरगुजा पुलिस प्रशासन और राज्य शासन क्या रुख अपनाता है, और क्या वाकई इस बहुचर्चित ‘ऑडियो कांड’ की कड़ियों को जोड़ने के लिए एसआईटी का गठन होता है या नहीं।


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