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नवकरणीय ऊर्जा में MP का रिकॉर्ड: मुरैना में देश की पहली अनूठी 440 MW सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना, नीमच-शाजापुर सौर पार्कों का लोकार्पण






मध्यप्रदेश का ऐतिहासिक कदम: मुरैना में देश की अनूठी 440 MW सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना, नीमच और शाजापुर सौर पार्कों का लोकार्पण


मध्यप्रदेश / नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा

नवकरणीय ऊर्जा में मध्यप्रदेश का नया कीर्तिमान: मुरैना में देश की सबसे अनूठी 440 MW सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना, नीमच-शाजापुर सौर पार्कों का ऐतिहासिक लोकार्पण

स्थान: भोपाल / मुरैना / नीमच / शाजापुर
दिनांक: 29 जून 2026
संपादक: विशेष ब्यूरो

परियोजना की सबसे बड़ी ऐतिहासिक सफलता:

मुरैना सोलर + बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजना में मात्र दो रुपए 70 पैसे (₹2.70) प्रति यूनिट की रिकॉर्ड प्रतिस्पर्धी दर प्राप्त हुई है, जो देश में अब तक की न्यूनतम दर है!

भोपाल/मुरैना। मध्यप्रदेश ने अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में देश पटल पर एक बार फिर इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश नए आयाम स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में मुरैना की सोलर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजना को एक युगांतरकारी कदम बताया गया है, जो मध्यप्रदेश के नागरिकों, विशेष रूप से चंबल क्षेत्र के निवासियों के लिए एक बड़ी सौगात और गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव भोपाल में देश में अपनी तरह की अनूठी 440 मेगावॉट मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना के पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA – बिजली खरीद समझौता) कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी और राज्य के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

लगभग 1 गीगावॉट (950 मेगावॉट) स्वच्छ ऊर्जा राष्ट्र को समर्पित

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश की ऊर्जा यात्रा में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जब 500 मेगावॉट नीमच सौर पार्क और 450 मेगावॉट शाजापुर सौर पार्क के माध्यम से कुल 950 मेगावॉट (लगभग 1 गीगावॉट) स्वच्छ ऊर्जा क्षमता राष्ट्र को समर्पित की गई। यह मील का पत्थर रीवा सौर परियोजना से शुरू हुई मध्यप्रदेश की निरंतर हरित विकास यात्रा का अगला महत्वपूर्ण चरण है।

परियोजना / सौर पार्क का नाम कुल क्षमता (MW) प्राप्त न्यूनतम दर (प्रति यूनिट) प्रमुख लाभार्थी / विशेषता
मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज (BESS) 440 मेगावॉट ₹2.70 देश की न्यूनतम दर, अभिनव डबल-यूज़ बैटरी मॉडल
नीमच सौर पार्क 500 मेगावॉट ₹2.14 से ₹2.15 भारतीय रेलवे को स्वच्छ विद्युत की सीधी आपूर्ति
शाजापुर सौर पार्क 450 मेगावॉट ₹2.33 से ₹2.35 भारतीय रेलवे को निर्बाध ग्रीन एनर्जी सप्लाई
फीडर सौर ऊर्जीकरण कार्यक्रम 4,022 मेगावॉट ₹2.40 (रिकॉर्ड दर) किसानों को दिन के समय गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति

मुरैना परियोजना की अभिनव विशेषता: एक बैटरी, दिन में 2 बार उपयोग

मुरैना सोलर + बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम परियोजना भारत की ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) यात्रा को एक नई दिशा दे रही है। इस परियोजना की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका अभिनव बैटरी उपयोग मॉडल है। इसके तहत एक ही बैटरी एसेट का प्रतिदिन 2 बार उपयोग किया जाना संभव होगा। इस नवोन्मेषी प्रयोग से बैटरी असेट्स की उत्पादकता दोगुनी हो जाएगी और ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) की लागत में भारी गिरावट आएगी। यह मॉडल अक्षय ऊर्जा को अधिक किफायती और व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक बनाने में गेम-चेंजर साबित होगा।

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12 घंटे तक चली देश-विदेश की 16 कंपनियों में महा-प्रतिस्पर्धा

इस परियोजना के लिए अपनाई गई पारदर्शी निविदा प्रक्रिया में देश और विदेश की 16 प्रतिष्ठित कंपनियों ने भाग लिया। लगभग 12 घंटे तक चली तीव्र और प्रतिस्पर्धी लाइव रिवर्स ऑक्शन बोली के परिणामस्वरूप यह ऐतिहासिक ₹2.70 का टैरिफ प्राप्त हुआ है, जो इस श्रेणी की परियोजनाओं के लिए निर्धारित पूर्व राष्ट्रीय मानकों से भी बहुत कम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अद्भुत और अनुकरणीय कार्य कर दिखाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष आशीर्वाद मध्यप्रदेश को देश का नंबर वन राज्य बनाने में मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यद्यपि गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य भी इस दिशा में निरंतर प्रगति कर रहे हैं, लेकिन मध्यप्रदेश की प्रगति की गति सबसे तेज और अनूठी है। उन्होंने सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपने ही बनाए रिकॉर्ड्स को लगातार तोड़कर देश का नेतृत्व कर रहा है।

एक साल में शत-प्रतिशत ‘सोलराइज्ड’ होंगी सभी सरकारी इमारतें

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने सूर्य की असीम शक्ति को पहचाना और बड़े पैमाने पर इसके उपयोग को बढ़ावा दिया। केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव से एक महत्वपूर्ण आग्रह किया, जिसे स्वीकार करते हुए आगामी रणनीति बनाई गई है। इसके तहत राज्य में एक वर्ष के भीतर सभी शासकीय भवनों (Government Buildings) पर सोलर पैनल स्थापित कर उन्हें पूरी तरह सोलराइज्ड किया जाएगा।

दिल्ली मेट्रो और भारतीय रेलवे को रोशन कर रहा है मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश आज केवल बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के बड़े परिवहन तंत्रों को ऊर्जावान बना रहा है। जहां एक ओर आगर-शाजापुर-नीमच (ASN) सौर परियोजनाओं के माध्यम से भारतीय रेलवे को स्वच्छ विद्युत आपूर्ति की जा रही है, वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक रीवा सौर परियोजना के माध्यम से दिल्ली मेट्रो को निरंतर स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराई जा रही है। इन परियोजनाओं का सफल विकास एनटीपीसी नवकरणीय ऊर्जा लिमिटेड (NTPC Renewable Energy Ltd), टाटा पॉवर (Tata Power) तथा वारी एनर्जीस (Waaree Energies) जैसे प्रतिष्ठित डेवलपर्स द्वारा शासन, ट्रांसमिशन एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के उत्कृष्ट समन्वय से किया गया है।

किसानों को दिन में मिलेगी बिजली, ग्रामीण जीवन में आएगा गुणात्मक सुधार

राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे 4,022 मेगावॉट फीडर सौर ऊर्जीकरण कार्यक्रम के तहत निविदा में ₹2.40 प्रति यूनिट की रिकॉर्ड न्यूनतम दर प्राप्त हुई है। इसके माध्यम से प्रदेश के अन्नदाता किसानों को अब दिन के समय भी गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय और निर्बाध बिजली उपलब्ध हो सकेगी, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में व्यापक और गुणात्मक सुधार आएगा।

दावोस विजन और 24×7 राउंड-द-क्लॉक एनर्जी की ओर कदम

मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF), दावोस में घोषित विजन के अनुरूप, मध्यप्रदेश ने अब स्थापित क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ‘सुनिश्चित आपूर्ति’ पर फोकस किया है। राज्य सरकार ने 4 घंटे एवं 6 घंटे ऊर्जा भंडारण आधारित अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की निविदाएं जारी कर दी हैं, जिन्हें वैश्विक उद्योग जगत से बेहद उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। इसके साथ ही, देश की अग्रणी 24×7 राउंड-द-क्लॉक (दिन-रात निरंतर) अक्षय ऊर्जा परियोजना की दिशा में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ चुका है, जिसकी महत्वपूर्ण प्री-बिड बैठक आगामी 1 जुलाई 2026 को आयोजित होने जा रही है।

पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से समृद्धि का नया मार्ग

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच पिछले 20-25 वर्षों से लंबित पानी के बंटवारे का विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो गया है। इसके चलते ‘पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना’ को मंजूरी मिली है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से राजस्थान के साथ-साथ मध्यप्रदेश के चंबल और मालवा अंचल के 13 जिलों के एक बहुत बड़े भू-भाग को सिंचाई और समृद्धि का सीधा लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित

भोपाल में आयोजित इस गरिमामयी पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) हस्ताक्षर समारोह में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, म.प्र. ऊर्जा विकास निगम के एमडी अमित तोमर सहित एग्रीमेंट से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के शीर्ष पदाधिकारी और निवेशक उपस्थित थे।

20 हजार मेगावॉट से अधिक के आगामी लक्ष्य के साथ मध्यप्रदेश आज देश की ‘हरित ऊर्जा राजधानी’ (Green Energy Capital) बनने की दिशा में बेहद मजबूती से अग्रसर है। यह कदम ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प और भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।

रिपोर्ट: प्रदेश खबर न्यूज नेटवर्क


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