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विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का वृहद सर्वेक्षण: कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देश






विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का वृहद सर्वेक्षण: कलेक्टर आकाश छिकारा ने जारी किए कड़े निर्देश


प्रशासनिक मुस्तैदी

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का होगा प्रामाणिक सत्यापन: कलेक्टर आकाश छिकारा ने समय-सीमा बैठक (TL) के मुख्य एजेंडे में किया शामिल

जिला: सरगुजा (छत्तीसगढ़)
दिनांक: 30 जून, 2026
अपडेटेड: ब्यूरो न्यूज़
राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सही पहचान, प्रामाणिक सत्यापन और एक अद्यतन (Updated) डिजिटल डेटा संकलन के लिए एक वृहद और व्यापक सर्वेक्षण अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है। इस महाभियान को पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने के लिए कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने मैदानी स्तर पर समन्वित पहल सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

इस अभियान की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए कलेक्टर आकाश छिकारा ने इसे जिला स्तरीय समय-सीमा (TL) बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल करने का बड़ा निर्णय लिया है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक स्तर पर अभियान की प्रगति की निरंतर और बारीकी से समीक्षा करना है, ताकि प्रशासनिक या मैदानी स्तर पर कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही न आने पाए। इस पूरे अभियान की सफलता के लिए तीन प्रमुख विभागों—स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग, और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच आपसी तालमेल और मैदानी स्तर पर एक मजबूत समन्वित नेटवर्क तैयार किया गया है।

अभियान का मुख्य उद्देश्य

इस वृहद सर्वेक्षण का मुख्य लक्ष्य जिले के दूरस्थ अंचलों तक रह रहे दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सटीक पहचान करना है, ताकि उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं, पेंशन, छात्रवृत्ति और आवश्यक सहायक उपकरणों से सीधे जोड़ा जा सके। डिजिटल पोर्टल पर इनका त्रुटिहीन डेटा अपलोड होने से भविष्य में मिलने वाली शासकीय मदद को सुगम बनाया जा सकेगा।

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विभागों को सौंपी गई विशिष्ट जिम्मेदारियां

कलेक्टर ने उक्त तीनों विभागों के अधिकारियों को उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंपते हुए सकारात्मक और संवेदनशीलता के साथ प्रयास करने को कहा है। तीनों विभागों की भूमिका और कार्ययोजना को इस प्रकार विभाजित किया गया है:

1. स्वास्थ्य विभाग (Health Department)

  • विशेषज्ञ चिकित्सकों और मेडिकल बोर्ड की उपलब्धता सुनिश्चित करना ताकि दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में तेजी आए।
  • बच्चों की दिव्यांगता की श्रेणी और उसकी गंभीरता का भौतिक (Physical) सत्यापन करना।
  • पात्र बच्चों का ‘यूनिक आईडी पोर्टल’ (UDID) पर अनिवार्य पंजीकरण कराने में तकनीकी व व्यावहारिक सहयोग देना।
  • बच्चों को उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुसार व्हीलचेयर, कैलिपर्स, श्रवण यंत्र आदि सहायक उपकरण उपलब्ध कराने हेतु विशेष शिविरों का आयोजन करना।
  • बौद्धिक अक्षमता (Mental Disability) से ग्रसित बच्चों की सही और वैज्ञानिक पहचान के लिए साइकोलॉजिस्ट (मनोवैज्ञानिकों) की सेवाएं सुनिश्चित करना।

2. समाज कल्याण विभाग (Social Welfare)

  • विभाग के पास पूर्व से उपलब्ध दिव्यांगता प्रमाण पत्र और दिव्यांगता आईडी (UDID) से जुड़े पुराने डेटा को सर्वे टीम के साथ साझा करना ताकि कार्य सुगम और त्रुटिहीन बने।
  • पेंशन, छात्रवृत्ति और पुनर्वास कार्यक्रमों जैसी अपनी सभी कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी और पात्रता नियम सर्वे टीम को उपलब्ध कराना।
  • सर्वेक्षण के दौरान मैदानी स्तर पर चिन्हित होने वाले नए दिव्यांग बच्चों को उनकी पात्रता के अनुसार तुरंत इन योजनाओं से लिंक (On-the-spot Link) करना।
  • योजनाओं का लाभ सीधे बच्चों या उनके अभिभावकों के बैंक खातों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करना।

3. महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD)

  • शुरुआती (प्रारंभिक) स्तर पर बच्चों की पहचान को सबसे मजबूत बनाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजरों को सक्रिय करना।
  • 0 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के सभी बच्चों की घर-घर जाकर एक प्रारंभिक सूची तैयार करना।
  • कुपोषित, अत्यधिक कुपोषित और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पूर्व जानकारी सर्वे टीम के साथ साझा करना।
  • समुदाय स्तर पर घर-घर जाकर दिव्यांगता के प्रति जागरूकता फैलाना ताकि ग्रामीण अपने बच्चों को छिपाने के बजाय जांच के लिए आगे लाएं।
  • प्रारंभिक हस्तक्षेप (Early Intervention): कम उम्र में ही दिव्यांगता के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर उन्हें समय पर आवश्यक चिकित्सा सहायता और थैरेपी प्रदान कराना।

सकारात्मक प्रयासों और अंतर्विभागीय समन्वय पर जोर

कलेक्टर आकाश छिकारा ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक सामान्य सर्वे नहीं है, बल्कि यह विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के जीवन को एक नई दिशा देने का मानवीय प्रयास है। अक्सर जागरूकता के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों के माता-पिता बच्चों की दिव्यांगता की पहचान सही समय पर नहीं कर पाते या संकोचवश उन्हें सामने नहीं लाते। महिला एवं बाल विकास विभाग का मैदानी अमला (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) इसमें सेतु का काम करेगा।

जैसे ही आंगनबाड़ी स्तर पर संभावित बच्चों की सूची बनेगी, स्वास्थ्य विभाग का मेडिकल बोर्ड उनकी चिकित्सकीय जांच कर तुरंत प्रमाण पत्र तैयार करेगा। इसके तत्काल बाद समाज कल्याण विभाग बिना किसी देरी के उन्हें पेंशन और उपकरणों का लाभ देना शुरू करेगा। यह त्रिकोणीय समन्वय ही इस पूरे अभियान की रीढ़ है। कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में इसके आंकड़ों के साथ उपस्थित रहें।


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