कांकेर: PM आवास की राशि लेकर घर न बनाने वालों पर होगी FIR; संपत्ति कुर्की और वसूली की सख्त चेतावनी जारी
उत्तर बस्तर कांकेर। नगर पालिका परिषद कांकेर के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को लेकर एक बेहद बड़ी और प्रशासनिक सख्ती की खबर सामने आ रही है। योजना के तहत पक्का मकान बनाने के लिए सरकारी राशि प्राप्त करने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं करने अथवा कार्य को बीच में ही अधूरा छोड़ने वाले हितग्राहियों के खिलाफ अब प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्य नगरपालिका अधिकारी पवन मेरिया द्वारा ऐसे सभी डिफॉल्टर हितग्राहियों को सीधे तौर पर सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मुख्य नगरपालिका अधिकारी पवन मेरिया ने आधिकारिक तौर पर कड़े दिशा-निर्देश और लिखित चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जिन भी हितग्राहियों ने किस्तों का भुगतान होने के बाद भी लापरवाही बरती है, वे जल्द से जल्द अपने मकान का निर्माण कार्य पूर्ण करा लें। प्रशासन अब इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है और इसके लिए बाकायदा समय-सीमा भी तय कर दी गई है।
सितंबर के बाद बंद हो जाएगा योजना का खाता: नहीं मिलेगी अंतिम किस्त
मामले का विस्तृत विवरण देते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी पवन मेरिया ने बताया कि नगर पालिका परिषद कांकेर के अंतर्गत आने वाले कई ऐसे हितग्राही चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें योजना के नियमानुसार प्रथम एवं द्वितीय किस्त की राशि सीधे उनके बैंक खातों में जारी की जा चुकी है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर या तो निर्माण कार्य शुरू ही नहीं किया गया है, या फिर राशि निकालने के बाद काम को अधर में लटका कर छोड़ दिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन से प्राप्त नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार, आगामी सितंबर माह के बाद इस योजना के तहत किसी भी हितग्राही को किसी भी अगली अथवा अंतिम किस्त की राशि जारी नहीं की जाएगी। इस निर्धारित समयावधि के समाप्त होते ही योजना से जुड़े संबंधित बैंक खाते को पूरी तरह से बंद (Freeze) कर दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि जो हितग्राही सितंबर तक अपना काम पूरा नहीं करेंगे, उन्हें आगे की कोई आर्थिक मदद नहीं मिल सकेगी।
होगी धोखाधड़ी की एफआईआर और संपत्तियों की कुर्की
मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि सरकारी धन का इस प्रकार का दुरुपयोग किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन हितग्राहियों ने लोक धन (Public Money) यानी सरकारी सहायता राशि प्राप्त कर ली है और फिर भी व्यक्तिगत लापरवाही या जानबूझकर आवास का निर्माण नहीं करा रहे हैं, उनके विरुद्ध नगर पालिका प्रशासन द्वारा सीधे धोखाधड़ी और गबन का आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कराया जा सकता है।
इसके साथ ही, केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसके तहत राजस्व विभाग के माध्यम से एक विशेष टीम गठित कर संबंधित हितग्राही से दी गई राशि की भू-राजस्व की बकाया की भांति कड़ाई से वसूली की जाएगी। यदि हितग्राही राशि लौटाने या मकान बनाने में असमर्थता दिखाता है, तो आवश्यकता पड़ने पर उसकी भूमि, अचल संपत्ति एवं अन्य व्यक्तिगत संपत्तियों को कुर्क (Seize) करने और नीलाम करने की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
लापरवाही करने वालों से अंतिम अपील
पवन मेरिया ने योजना के मूल उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का एकमात्र पवित्र उद्देश्य समाज के गरीब, निर्धन और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को खुद का पक्का सुरक्षित आशियाना उपलब्ध कराना है। सरकार इस पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है ताकि हर सिर को छत मिल सके। परंतु, कुछ हितग्राहियों द्वारा राशि का आहरण कर लेने के बाद भी निर्माण कार्य में घोर लापरवाही बरती जा रही है, जो कि अत्यंत खेदजनक और नियम विरुद्ध है।
उन्होंने अंत में नगर पालिका क्षेत्र के ऐसे सभी डिफाल्टर हितग्राहियों से अंतिम बार बेहद संजीदगी से अपील की है कि वे प्रशासनिक और कानूनी पचड़ों से बचने के लिए हर हाल में सितंबर से पहले अपने स्वीकृत आवास का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चलाकर पूर्ण करा लें। इसके बाद शासन स्तर से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वित्तीय सहायता या समय-वृद्धि की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी और नियमों के मुताबिक कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक कार्रवाई का मुख्य विवरण
| विषय | प्रशासनिक नियम / कार्रवाई |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) – PMAY-U |
| सख्त निर्देश जारीकर्ता | पवन मेरिया (मुख्य नगरपालिका अधिकारी, कांकेर) |
| अंतिम समय-सीमा (Deadline) | सितंबर 2026 तक निर्माण पूर्ण करना अनिवार्य |
| डिफॉल्टर्स पर कानूनी कार्रवाई | धोखाधड़ी का आपराधिक मामला (FIR) दर्ज होगा |
| वित्तीय वसूली की प्रक्रिया | राजस्व विभाग के माध्यम से भूमि एवं संपत्ति की कुर्की |
Ashish Sinha
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