सूरजपुर: श्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में वृहद विधिक जागरूकता कार्यक्रम संपन्न; साइबर अपराध, ‘मनी म्यूल’ और निःशुल्क कानूनी सहायता पर गहन मंथन
सूरजपुर। जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर विनीता वार्नर तथा सचिव पायल टोपनों के कुशल मार्गदर्शन में श्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, औद्योगिक एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द्र, कॉलेज रोड, सूरजपुर में एक दिवसीय वृहद विधिक जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य युवा छात्र-छात्राओं को उनके मौलिक कानूनी अधिकारों, सामाजिक कर्तव्यों, वर्तमान दौर की सबसे बड़ी चुनौती यानी साइबर सुरक्षा तथा यातायात नियमों के प्रति जागरूक और सतर्क बनाना था। कार्यक्रम में तकनीकी संस्थान के सैकड़ों छात्र-छात्राओं सहित शैक्षणिक स्टाफ ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।
साइबर अपराधों की बढ़ती विभीषिका और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act, 2000)
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी हिमांशु पण्डा ने उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बेहद सरल, सुबोध एवं व्यावहारिक भाषा में कानून के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने वर्तमान डिजिटल युग में तेजी से पैर पसार रहे साइबर अपराधों पर गहरी चिंता व्यक्त की। न्यायाधीश पण्डा ने कहा कि जैसे-जैसे तकनीक का विकास हो रहा है, वैसे-वैसे अपराधियों ने ठगी के नए और अदृश्य तरीके खोज लिए हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन के इस दौर में थोड़ी सी भी असावधानी किसी को भी बड़ी मुसीबत में डाल सकती है।
उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) के प्रमुख कानूनी प्रावधानों से छात्र-छात्राओं को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि इंटरनेट के माध्यम से की जाने वाली किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, डेटा चोरी, पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट), अश्लील सामग्री का प्रसार या किसी को ऑनलाइन प्रताड़ित करना (साइबर स्टॉकिंग और बुलिंग) कानूनन गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। इन अपराधों के लिए भारतीय कानून में कठोर कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है।
युवाओं के लिए नया खतरा: क्या है ‘मनी म्यूल’ (Money Mule) और इससे कैसे बचें?
व्याख्यान के दौरान न्यायाधीश हिमांशु पण्डा ने वर्तमान समय में विद्यार्थियों और बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहे एक बेहद खतरनाक वैश्विक साइबर ट्रेंड ‘मनी म्यूल’ (Money Mule) के बढ़ते खतरे पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीकी भाषा को सरल करते हुए समझाया कि साइबर ठग और अंतरराष्ट्रीय अपराधी वित्तीय धोखाधड़ी से कमाए गए अवैध धन (काले धन) को छुपाने और उसे एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने के लिए स्थानीय युवाओं और विद्यार्थियों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं।
इसके लिए अपराधियों द्वारा सोशल मीडिया या संदेशों के माध्यम से ‘घर बैठे नौकरी’, ‘बिना निवेश के कमीशन कमाएं’ या ‘जल्दी अमीर बनने’ जैसे लुभावने लालच दिए जाते हैं। मासूम युवा इन ठगों के झांसे में आ जाते हैं और चंद रुपयों के कमीशन के लालच में आकर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स या यूपीआई आईडी का नियंत्रण इन अज्ञात अपराधियों के हाथों में सौंप देते हैं।
न्यायाधीश ने चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि जब यह अवैध लेन-देन पुलिस या केंद्रीय जांच एजेंसियों की रडार पर आता है, तो मुख्य अपराधी (मास्टरमाइंड) पीछे छिप जाता है और जिस व्यक्ति के नाम पर बैंक खाता पंजीकृत होता है, वह कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ जाता है। ऐसे मामलों में खाताधारक को ही प्राथमिक दोषी माना जाता है और उसे जेल की हवा खानी पड़ सकती है, जिससे उसका पूरा करियर और भविष्य पूरी तरह नष्ट हो जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे कभी भी किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते में पैसों का लेन-देन न करें और न ही अपना खाता किसी को किराए पर दें।
सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग: डिजिटल सुरक्षा के मूल मंत्र
विद्यार्थियों की डिजिटल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्य वक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और स्नैपचैट के सुरक्षित उपयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक दिशा-निर्देश साझा किए, जिनका पालन हर इंटरनेट उपयोगकर्ता को अनिवार्य रूप से करना चाहिए:
- अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट से दूरी: सोशल मीडिया पर किसी भी ऐसे व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट या मैसेज स्वीकार न करें जिसे आप वास्तविक जीवन में नहीं जानते। कई बार फर्जी प्रोफाइल (फेक आईडी) बनाकर अपराधी युवाओं को अपने जाल में फंसाते हैं।
- निजी जानकारी की गोपनीयता: अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे- गृह पता, फोन नंबर, माता-पिता का व्यवसाय, दैनिक दिनचर्या या अपनी लाइव लोकेशन कभी भी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से साझा न करें।
- मजबूत पासवर्ड का प्रयोग: अपने सभी डिजिटल खातों और ईमेल के लिए मजबूत और जटिल पासवर्ड (जिसमें अक्षर, अंक और विशेष प्रतीक शामिल हों) का उपयोग करें तथा समय-समय पर इसे बदलते रहें।
- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA): अपने सभी सोशल मीडिया और बैंकिंग ऐप्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन की सेटिंग को अनिवार्य रूप से चालू रखें ताकि कोई आपके खातों को आसानी से हैक न कर सके।
- ओटीपी और पिन की गोपनीयता: किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक वन-टाइम पासवर्ड (OTP), एटीएम पिन (PIN) या नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी भी अज्ञात फोन कॉल या संदेश पर साझा न करें। बैंक कभी भी ऐसी जानकारियां फोन पर नहीं मांगते।
मोटर वाहन अधिनियम और सड़क सुरक्षा के कड़े नियम
साइबर सुरक्षा के साथ-साथ युवाओं के जीवन की सुरक्षा से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण विषय पर बात करते हुए न्यायाधीश ने मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के कड़े प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कॉलेज के युवाओं में बढ़ती तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई।
उन्होंने संदेश दिया कि सड़क पर चलते समय यातायात नियमों का पालन करना कोई स्वैच्छिक विकल्प नहीं बल्कि एक कानूनी और नैतिक अनिवार्यता है। उन्होंने वाहन चलाने के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License), वाहन का पंजीकरण प्रमाण पत्र (RC), बीमा (Insurance) और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) जैसे आवश्यक दस्तावेजों को हमेशा साथ रखने की अनिवार्यता पर जोर दिया।
विशेष रूप से दुपहिया वाहन चालकों के लिए उन्होंने कहा कि हेलमेट पहनना केवल पुलिस के जुर्माने से बचने का जरिया नहीं है, बल्कि यह दुर्घटना की स्थिति में आपकी जान बचाने का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने नाबालिगों द्वारा वाहन न चलाए जाने और तीन सवारी (ट्रिपल राइडिंग) न करने की सख्त हिदायत दी, क्योंकि नए नियमों के तहत इसमें अभिभावकों के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987: ‘न्याय सबके लिए’ का संकल्प
न्यायाधीश हिमांशु पण्डा ने राष्ट्रीय कानूनी परिदृश्य पर चर्चा करते हुए विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (Legal Services Authorities Act, 1987) के गठन, उद्देश्यों और इसकी कार्यप्रणाली पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39-ए का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य का यह कर्तव्य है कि वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करे।
उन्होंने बताया कि देश का कोई भी नागरिक केवल इसलिए न्याय पाने से वंचित न रह जाए क्योंकि वह आर्थिक रूप से कमजोर है या किसी अन्य अक्षमता से पीड़ित है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए राष्ट्रीय, राज्य, जिला और तालुका स्तर पर विधिक सेवा प्राधिकरणों का गठन किया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) सूरजपुर द्वारा समाज के पात्र और जरूरतमंद व्यक्तियों को निम्नलिखित सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जाती हैं:
| क्र.सं. | प्राधिकरण द्वारा प्रदत्त सेवाएं | पात्रता और लाभ |
|---|---|---|
| 1 | निःशुल्क विधिक सहायता एवं सलाह | महिलाएं, बच्चे, अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य, औद्योगिक श्रमिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग। |
| 2 | निःशुल्क अधिवक्ता (वकील) की सुविधा | अदालती कार्यवाही के लिए प्राधिकरण द्वारा स्वयं के खर्च पर योग्य अधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है। |
| 3 | लोक अदालतों का आयोजन | आपसी समझौते और बिना किसी अदालती फीस के मामलों का त्वरित, परमानेंट और अंतिम निपटारा। |
| 4 | विधिक साक्षरता शिविर | ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना। |
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की टोल-फ्री हेल्पलाइन: 15100
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरा लीगल वॉलेंटियर (PLV) सत्य नारायण ने उपस्थित जनसमुदाय और छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा संचालित अखिल भारतीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के संबंध में महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह हेल्पलाइन नंबर देश के हर नागरिक के लिए एक वरदान की तरह है। कोई भी पीड़ित, शोषित या जरूरतमंद व्यक्ति, जो किसी भी प्रकार की कानूनी उलझन में फंसा हो या जिसे कानूनी सलाह की आवश्यकता हो, वह अपने मोबाइल या लैंडलाइन फोन से इस नंबर पर कॉल कर सकता है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से कोई भी व्यक्ति घर बैठे ही कानूनी विशेषज्ञों और वकीलों से पूरी तरह निःशुल्क, निष्पक्ष और सटीक विधिक सलाह तथा सहायता प्राप्त कर सकता है। यह सेवा भाषाई बाधाओं से मुक्त है और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भी सहायता सुनिश्चित करती है।
कानून और न्यायपालिका के क्षेत्र में उज्ज्वल करियर के अवसर
विधिक जागरूकता के साथ-साथ यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यावसायिक भविष्य के मार्गदर्शन का भी एक महत्वपूर्ण जरिया बना। न्यायाधीश हिमांशु पण्डा ने तकनीकी और गैर-तकनीकी क्षेत्र के इन विद्यार्थियों को कानून (Law), न्यायपालिका (Judiciary) और प्रशासनिक सेवाओं (Administrative Services) के क्षेत्र में उपलब्ध असीम और उज्ज्वल करियर के अवसरों के बारे में विस्तार से मार्गदर्शित किया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में कॉर्पोरेट जगत, साइबर कानून विशेषज्ञता, पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) जैसे क्षेत्रों में तकनीकी पृष्ठभूमि के युवाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। छात्र अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद क्लैट (CLAT) या अन्य प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से एलएलबी (LLB) कर सकते हैं और उसके बाद सिविल जज, लीगल एडवाइजर, सरकारी अभियोजक (PO) या कॉर्पोरेट लॉयर के रूप में एक प्रतिष्ठित करियर की शुरुआत कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर अध्ययन करने, तार्किक सोच विकसित करने और देश की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
इंटरएक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र और संशय निवारण
व्याख्यान के पश्चात एक इंटरएक्टिव प्रश्नोत्तर (Q&A) सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संस्थान के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और निडरता के साथ भाग लिया। विद्यार्थियों ने मुख्य वक्ता के समक्ष साइबर सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक प्रश्न, जैसे- “यदि अनजाने में कोई ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाए तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?”, “सोशल मीडिया पर हैकिंग की स्थिति में कानूनी उपचार क्या हैं?”, “मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के बीच क्या संतुलन होना चाहिए?” तथा “न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए सही समय और रणनीति क्या होनी चाहिए?” जैसे गंभीर सवाल दागे।
न्यायाधीश ने विद्यार्थियों के प्रत्येक प्रश्न को बेहद ध्यानपूर्वक सुना और रोजमर्रा के जीवन से जुड़े सरल एवं जीवंत उदाहरणों के माध्यम से उनके सभी संशयों का अत्यंत संतोषजनक और तार्किक समाधान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत केंद्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या आधिकारिक सरकारी पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
संस्थान द्वारा आभार प्रदर्शन एवं गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम के समापन बेला में श्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के चेयरपर्सन अवधेश साहू ने मंच पर आकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने जिला न्यायाधीश विनीता वार्नर, सचिव पायल टोपनों तथा मुख्य वक्ता न्यायाधीश हिमांशु पण्डा का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक विधिक साक्षरता शिविर आज के युवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इस आयोजन ने निश्चित रूप से विद्यार्थियों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है और उन्हें एक जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की प्रेरणा दी है। उन्होंने भविष्य में भी संस्थान में ऐसे रचनात्मक और शिक्षाप्रद कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की इच्छा जताई।
इस गरिमामयी और वृहद विधिक जागरूकता कार्यक्रम में श्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के समस्त विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ शिक्षकगण, पैरामेडिकल और तकनीकी स्टाफ सहित बहुत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित रहे। पूरा परिसर विधिक ज्ञान और जागरूकता के इस सकारात्मक अभियान से लाभान्वित हुआ।












