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VB-GRAMG Act 2026: छत्तीसगढ़ के रामचंद्रपुर में विकास और रोजगार का नया रोडमैप तैयार






रामचंद्रपुर में वीबी-जी राम-जी अधिनियम पर कार्यशाला: अब ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिन रोजगार की गारंटी


रामचंद्रपुर में वीबी-जी राम-जी अधिनियम पर विस्तृत कार्यशाला: अब ग्रामीण परिवारों को मिलेगी सालाना 125 दिनों के गारंटीड रोजगार की सौगात

स्थान: रामचंद्रपुर (बलरामपुर-रामानुजगंज)
दिनांक: 1 जुलाई, 2026
श्रेणी: ग्रामीण विकास / सरकारी योजनाएं

रामचंद्रपुर/बलरामपुर: जिला कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के कुशल निर्देशन एवं जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) नयनतारा सिंह तोमर के सतत मार्गदर्शन में संपूर्ण जिले में ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण’ (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम के जमीनी क्रियान्वयन और व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी महत्वपूर्ण कड़ी में आज जनपद पंचायत रामचंद्रपुर के केंद्रीय सभाकक्ष में जनपद सीईओ रणवीर साय के नेतृत्व में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में तैनात प्रशासनिक और तकनीकी अमले को 1 जुलाई 2026 से देशव्यापी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हो रहे इस ऐतिहासिक अधिनियम के प्रावधानों, प्राथमिकताओं और तकनीकी बारीकियों से शत-प्रतिशत अवगत कराना था। कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों को संबोधित करते हुए बताया गया कि यह नया कानून ग्रामीण भारत के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को बदलने में गेमचेंजर साबित होगा।

“विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के तहत अब देश के प्रत्येक पंजीकृत जॉब कार्डधारी परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की मजबूत गारंटी दी जा रही है। इसका मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोई भी पात्र श्रमिक अपनी आजीविका के अवसरों से वंचित न रहे।”

कार्यशाला में दी गई वीबी-जी राम-जी की चार मुख्य श्रेणियां और उनके कार्य

प्रशिक्षण सत्र के दौरान कार्यक्रम अधिकारी अभिषेक द्विवेदी ने मंच से वीबी-जी राम-जी अधिनियम के तहत निर्धारित की गई चार सर्वप्रमुख श्रेणियों और उनके अंतर्गत संपादित किए जाने वाले विकास कार्यों की बिंदुवार विस्तृत तकनीकी जानकारी साझा की:

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1. जल संरक्षण एवं जल संवर्धन

ग्रामीण क्षेत्रों में गिरते भूजल स्तर को सुधारने और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए तालाबों के निर्माण, पुराने तालाबों के गहरीकरण, सोक पिट (सोखता गड्ढा) के निर्माण और नदी-नालों पर चेक डैम निर्माण के कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

2. आधारभूत संरचना विकास

गांवों को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। इसके तहत आंतरिक संपर्क सड़कों, पुल-पुलिया, सुसज्जित आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और सर्वसुविधायुक्त पंचायत भवनों के निर्माण कार्य शामिल किए गए हैं।

3. आजीविका संवर्धन

ग्रामीण परिवारों की स्थायी आमदनी बढ़ाने और वित्तीय रूप से सशक्त करने के लिए कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा। इसके अंतर्गत आधुनिक पशुपालन शेड, मत्स्य पालन हेतु तालाबों का विकास और महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को मजबूत बनाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

4. आपदा प्रबंधन एवं अन्य कार्य

जलवायु परिवर्तन के दौर में ग्रामीण क्षेत्रों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने, पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और स्थानीय भौगोलिक आवश्यकताओं के अनुरूप टिकाऊ परिसंपत्तियों के सृजन पर कार्य किया जाएगा।

विकसित ग्राम पंचायत की कार्य योजना और प्रस्ताव की प्रक्रिया

कार्यशाला के द्वितीय तकनीकी सत्र में इस बात पर गहन मंथन हुआ कि एक आदर्श ‘विकसित ग्राम पंचायत’ की व्यापक कार्य योजना (Action Plan) का निर्माण कैसे किया जाए और धरातल पर कराए जाने वाले कार्यों की प्राथमिकता (Prioritization) किस प्रकार तय की जाए।

कर्मचारियों को प्रशिक्षण देते हुए समझाया गया कि अब ग्राम विकास की योजना पूरी तरह से विकेंद्रीकृत और पारदर्शी होगी। ग्राम सभाओं के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं को चिन्हित कर, प्राथमिकताओं के आधार पर कार्यों का वैधानिक प्रस्ताव तैयार कर जिला स्तर पर भेजने की संपूर्ण ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्रशासनिक प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षित किया गया।

श्रमिक अधिकारों का सख्त संरक्षण: समय पर काम न मिलने पर मिलेगा बेरोजगारी भत्ता

इस नए अधिनियम की सबसे बड़ी विशेषता इसके कठोर कानूनी और जवाबदेही प्रावधान हैं। प्रशिक्षण में मौजूद समस्त रोजगार सहायकों और सचिवों को कड़े निर्देश देते हुए बताया गया कि श्रमिकों के हितों की रक्षा इस कानून की आत्मा है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित वैधानिक अधिकार प्रदान किए गए हैं:

प्रावधान/अधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाला लाभ व नियम
वार्षिक रोजगार गारंटी प्रत्येक पंजीकृत जॉब कार्डधारी परिवार को मांग के आधार पर वर्ष में 125 दिनों का रोजगार अनिवार्य रूप से मिलेगा।
बेरोजगारी भत्ता यदि किसी पात्र श्रमिक द्वारा काम की मांग किए जाने के निर्धारित समय-सीमा के भीतर उसे रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो वह नियमानुसार वैधानिक बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा।
विलंब मुआवजा मजदूरी के भुगतान में किसी भी प्रकार का अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भुगतान में देरी होने की स्थिति में संबंधित श्रमिक को मुआवजे के भुगतान का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।

कार्यशाला में प्रशासनिक अमले की गरिमामयी उपस्थिति

रामचंद्रपुर विकासखंड स्तरीय इस व्यापक प्रशिक्षण सह कार्यशाला में ब्लॉक के वरिष्ठ अधिकारियों सहित तकनीकी और मैदानी अमले ने सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सहायक प्रोग्रामर, ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (बी.पी.आर.सी.) के प्रतिनिधि, समस्त तकनीकी सहायक, विभिन्न विभागों के शाखा प्रभारी, ग्राम पंचायतों के सचिव तथा जमीनी स्तर पर योजना की कमान संभालने वाले समस्त रोजगार सहायक अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे।

जनपद सीईओ ने कार्यशाला के अंत में सभी मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरी संवेदनशीलता और पूरी निष्ठा के साथ 1 जुलाई 2026 से इस महत्वाकांक्षी मिशन को मैदानी स्तर पर शत-प्रतिशत सफल बनाने और प्रत्येक जरूरतमंद ग्रामीण तक इसका लाभ पहुंचाने का संकल्प दिलाया।


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