जिले में मानसून की रफ्तार: 24 घंटे में 7.7 मिमी बारिश, लखनपुर में सबसे ज्यादा वर्षा दर्ज






जिले में मानसून की रफ्तार: पिछले 24 घंटों में 7.7 मिमी औसत वर्षा, लखनपुर में सबसे ज्यादा पानी बरसा

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जिले में मानसून की सक्रियता: बीते 24 घंटों में 7.7 मिमी औसत बारिश दर्ज, लखनपुर तहसील में सर्वाधिक 24.3 मिमी वर्षा

रिपोर्टर: विशेष संवाददाता
स्रोत: भू-अभिलेख शाखा
दिनांक: 1 जुलाई 2026

अम्बिकापुर। जिले में मानसून के आगमन के साथ ही वर्षा का दौर लगातार जारी है। भू-अभिलेख शाखा के अधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान जिले की सभी तहसीलों में व्यापक रूप से बादल बरसे हैं। इस अवधि में पूरे जिले में औसतन 7.7 मिलीमीटर (मिमी) वर्षा दर्ज की गई है। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में हल्की तो कहीं मध्यम दर्जे की बारिश देखने को मिली है, जिससे मौसम खुशनुमा हो गया है और कृषि गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।

लखनपुर तहसील में पिछले 24 घंटों में सबसे ज्यादा 24.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो इस अवधि में जिले में सर्वाधिक है। वहीं, 1 जून से अब तक पूरे जिले में कुल 54.4 मिमी औसत वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है।

अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष जून महीने की शुरुआत से ही मानसून की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। 1 जून से लेकर आज 1 जुलाई तक के संचयी आंकड़ों (Cumulative Data) का विश्लेषण करें तो जिले के अलग-अलग क्षेत्रों और तहसीलों में वर्षा का वितरण असमान रहा है। कुछ ब्लॉक में शुरुआती अच्छी बारिश दर्ज की गई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी भारी और लगातार होने वाली मानसूनी बारिश का इंतजार है।

तहसीलवार वर्षा की स्थिति: अम्बिकापुर और लखनपुर आगे

भू-अभिलेख कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक, 01 जून से 01 जुलाई तक के एक महीने की अवधि में जिले की विभिन्न तहसीलों में दर्ज की गई वर्षा के आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस दौरान सबसे बेहतर स्थिति लखनपुर और जिला मुख्यालय अम्बिकापुर की रही है। लखनपुर में जहां कुल 85.8 मिमी पानी बरसा है, वहीं अम्बिकापुर में 65.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इसके अलावा मैनपाट के पठारी इलाकों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई है, जिससे वहां का तापमान काफी गिर गया है।

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इसके विपरीत, लुण्ड्रा तहसील में इस एक महीने के भीतर सबसे कम वर्षा दर्ज की गई है। लुण्ड्रा में केवल 26.4 मिमी बारिश ही रिकॉर्ड हो पाई है, जिससे वहां के किसानों को धान की बुआई और खेती के शुरुआती कामों के लिए आने वाले दिनों में और अधिक मानसूनी बौछारों की दरकार होगी।

1 जून से 1 जुलाई तक तहसीलवार कुल वर्षा के आंकड़े

जिले की सभी प्रमुख तहसीलों में अब तक हुई कुल बारिश की स्थिति को नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है:

क्र. तहसील / क्षेत्र का नाम दर्ज कुल वर्षा (मिमी में) स्थिति की समीक्षा
1 लखनपुर 85.8 मिमी जिले में सर्वाधिक वर्षा, कृषि के लिए अनुकूल
2 मैनपाट 69.7 मिमी पठारी क्षेत्र में अच्छी प्रगति, मौसम ठंडा
3 अम्बिकापुर 65.1 मिमी संतोषजनक वर्षा, शहरी व ग्रामीण इलाकों में राहत
4 उदयपुर 55.6 मिमी औसत के करीब, खेती की तैयारी शुरू
5 बतौली 48.9 मिमी सामान्य स्थिति, आने वाले दिनों में तेजी की उम्मीद
6 सीतापुर 42.1 मिमी हल्की से मध्यम बारिश, खेतों में नमी बरकरार
7 दरिमा 41.3 मिमी कम वर्षा क्षेत्र, तेज मानसूनी सिस्टम का इंतजार
8 लुण्ड्रा 26.4 मिमी जिले में सबसे कम वर्षा, किसानों की नजरें आसमान पर

कृषि और जनजीवन पर मानसूनी बारिश का असर

मौसम विभाग और भू-अभिलेख शाखा के विशेषज्ञों का कहना है कि जून के महीने में हुई यह बारिश जमीन में आवश्यक नमी (Soil Moisture) बनाने के लिए बहुत जरूरी थी। हालांकि, खरीफ फसलों की मुख्य तैयारी जैसे धान के थरहा (नर्सरी) डालने और रोपाई के कार्यों को गति देने के लिए जुलाई के महीने में लगातार और भारी बारिश की आवश्यकता होती है। वर्तमान में दर्ज की गई 54.4 मिमी की औसत वर्षा ने कृषि कार्यों की शुरुआती नींव रख दी है।

लखनपुर और मैनपाट जैसे क्षेत्रों में जहां बारिश का आंकड़ा 60 मिमी से ऊपर चला गया है, वहां किसान खेतों की जुताई और अन्य प्राथमिक तैयारियों में जुट गए हैं। वहीं दरिमा और लुण्ड्रा जैसे इलाकों में किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम के मिजाज को देखते हुए ही पानी के संचयन और बीज प्रबंधन की योजना बनाएं।

आगामी दिनों के लिए मौसम का पूर्वानुमान

भू-अभिलेख अधिकारियों के अनुसार, आने वाले 48 से 72 घंटों के भीतर क्षेत्रीय मौसम प्रणालियों (Local Weather Systems) और बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के प्रभाव से जिले के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। यदि मानसूनी टर्फ लाइन की स्थिति अनुकूल रहती है, तो कम वर्षा वाले ब्लॉकों में भी पानी की कमी की भरपाई हो जाएगी। प्रशासन की ओर से सभी तहसीलों के कंट्रोल रूम को अलर्ट पर रखा गया है ताकि दैनिक वर्षा के आंकड़ों की सटीक मॉनिटरिंग की जा सके।