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CBI की बड़ी कार्रवाई: 3 करोड़ के रिश्वत कांड में वरिष्ठ IPS अधिकारी दीपक गहलावत गिरफ्तार, नकली दवा माफिया को बचाने का आरोप






IPS दीपक गहलावत गिरफ्तार: CBI ने 3 करोड़ की रिश्वत कांड में नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो के क्षेत्रीय निदेशक को दबोचा


CBI की बड़ी कार्रवाई: 5000 करोड़ के नकली दवा घोटाले को रफा-दफा करने के लिए 3 करोड़ की रिश्वत मांगने वाले वरिष्ठ IPS अधिकारी दीपक गहलावत गिरफ्तार

देश-विदेश डेस्क, प्रदेश खबर नेटवर्क | अपडेटेड: बुधवार, 01 जुलाई 2026

मुख्य बिंदु: हरियाणा कैडर के 2012 बैच के IPS अधिकारी दीपक गहलावत को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। कथित अपराध के समय वे नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) में क्षेत्रीय निदेशक के पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने पुडुचेरी के एक बड़े नकली दवा कारोबारी को सीबीआई जांच में राहत दिलाने के नाम पर 3 करोड़ रुपये की डील की थी।

नई दिल्ली: प्रशासनिक और पुलिस महकमे में उस समय सनसनी फैल गई जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बेहद सख्त और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। सीबीआई ने नकली दवा बनाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह की जांच को प्रभावित करने और आरोपियों को बचाने के एवज में तीन करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी दीपक गहलावत को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों ने बुधवार को इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि की है।

सीबीआई के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, हरियाणा संवर्ग (कैडर) के 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत कथित अपराध के समय नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) में क्षेत्रीय निदेशक के पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे। वर्तमान में उनकी भूमिका उड्डयन क्षेत्र के अंतर्गत ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) में भी संबद्ध थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने रसूख और पद का दुरुपयोग करते हुए केंद्रीय एजेंसी की चल रही एक संवेदनशील जांच का रुख बदलने का सौदा किया था।

क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?

सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, पूरा मामला पुडुचेरी में संचालित हो रहे लगभग 5,000 करोड़ रुपये के बड़े पैमाने पर नकली और घटिया दवाओं के निर्माण और बिक्री के रैकेट से जुड़ा हुआ है। इस रैकेट का भंडाफोड़ पिछले साल पुडुचेरी पुलिस और सीबी-सीआईडी की छापेमारी के बाद हुआ था, जिसके बाद मामले की गंभीरता और राजनीतिक संलिप्तता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। इस मामले का मुख्य आरोपी पुडुचेरी का एक बड़ा कारोबारी एन राजा (उर्फ वल्लियप्पन उर्फ राजशेखर) है।

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सीबीआई की जांच में यह खुलासा हुआ है कि जब एन राजा के खिलाफ केंद्रीय एजेंसी का शिकंजा कसने लगा, तो उसने जांच से बचने और मामले को रफा-दफा करने के लिए दिल्ली में संपर्कों की तलाश शुरू की। इस दौरान राजा का संपर्क दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) में तैनात इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह से हुआ। इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह ने कारोबारी राजा को भरोसा दिलाया कि उनके संबंध बेहद ऊंचे स्तर पर हैं और वे सीबीआई की जांच को पूरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। इसके बाद इस पूरे खेल में आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत की एंट्री हुई।

एयरोसिटी के दफ्तर में हुई थी ‘डील’

जांच एजेंसी के दावों के मुताबिक, 14 मई 2026 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित एयरोसिटी इलाके में एक गोपनीय बैठक आयोजित की गई थी। दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह ने कारोबारी एन राजा और उसके बिचौलिये सहयोगी राजकुमार को एयरोसिटी स्थित वरिष्ठ लोक सेवक के कार्यालय में ले जाकर मुलाकात कराई। यह कार्यालय दीपक गहलावत का था।

इस मुलाकात के दौरान, आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत ने कथित तौर पर अपने प्रभाव का दावा करते हुए एन राजा को आश्वस्त किया कि वे सीबीआई के भीतर अपने व्यक्तिगत संबंधों और प्रभाव का इस्तेमाल कर उसे इस मामले में पूरी तरह राहत (क्लीन चिट या अनुकूल जांच परिणाम) दिला देंगे। इसके बदले में उन्होंने कुल 3 करोड़ रुपये की अवैध रिश्वत (रिश्वत की रकम) की मांग की। सौदे के तहत यह तय हुआ कि कुल रकम में से आधी राशि यानी 1.5 करोड़ रुपये एडवांस (अग्रिम भुगतान) के रूप में तुरंत दिए जाएंगे।

हवाला के जरिए दिल्ली भेजी गई थी पहली किस्त

सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, इस डील के फाइनल होने के बाद एन राजा ने अपनी पत्नी को पैसों का इंतजाम करने को कहा। उसने चेन्नई के एक हवाला ऑपरेटर के जरिए 1 करोड़ रुपये की राशि दिल्ली ट्रांसफर करवाई। इस रकम को दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में डिलीवर किया जाना था।

हवाला के माध्यम से आई इस रकम को इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह ने प्राप्त किया। प्रदीप सिंह ने कुल 1 करोड़ रुपये में से 50 लाख रुपये की राशि प्रभात नाम के एक अन्य बिचौलिये को सौंप दी, जो सीधे आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत का बेहद करीबी और परिचित बताया जाता है। बाकी बचे 50 लाख रुपये में से आधी रकम इंस्पेक्टर ने अपने पास रखी, जबकि शेष राशि अन्य बिचौलियों में बांटी जानी थी।

जून में हुए ‘ट्रैप ऑपरेशन’ से खुला था राज

इस पूरे मामले की भनक लगते ही सीबीआई की एंटी-करप्शन विंग ने जाल बिछाया था। 8 जून 2026 को सीबीआई ने दिल्ली में एक बड़ा ट्रैप ऑपरेशन (रंगे हाथ पकड़ने की कार्रवाई) चलाया। इस कार्रवाई के दौरान सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह और मुख्य बिचौलिये राजकुमार को रंगे हाथ दबोच लिया था। उस समय सीबीआई ने इंस्पेक्टर के कार्यालय और ठिकानों से जाल में फंसाई गई 25 लाख रुपये की रिश्वत की रकम और इसके अलावा 90 लाख रुपये की अन्य नगदी बरामद की थी। साथ ही कई डिजिटल सबूत और दस्तावेज भी जब्त किए गए थे।

जून में हुई इन गिरफ्तारियों के बाद जब सीबीआई ने मनी ट्रेल (पैसों के लेनदेन के रास्ते) और डिजिटल चैट की गहन कड़ियों को जोड़ा, तो इस पूरे नेक्सस के पीछे मास्टरमाइंड के रूप में आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत का नाम पूरी तरह साफ हो गया। सीबीआई ने पिछले तीन हफ्तों में दीपक गहलावत को कई बार समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था। लगातार की गई पूछताछ में उनके बयानों में भारी विसंगतियां पाई गईं और उनके खिलाफ पुख्ता डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद अंततः उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

कोर्ट ने एक दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा

गिरफ्तारी के तुरंत बाद नियमानुसार कानून के तहत दीपक गहलावत का मेडिकल टेस्ट कराया गया। इसके बाद सीबीआई ने बुधवार को उन्हें दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष पेश किया। जांच एजेंसी ने अदालत से यह दलील देते हुए 5 दिन की कस्टडी रिमांड मांगी कि इस बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क की पूरी मनी ट्रेल का पता लगाना है और यह भी जांचना है कि सीबीआई के भीतर और कौन से अधिकारी या कर्मचारी इस नेटवर्क का हिस्सा थे। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत ने आरोपी आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत को एक दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है।

सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि अधिकारी के विभिन्न परिसरों और ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया है, जहां से कई डिजिटल उपकरण, हार्ड डिस्क, लैपटॉप और बेनामी संपत्तियों व वित्तीय लेनदेन से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इन सभी की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।


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