दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 26 म्यूल बैंक खाताधारकों को गिरफ्तार किया

दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 26 म्यूल बैंक खाताधारकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल सिम और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे।

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इन्हीं खातों में ठगी की रकम जमा होती थी, जिसे बाद में दूसरे खातों में ट्रांसफर कर नकद निकाला जाता था। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है।

2024 से 2026 के बीच हुआ खातों का इस्तेमाल

पुलिस जांच में सामने आया कि साल 2024 से 2026 के दौरान इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम जमा करने और उसे अलग-अलग खातों में भेजने के लिए किया गया। साइबर अपराध की भाषा में ऐसे खातों को लेयर-1 या म्यूल अकाउंट कहा जाता है।

जांच में यह भी पता चला कि कई खाताधारकों ने जानबूझकर या अन्य लोगों के साथ मिलकर अपने बैंक खाते और उनसे जुड़े दस्तावेज साइबर अपराधियों को इस्तेमाल के लिए दिए थे।

बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त

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भिलाई नगर थाना में अपराध दर्ज कर पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं। पुलिस अब डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग ट्रांजैक्शन के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

पुलिस का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग दस्तावेजों की मदद से जांच आगे बढ़ाई जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

ऐसे काम करता है साइबर ठगी का नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग सीधे अपने बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करते। वे लोगों को लालच देकर या किराए पर उनके बैंक खाते लेते हैं। ठगी की रकम सबसे पहले इन्हीं खातों में जमा की जाती है।

फिर उसे कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है, ताकि रकम के स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। इसी वजह से म्यूल बैंक खाते साइबर ठगी के नेटवर्क का अहम हिस्सा माने जाते हैं।