छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले में इस वर्ष मानसून अपनी तय रफ्तार और सक्रियता के साथ बरस रहा है। कृषि, भू-जल स्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए इस मानसूनी बारिश को बेहद सकारात्मक माना जा रहा है। जिला प्रशासन के भू-अभिलेख शाखा से मिले ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जिलेभर में अब तक 539.4 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जिससे क्षेत्र के जल स्रोतों और खेती-किसानी को नई ऊर्जा मिली है।
कोयलीबेड़ा में सबसे अधिक, आमाबेड़ा में सबसे कम वर्षा
जिले के विभिन्न प्रशासनिक ब्लॉकों और तहसीलों में बारिश के आंकड़ों में विविधता देखने को मिल रही है। आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक सबसे अधिक बारिश कोयलीबेड़ा तहसील में दर्ज की गई है, जहां बादलों ने जमकर मेहरबानी दिखाई है और अब तक 854.1 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके विपरीत, जिले में सबसे कम बारिश आमाबेड़ा तहसील में दर्ज की गई है, जहां आकड़े सबसे निचले स्तर पर यानी 197.4 मिलीमीटर पर सिमट गए हैं।
मौसम की मुख्य विशेषताएं (एक नजर में):
- कुल संचयी वर्षा (01 जून से अब तक): 5933.6 मिलीमीटर (11 तहसीलों का कुल योग)
- औसत वर्षा: 539.4 मिलीमीटर
- सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र: कोयलीबेड़ा तहसील (854.1 मिलीमीटर)
- सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र: आमाबेड़ा तहसील (197.4 मिलीमीटर)
- पिछले 24 घंटों की औसत वर्षा: 192 मिलीमीटर
विभिन्न तहसीलों में दर्ज वर्षा का विस्तृत विवरण
कांकेर जिले की अन्य तहसीलों में भी मानसून का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। भू-अभिलेख शाखा द्वारा जारी तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार जिले की स्थिति इस प्रकार है:
| क्र.सं. | तहसील का नाम | दर्ज वर्षा (मिलीमीटर में) |
|---|---|---|
| 1 | कोयलीबेड़ा | 854.1 मिमी |
| 2 | बांदे | 810.7 मिमी |
| 3 | अंतागढ़ | 564.6 मिमी |
| 4 | भानुप्रतापपुर | 530.2 मिमी |
| 5 | कांकेर | 522.4 मिमी |
| 6 | चारामा | 517.4 मिमी |
| 7 | नरहरपुर | 504.2 मिमी |
| 8 | सरोना | 504.1 मिमी |
| 9 | दुर्गूकोंदल | 475.8 मिमी |
| 10 | पखांजूर | 452.7 मिमी |
| 11 | आमाबेड़ा | 197.4 मिमी |
उपरोक्त आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि कोयलीबेड़ा और बांदे तहसीलों में मानसून का विशेष प्रभाव देखने को मिला है, जहां बारिश का आंकड़ा काफी अधिक रहा है। वहीं अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कांकेर और चारामा में भी औसत से बेहतर वर्षा दर्ज की गई है।
पिछले 24 घंटों में झमाझम बारिश
बीते कुछ दिनों से जिले के मौसम में बड़ा बदलाव आया है। पिछले 24 घंटों के दौरान पूरे उत्तर बस्तर कांकेर जिले में मूसलाधार और लगातार बारिश का दौर देखा गया है। पिछले 24 घंटों के भीतर ही जिले में 192 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। इस अचानक तेज बारिश के चलते जिले के कई छोटे-बड़े नालों और जलाशयों में पानी की आवक तेजी से बढ़ गई है। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि लगातार बारिश से जलस्तर में वृद्धि हो सकती है।
कृषि और जनजीवन पर प्रभाव
छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है और कांकेर जिला भी कृषि प्रधान क्षेत्र है। जुलाई के आखिरी सप्ताह में हुई इस झमाझम बारिश से धान की रोपाई और फसलों की शुरुआती वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं। किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है क्योंकि धान की फसल को इस समय भरपूर पानी की आवश्यकता होती है। हालांकि, कुछ अंदरूनी और निचले इलाकों में अत्यधिक पानी भरने से सुचारू जनजीवन पर हल्का असर पड़ा है, लेकिन कुल मिलाकर यह बारिश खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है।
प्रशासन की आपदा प्रबंधन टीमें और भू-अभिलेख विभाग लगातार मौसम की गतिविधियों और वर्षा के आंकड़ों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
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