जिले के अंदरूनी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ नियम-कानूनों को ठेंगा दिखाकर आपराधिक प्रकरणों में भी मनमानी की जा रही है। पुलिस को सूचना दिए बिना इलाज व अन्य सुविधाएं अस्पताल में मुहैया कराकर मामला वहीं रफा-दफा किया जा रहा है। हाटकर्रा अस्पताल के ऐसे दो मामले सामने आए हैं।
इन्होंने कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया है। पहले मामले में अविवाहित, लेकिन बालिग युवती द्वारा शिशु को जन्म देने के बावजूद उसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई। दूसरे मामले में नाबालिग बालिका के प्रसव के बाद भी सूचना पुलिस को नहीं दी गई।
भानुप्रतापपुर विकासखंड के गांव हाटकर्रा अस्पताल में 29 जुलाई को 15 साल की नाबालिग गर्भवती को प्रसव पीड़ा होने पर इलाज के लिए लाया गया। बालिका के साथ उसका परिवार था। मामला गंभीर था। अस्पताल प्रभारी आरएमओ देवकुमार साहू ने बालिका को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती तो किया।
नाबालिग होने के बावजूद सूचना पुलिस को नहीं दी। अस्पताल में ही बालिका का प्रसव कराया गया। उसने एक शिशु को जन्म दिया। तीन दिन तक जच्चा-बच्चा दोनों अस्पताल में भर्ती थे। इसके बाद भी सूचना पुलिस या अपने विभाग के उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। चुपके-चुपके इलाज किया गया। प्रसव के तीसरे दिन डिस्चार्ज भी कर दिया गया।
इसी दौरान शिशु की तबियत बिगड़ने लगी। मामला भी बिगड़ना शुरू हो गया। परिजनों ने संजीवनी 108 को बुलाया। बच्चे की गंभीर स्थिति देख उसे धनेलीकन्हार लाया गया। वहां उसकी मौत हो गई। धनेलीकन्हार अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल कोरर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर मर्ग कायम किया।
पोस्टमार्टम कराया गया। मामले की जांच की गई। नाबालिग से दुष्कर्म का खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपी संजय सलाम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पैठू परंपरा निभाने के बाद भी की पुलिस को सूचना दो माह पूर्व, जून में हाटकर्रा अस्पताल में 19 साल की गर्भवती अविवाहित युवती को लाया गया। उसने भी शिशु को जन्म दिया। अस्पताल में दोनों पक्ष आए थे। युवती आदिवासी परंपरा के तहत पैठू गई हुई थी। दोनों पक्ष सहमत थे। इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने अविवाहित व गंभीर मामला बताकर कोरर पुलिस को सूचना दी। पुलिस में सूचना देने को लेकर गांव में काफी हंगामा हुआ था। डाक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों से विवाद भी हुआ था।













