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बस्तर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 पर एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित






बस्तर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय गहन प्रशिक्षण आयोजित


बस्तर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय गहन प्रशिक्षण आयोजित

जगदलपुर | 05 अगस्त 2026 | ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को एक नई दिशा देने और पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ बनाने की विशेष रिपोर्ट।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को एक नई दिशा देने और पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण जिला पंचायत बस्तर द्वारा एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार 06 अगस्त को जिला पंचायत सभागार बस्तर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले की चयनित 21 ग्राम पंचायतों के सरपंच, उपसरपंच, सचिव और स्वच्छताग्राहियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्वच्छता की कमान मजबूती से संभाल सकें और शासन की मंशा के अनुरूप गांवों को कचरा मुक्त बना सकें।

प्रशिक्षण का मुख्य ध्येय और वैज्ञानिक प्रबंधन

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य ध्येय ग्राम पंचायतों में वैज्ञानिक एवं सतत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना तथा कचरे को उसके संग्रहण स्थल यानी घरों व संस्थानों से ही अलग-अलग करने की आदत को बढ़ावा देना है। ग्रामीण अंचलों में अक्सर कचरे के उचित प्रबंधन के अभाव में पर्यावरण और स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिसे रोकने के लिए यह कार्यशाला मील का पत्थर साबित होगी। कार्यशाला के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जमीनी स्तर पर स्वच्छता के नियमों का पालन पूरी कड़ाई के साथ हो।

मुख्य बिंदु: इस विशेष कार्यशाला में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण छत्तीसगढ़ की राज्य सलाहकार मधुरिमा महेन्द्र गिरी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगी। वह उपस्थित जनप्रतिनिधियों और स्वच्छताकर्मियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रमुख प्रावधानों, पंचायतों की भूमिका एवं दायित्वों पर मार्गदर्शन देंगी।

कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण

प्रशिक्षण सत्र के दौरान कचरे के उचित वर्गीकरण पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके तहत सूखा, गीला, हानिकारक और सैनिटरी जैसे चार प्रकार के कचरे के सही पृथक्करण की विस्तार से जानकारी प्रदान की जाएगी। जब कचरा स्रोत पर ही इन चार श्रेणियों में अलग किया जाएगा, तो इसका वैज्ञानिक निस्तारण और रीसाइक्लिंग करना बेहद आसान हो जाएगा। इससे ग्राम पंचायतों में अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया अत्यधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनेगी।

डोर-टू-डोर संग्रहण और उपविधियों का निर्माण

इसके साथ ही कार्यशाला में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की सुचारू व्यवस्था, उपयोगकर्ता शुल्क (यूजर चार्ज) के निर्धारण और ग्राम पंचायत स्तर पर उपविधियों के निर्माण व पालन पर भी गहन चर्चा की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर और टिकाऊ स्वच्छता मॉडल विकसित करने के लिए यूजर चार्ज और उपविधियों की भूमिका बेहद अहम होती है। जनप्रतिनिधियों को इन सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं से अवगत कराया जाएगा ताकि वे अपने क्षेत्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही तय कर सकें।

सतत विकास और सुंदर बस्तर का सपना

इस एक दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने-अपने ग्राम पंचायतों में नियमों का कड़ाई और प्रभावशीलता से पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बस्तर के ग्रामीण अंचल स्वच्छ, सुंदर और सतत विकास के नए आयाम स्थापित कर सकें, इसके लिए स्थानीय नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। जिला पंचायत बस्तर का यह प्रयास ग्रामीण बस्तर को स्वच्छता के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में एक ठोस कदम है।