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जगदलपुर में विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन पर संभाग स्तरीय कार्यशाला संपन्न






जगदलपुर में ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन’ पर संभाग स्तरीय कार्यशाला संपन्न


विशेष समाचार अपडेट

जगदलपुर में ग्रामीण विकास एवं आजीविका संवर्धन पर केंद्रित तीन दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला का सफल समापन

ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जगदलपुर स्थित शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय कुम्हरावंड के ऑडिटोरियम में आयोजित ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन’ के अंतर्गत तीन दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। 03 से 05 अगस्त 2026 तक चले इस व्यापक और महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में बस्तर संभाग के सभी 7 जिलों से आए जनप्रतिनिधियों ने भारी उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

बस्तर संभाग के सातों जिलों से 490 जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी

इस तीन दिवसीय गैर-आवासीय संभाग स्तरीय कार्यशाला में बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले समस्त 7 जिलों—बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बीजापुर की विभिन्न जनपद पंचायतों से कुल 490 निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इतनी बड़ी संख्या में त्रि-स्तरीय पंचायत राज के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि बस्तर अंचल के सुदूर ग्रामीण इलाकों में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए स्थानीय नेतृत्व पूरी तरह से प्रतिबद्ध और जागरूक है।

मुख्य आकर्षण: ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान निमोरा, रायपुर के विशेष मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में ग्रामीण आजीविका मिशन के कानूनी प्रावधानों और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रशिक्षण के प्रमुख बिंदु और तकनीकी सत्र

कार्यशाला के दौरान राज्य स्तर से आए वरिष्ठ विशेषज्ञों और मास्टर ट्रेनर्स ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों को योजना के दूरगामी उद्देश्यों और प्रमुख कानूनी प्रावधानों की बेहद सरल और स्पष्ट भाषा में गहन जानकारी दी। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान निम्नलिखित मुख्य विषयों पर विशेष प्रकाश डाला गया:

  • परिसंपत्तियों की पहचान: ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप दीर्घकालिक विकास कार्यों और परिसंपत्तियों की सही पहचान करना।
  • पारदर्शी प्रक्रिया: ग्रामसभा से योजनाओं का अनिवार्य अनुमोदन, तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करने के चरण और उनके क्रियान्वयन की पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया।
  • स्थायी रोजगार सृजन: ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर सतत एवं स्थायी रोजगार के नए अवसर पैदा करने की रणनीतियां।
  • जल संरक्षण एवं संवर्धन: भूजल स्तर को सुधारने और जल संरक्षण से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण को प्राथमिकता देना।
  • दीर्घकालिक जनोपयोगी परिसंपत्तियां: ऐसी संपत्तियों का निर्माण जो लंबे समय तक ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती प्रदान कर सकें।

अभिसरण (Convergence), शिकायत निवारण और सामाजिक अंकेक्षण पर जोर

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि योजनाओं का निष्पादन केवल एक विभाग तक सीमित न रहे, बल्कि अन्य शासकीय विकास कार्यक्रमों के साथ बेहतर अभिसरण (Convergence) स्थापित किया जाए ताकि संसाधनों का最適 (इष्टतम) उपयोग हो सके। इसके साथ ही, ग्रामीण स्तर पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने तथा पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के वास्ते सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) की अनिवार्यता पर भी विस्तार से समझाया गया।

जनप्रतिनिधियों का विश्वास और भविष्य की रूपरेखा

तीन दिनों तक चले इस गहन प्रशिक्षण को प्राप्त करने के बाद बस्तर संभाग से पहुंचे जनप्रतिनिधियों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से उन्हें जो सैद्धांतिक और व्यावहारिक सीख मिली है, वह बस्तर संभाग के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित ग्रामीण अंचलों में रोजगार गारंटी, आजीविका संवर्धन और ग्राम पंचायतों के समग्र एवं समावेशी विकास को गति देने में एक अत्यंत निर्णायक और मील का पत्थर साबित होगी।