छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई: ओवररेटिंग और लापरवाही पर दो उपनिरीक्षक निलंबित, एडीईओ पर भी शिकंजा
रायपुर: छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग ने राज्यभर की शराब दुकानों में नियमों की अनदेखी, ओवररेटिंग (निर्धारित दर से अधिक कीमत पर मदिरा की बिक्री) और प्रशासनिक नियंत्रण में ढिलाई बरतने वालों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। आबकारी आयुक्त द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में औचक निरीक्षण और शिकायतों के बाद की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मच गया है। ताजा मामले में नियमों के उल्लंघन और कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में दो आबकारी उप निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक सहायक जिला आबकारी अधिकारी (ADEO) के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की जांच रिपोर्ट पर एक्शन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई राज्य स्तरीय उड़नदस्ता (Flying Squad) द्वारा सौंपी गई गोपनीय और विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। उड़नदस्ता टीम ने पिछले दिनों कई जिलों की देशी और विदेशी मदिरा दुकानों का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान दुकानों पर तयशुदा मूल्य से ज्यादा पैसे वसूलने, स्टॉक में अनियमितता मिलने और स्थानीय स्तर पर प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण न होने के पुख्ता सबूत हाथ लगे थे। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपे जाने के बाद आयुक्त स्तर से यह कड़ा कदम उठाया गया है।
- बालोद जिले के गुरूर और बलौदाबाजार-भाटापारा के रोहासी की दुकानों में गड़बड़ी पकड़ी गई।
- राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की जांच रिपोर्ट के बाद गिरी गाज।
- दो आबकारी उप निरीक्षक निलंबित, एक एडीईओ के खिलाफ अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू।
- सरकार का स्पष्ट संदेश: अवैध वसूली और लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।
किन-किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?
आबकारी आयुक्त द्वारा जारी आदेश के तहत जिन अधिकारियों पर गाज गिरी है, उनका विवरण इस प्रकार है:
- आशाराम शाक्य (आबकारी उप निरीक्षक): इन्हें बालोद जिले के गुरूर अंतर्गत संचालित मदिरा दुकान क्षेत्र में बरती गई लापरवाही और ओवररेटिंग के मामलों के चलते निलंबित किया गया है।
- पी. माधव राव (आबकारी उप निरीक्षक): इन्हें बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम रोहासी स्थित देशी कम्पोजिट मदिरा दुकान का प्रभारी रहते हुए दुकानों पर प्रभावी नियंत्रण न रख पाने और अनियमितताओं के चलते निलंबित किया गया है।
सहायक जिला आबकारी अधिकारी (ADEO) पर भी कसा शिकंजा
केवल मैदानी अमले तक ही यह कार्रवाई सीमित नहीं रही है, बल्कि पर्यवेक्षण (सुपरविजन) में ढिलाई बरतने वाले राजपत्रित व वरिष्ठ अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जाना शुरू हो गया है। एक अन्य गंभीर मामले में, श्रीमती निलोफर जैन, जो सहायक जिला आबकारी अधिकारी (ADEO) के पद पर हैं और जिनके पास देश कम्पोजिट मदिरा दुकान अरकार (जिला बालोद) के प्रभारी सह मंडल प्रभारी का दायित्व था, उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं।
जांच में पाया गया कि उनके द्वारा अपने कार्यक्षेत्र की दुकानों पर बेहद शिथिल नियंत्रण रखा जा रहा था, जिसके कारण अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिला। इसे उनके कर्तव्यों के प्रति गंभीर लापरवाही, उदासीनता और प्रशासनिक अक्षमता माना गया है। इस सिलसिले में आबकारी आयुक्त द्वारा सचिव, वाणिज्यिक-कर (आबकारी) विभाग को पत्र जारी कर श्रीमती निलोफर जैन के विरुद्ध विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की अनुशंसा की गई है।
शासन की दो टूक: भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
छत्तीसगढ़ में आबकारी राजस्व को पारदर्शी तरीके से संचालित करने और उपभोक्ताओं से ओवरचार्जिंग रोकने के लिए सरकार लगातार कड़े निर्देश देती रही है। इसके बावजूद मैदानी अमले की सुस्ती और मिलीभगत की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। ताजा कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि भविष्य में भी नियमों को ताक पर रखकर दुकान संचालित करने वालों या अनधिकृत वसूली को बढ़ावा देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उड़नदस्ते की पैनी नजर अब राज्य के अन्य जिलों की मदिरा दुकानों पर भी टिकी हुई है, जिससे विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप का माहौल है।















