Advertisement

क्या दफ्तर न आने के लिए सिर्फ ‘मन नहीं है’ कहना काफी है? न मेडिकल सर्टिफिकेट, न परिवार में इमरजेंसी, न बॉस को लंबी सफाई- बस इतना कहना कि आज मूड ठीक नहीं, और छुट्टी मंजूर

क्या दफ्तर न आने के लिए सिर्फ ‘मन नहीं है’ कहना काफी है? न मेडिकल सर्टिफिकेट, न परिवार में इमरजेंसी, न बॉस को लंबी सफाई- बस इतना कहना कि आज मूड ठीक नहीं, और छुट्टी मंजूर।

यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन चीन की एक रिटेल कंपनी ने ऐसी व्यवस्था लागू कर रखी है। अब यह आइडिया भारत में भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि उद्योगपति हर्ष गोयनका ने इसे सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सवाल किया- क्या भारत को भी ऐसी ‘अनहैप्पी लीव’ की जरूरत है?

Gemini_Generated_Image_fohysbfohysbfohy
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)
sjjj

गोयनका ने अपनी पोस्ट में लिखा कि चीनी रिटेलर पैंग डॉन्ग लाई अपने कर्मचारियों को 10 दिन की पेड ‘अनहैप्पी लीव’ देती है। कंपनी के संस्थापक यू डोंगलाई का फलसफा सीधा है- ‘अगर खुश नहीं हो, तो काम पर मत आओ।’ सबसे दिलचस्प बात यह कि मैनेजर इस छुट्टी को मना नहीं कर सकते।

ने आगे लिखा कि यह भले ही गैर-व्यावहारिक कदम नजर आए, लेकिन भारतीय संदर्भ में इस पर व्यापक बहस जरूरी है- या फिर बर्नआउट रोकने और लोगों को दफ्तर आने के लिए उत्साहित करने का कोई बेहतर तरीका खोजा जाए।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (1)
WhatsApp-Image-2026-08-15-at-00.21.47