भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए तरह के फ्रॉड पर संसद के कानून बनाने का इंतजार करने के बजाय सक्रिय रूप से कार्रवाई करती है।
उन्होंने शनिवार को लंदन में 43वें इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन इकोनॉमिक क्राइम के समापन समारोह में यह बात कही। CJI ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम पर स्वतः संज्ञान लिया है।
इसमें ठग वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी, न्यायिक अधिकारी या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से धोखाधड़ी करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में डिजिटल अरेस्ट के एक मामले में स्वत: संज्ञान लिया था। कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से इस समस्या के स्तर का आकलन करने, अलग अपराध बनाने और नुकसान के अनुपात में सजा तय करने की दिशा में कदम उठाने को कहा था।

















