भोपाल: मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी में 46वें उप पुलिस अधीक्षक (DSP) बैच का बुनियादी प्रशिक्षण शुरू; विशेष महानिदेशक रवि कुमार गुप्ता ने नए कानूनों और आधुनिक तकनीक के प्रयोग पर दिया जोर
भोपाल (मध्यप्रदेश)
प्रमुख बिंदु (Key Highlights)
- मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भोपाल में 46वें उप पुलिस अधीक्षक (DSP) बैच का बुनियादी प्रशिक्षण सत्र शुरू।
- अकादमी निदेशक एवं विशेष पुलिस महानिदेशक रवि कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित हुआ उद्घाटन सत्र।
- प्रशिक्षण बैच में कुल 17 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल, जिनमें 11 महिला एवं 06 पुरुष अधिकारी शामिल हैं।
- प्रशिक्षण में नए आपराधिक कानूनों (BNS, BNSS, BSA) तथा वैज्ञानिक अपराध अनुसंधान को विशेष रूप से किया गया शामिल।
- विशेष महानिदेशक रवि कुमार गुप्ता ने कहा— “अच्छा श्रोता बनना, फील्ड वर्क की समझ और नवाचार ही सफल पुलिसिंग का आधार है।”
- कार्यक्रम में उप निदेशक रामजी श्रीवास्तव, सहायक निदेशक रश्मि पाण्डेय एवं अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद।
मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भोपाल में 46वें उप पुलिस अधीक्षक (DSP) बैच के बुनियादी प्रशिक्षण का औपचारिक उद्घाटन सत्र गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के निदेशक एवं विशेष पुलिस महानिदेशक रवि कुमार गुप्ता ने की। इस नए बैच में कुल 17 राज्य पुलिस सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हुए हैं, जिनमें 11 महिला अधिकारी और 06 पुरुष अधिकारी शामिल हैं। महिला अधिकारियों की बड़ी संख्या पुलिस बल में बढ़ते महिला प्रतिनिधित्व और सशक्तिकरण को दर्शाती है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विशेष पुलिस महानिदेशक रवि कुमार गुप्ता ने सभी नवागत अधिकारियों को बधाई दी और पुलिस सेवा के विविध आयामों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिक दौर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जनता का विश्वास जीतने के लिए पुलिसिंग के तरीकों में बदलाव और आधुनिक तकनीक का समावेश अनिवार्य हो गया है।
“एक प्रभावी और जन-केंद्रित पुलिस अधिकारी बनने के लिए अच्छा श्रोता होना, फील्ड वर्क की व्यावहारिक समझ, कार्य प्रबंधन (Work Management), त्वरित प्रशासनिक निर्णय क्षमता और वैज्ञानिक तरीके से अपराधों का अनुसंधान अत्यंत आवश्यक है। अधिकारियों को अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और पीड़ितों व जरूरतमंदों की सहायता को अपनी सेवा का मूल मंत्र बनाना होगा।”
नया पाठ्यक्रम: बीएनएस, बीएनएसएस और बीएसए जैसे नए कानूनों का समावेश
46वें उप पुलिस अधीक्षक बैच का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पारंपरिक पुलिसिंग तकनीकों के साथ-साथ आधुनिक, तकनीक-आधारित और जन-केंद्रित आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। देश में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों को पाठ्यक्रम में प्रमुखता से जगह दी गई है, ताकि अधिकारी क्षेत्रीय पदस्थापना के दौरान इनका प्रभावी क्रियान्वयन कर सकें।
प्रशिक्षण के प्रमुख विषय:
- नवीन आपराधिक कानून: भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) का गहन अध्ययन।
- प्रशासनिक व कानूनी आधार: भारतीय संविधान, मानव अधिकार, अपराधशास्त्र (Criminology) और कानून-व्यवस्था प्रबंधन।
- व्यक्तित्व व आचरण विकास: नीतिशास्त्र (Ethics), नैतिकता, मानव व्यवहार, तनाव प्रबंधन और जन-सहानुभूति।
- तकनीकी व वैज्ञानिक जांच: साइबर अपराध अनुसंधान, फॉरेंसिक साइंस का प्रयोग और आधुनिक पुलिसिंग टूल्स।
नवाचार और आधुनिक तकनीक अपनाने पर विशेष बल
अकादमी के निदेशक ने अधिकारियों से कहा कि बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपराधियों के पैटर्न में भी तेजी से बदलाव आ रहा है। ऐसे में पारदर्शी और परिणामदायी पुलिसिंग के लिए फॉरेंसिक साइंस, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक डिजिटल साक्ष्यों का सही उपयोग जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को लीक से हटकर नए नवाचार (Innovations) करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के उप निदेशक रामजी श्रीवास्तव, सहायक निदेशक (प्रशिक्षण) रश्मि पाण्डेय, सहायक निदेशक व प्रभारी पुलिस अधीक्षक (PTS भोपाल) यास्मीन जहरा, अकादमी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, विषय-विशेषज्ञ तथा 45वें एवं 46वें डीएसपी बैच के प्रशिक्षु अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
जन-केंद्रित और संवेदनशील पुलिसिंग का संकल्प
कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नवागत अधिकारियों को निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ जनसेवा करने के संकल्प के साथ हुआ। अकादमी प्रबंधन ने आश्वस्त किया कि अधिकारियों को फील्ड में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों से निपटने के लिए हर संभव अत्याधुनिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।









