“सरकार की सांसें फूली हुई हैं, गृहमंत्री पुलिस मुख्यालय के चक्कर काट रहे”: पूर्व सीएम भूपेश बघेल का बीजेपी पर बड़ा सियासी हमला
यह सरकार पूरी तरह बैकफुट पर है। जिस तरह 12 खंभा की रैली ऐतिहासिक थी, यह रैली उससे भी बड़ी और ऐतिहासिक होगी।

यह सरकार पूरी तरह बैकफुट पर है। जिस तरह 12 खंभा की रैली ऐतिहासिक थी, यह रैली उससे भी बड़ी और ऐतिहासिक होगी।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक तीखे बयान जारी करते हुए उन्होंने दावा किया है कि राज्य की वर्तमान सरकार विपक्ष के बढ़ते जनाधार और आंदोलनों से पूरी तरह से घबरा चुकी है।
भूपेश बघेल ने साफ शब्दों में लिखा कि सरकार की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि उसकी “सांसें फूली हुई हैं।” उन्होंने यह गंभीर आरोप लगाया कि राज्य के गृहमंत्री लगातार पुलिस मुख्यालय जाकर आला अधिकारियों के साथ गुप्त और आपात् बैठकें कर रहे हैं। सरकार का पूरा ध्यान प्रदेश के विकास या जनसमस्याओं के समाधान पर नहीं, बल्कि विपक्ष द्वारा आयोजित की जा रही जन-रैलियों को रोकने और उन्हें दबाने के हथकंडों पर केंद्रित हो गया है।
भूपेश बघेल ने अपने बयान में जिस ’12 खंभा की रैली’ का जिक्र किया है, उसने राज्य की सियासत में एक नया इतिहास रचा था। 12 खंभा प्रदर्शन केवल एक सामान्य राजनीतिक रैली नहीं थी, बल्कि वह राज्य सरकार की विभिन्न नीतियों, प्रशासनिक ढिलाई, और जनता से जुड़े जल-जंगल-जमीन तथा रोजगार के मुद्दों पर किया गया एक अभूतपूर्व जन-आंदोलन था।
उस रैली में जिस प्रकार से ग्रामीण, किसान, युवा और महिलाएं सड़कों पर उतरे थे, उसने सत्ता के गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी थी। भूपेश बघेल के अनुसार, 12 खंभा रैली ने यह सिद्ध कर दिया था कि प्रदेश की आम जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है। अब जब विपक्ष उससे भी बड़ी रैली की तैयारी कर रहा है, तो सरकार के भीतर का डर और ज्यादा गहरा गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने अपने पोस्ट में गृहमंत्री पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब राज्य में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, और जन-सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, तब गृहमंत्री पुलिस मुख्यालय का दौरा केवल इसलिए कर रहे हैं ताकि विपक्ष की लोकतांत्रिक रैलियों को कैसे रोका जाए, इसकी योजनाएं बनाई जा सकें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष का यह आरोप सरकार की सुरक्षात्मक तैयारियों पर सीधा प्रहार है। बघेल का तर्क है कि यदि सरकार ने जनता के हित में कार्य किए होते, तो उसे किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन या रैली से डरने की आवश्यकता नहीं पड़ती। परंतु गृहमंत्री का बार-बार पीएचक्यू (Police Headquarters) जाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार अंदर ही अंदर डरी हुई है।
कांग्रेस और विपक्ष के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी महारैली के लिए राज्यभर में व्यापक तैयारियां चल रही हैं। गांव-गांव और बूथ स्तर तक बैठकों का दौर जारी है। इस बार मुख्य मुद्दों में शामिल हैं:
भूपेश बघेल का दावा है कि इस महारैली में लाखों की संख्या में जनता भाग लेगी, जिससे 12 खंभा रैली का रिकॉर्ड भी ध्वस्त हो जाएगा।
भूपेश बघेल के इस आक्रामक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद सत्ता पक्ष में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। हालांकि बीजेपी प्रवक्ताओं और सरकार की ओर से यह कहा जा रहा है कि गृहमंत्री का पुलिस मुख्यालय जाना प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक का हिस्सा है, जिसे विपक्ष बेवजह तूल दे रहा है।
बीजेपी का तर्क है कि राज्य में कानून का शासन बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और किसी भी बड़े जमावड़े के दौरान शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाना प्रशासन का नियमित काम है। लेकिन भूपेश बघेल के बयानों ने जनमानस में यह संदेश फैलाने में सफलता पाई है कि सरकार रैली की विशालता से सशंकित है।
जैसे-जैसे महारैली की तिथि समीप आ रही है, राज्य का राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म होता जा रहा है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल के ट्वीट ने इस आग में घी डालने का काम किया है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे जनता के आक्रोश का विस्फोट बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार इसे विपक्ष का हताशा भरा कदम करार देने की कोशिश कर रही है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी महारैली वास्तव में 12 खंभा रैली का रिकॉर्ड तोड़ पाती है या नहीं, लेकिन इतना तय है कि भूपेश बघेल के इस एक पोस्ट ने प्रदेश के राजनीतिक तापमान को उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है।
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