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रायपुर : दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे भैंसबोड़ के ग्रामीणों ने 75वें स्वतंत्रता दिवस को मनाया संपर्क आजादी के रूप में

रायपुर : दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे भैंसबोड़ के ग्रामीणों ने 75वें स्वतंत्रता दिवस को मनाया संपर्क आजादी के रूप मेंराज्य निर्माण के अठारह वर्ष बाद खर्रा नदी में पुलिया बनने सेगांव, ब्लाक और जिला से आवागमन हुआ सुगम

अब स्कूली बच्चों को बरसात के दिनों स्कूल जाने में नहीं होगी परेशानी

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रायपुर, 20 अगस्त 2021मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में प्रदेश के अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक विकास की दूरदृष्टि सोच और निरंतर प्रयास से कवर्धा जिले के दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे ग्राम भैंसबोड़ के ग्रामीणों को अब सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो गई है।
खर्रा नदी में पुल बनने से अब भैंसबोड़, विकासखण्ड सहसपुर लोहारा और कबीरधाम जिला मुख्यालय कवर्धा से भैंसबोड़ के ग्रामीण सुगमता के साथ जुड़ गए हैं।
ग्रामीणों ने इस खुशी में 75वें स्वतंत्रता दिवस को संपर्क आजादी दिवस के रूप में मनाया। अब स्कूली बच्चों को बरसात के दिनों में स्कूल आने-जाने में कोई परेशानी नहीं होगी, साथ ही ग्रामीण भी सुगमतापूर्वक कहीं भी आ जा सकेंगे।
दुर्गम वनांचल में बसे ग्राम भैंसबोड़ में आदिवासी और विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति परिवार भी निवास करते है।
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 18 बरस बाद गांव के लोग विकास के मुख्यधारा से जुड़ रहे है। अब बच्चों बच्चों को स्कूल जाने से लेकर ग्रामीणों को राशन सामग्री, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य सामग्री लाने-लेजाने में कोई परेशानी नहीं होगी।
गौरतलब है कि कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखण्ड़ में सुतियापाठ मध्यम जलाशय है।
इस जलाशय के पीछे भाग में पहाड़ियों के बीच खर्रा नदी का बहाव होता है। इस नदी के उस पार मैकल पर्वत श्रृंख्ला की तलहटी पर छोटा सा गांव भैसबोड है। इस गांव के आदिवासी और बैगा परिवार सदियों में इस नदी पर पुलिया बनाने के लिए संघर्ष करते आ रहे थे।
भैंसबोड के बुजूर्ग ग्रामीण अमर सिंह गोड़ बताते है कि उनकी पूरी जिंदगी इस गांव में पुलिया बनाने की मांग में गुजर गई, वे भी अच्छे से पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन आसपास स्कूल और गांव के इसी नदी में पुलिया नहीं होने से उनके सपने अधूरे रह गए। श्री अमरसिंह गोड़ अब गांव के हर बच्चें को शिक्षित और पढ़ा लिखा देखना चाहता है।
गांव के अन्य ग्रामीण जन जोहन धुर्वे, धरमलाल, प्रेमलाला और लक्ष्मीधुर्वें ने भी बताया कि ग्रामीणों ने क्षेत्रीय भ्रमण में पहुंचे क्षेत्र के विधायक श्री मोहम्मद अकबर से भेट कर खर्रा नदी में पुलिया बनाने के लिए फिर से मांग की। वनमंत्री श्री अकबर ने ग्रामीणों की इस मांग को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को शीघ्र स्थल निरीक्षण कर पुलिया निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए। मांग के महज दो दिन बाद ही अधिकारियों की टीम गांव पहुंची और नदी का नॉप-जोख शुरू हो गया। ग्रामीणों को भरोसा नहीं हुआ, क्योंकि इस नदी के न जाने कितने बार नांप-जोख होते ग्रामीणों ने देखा था। लेकिन कुछ महीनों बाद फिर से अधिकारी की टीम गांव पहुंची और मनरेगा के तहत पुलिया बनाने का काम शुरू किया। इस नदी में पुलिया सह रपटा बनाने के लिए 44 लाख रूपए की मंजूरी प्रदान की गई है और देखते ही देखते उनके वर्षों का सपना पूरा हो गया।
भैसबोड के कक्षा सातवीं के छात्र ब्रजलाल धुर्वे, कक्षा ग्यारहवीं के छात्र लुकेश मरकाम ने बताया कि नदी में पुलिया बनने से गांव के लोंगों के साथ-साथ स्कूली बच्चें भी काफी खुश हैं।

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