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वन विभाग व गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान की निष्क्रियता,जंगल से इमारती साल ,बीजा पेड़ों का अंधाधूंध कर रहे है कटाई

वन विभाग व गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान की निष्क्रियता,
जंगल से इमारती साल ,बीजा पेड़ों का अंधाधूंध कर रहे है कटाई

गोपाल सिंह विद्रोही बिश्रामपुर/बिहारपुर सूरजपुर जिले के ओडगी विकासखंड के सीमावर्ती क्षेत्र ग्राम पंचायत उमझर,रामगढ़,खोहिर,बैजनपाठ,कोल्हुआ,चौगा,खैरा,करौटी,जुड़वनिया, कछवारी, महुली,मोहरसोप, क्षेत्र में साल बीजा सहित अन्य इमारती पेड़ों की अवैध कटाई जोरों पर है। सालों से हो रही अवैध कटाई पर वन विभाग व गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान का मौन रहना आश्चर्यजनक है। एक ओर बरसात शुरू होते ही कृषक वन भूमि पर कटाई कर अवैध कब्जा कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर लकड़ी तस्कर इमारती लकड़ी विशेषकर साल बीजा की लकड़ी की अवैध कटाई कर उसे सिल्ली बनाकर बेचने में निरंतर बेखौफ लगे हैं। यह भी सही हैं कि अवैध कटाई से लेकर गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान बेरियर के रास्ते मध्यप्रदेश में बिक्री का पूरा कार्य खुलेआम चल रहा है। फिर भी वन विभाग व गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों का आंख मूंदकर बैठना यह साबित करता है कि जंगलों की अवैध कटाई वन विभाग व घासीदास राष्ट्रीय उद्यान की सरपरस्ती पर खुलेआम चल रही है। जंगलों के संरक्षण संवर्धन तथा वनों की सुरक्षा के लिए केंद्र व राज्य सरकार प्रतिवर्ष क्षेत्र में करोड़ों रुपए खर्च कर रही है किंतु पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने में विभाग पूरी तरह असफल रहा है या यूं कहें कि वन विभाग राष्ट्रीय उद्यान अवैध कटाई व वन तस्करों के संरक्षण को लेकर कार्य कर रहा है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

अंधाधुंध कटाई से जंगल अब ठूंठ में बदलने लगे

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वन परिक्षेत्र बिहारपुर एवं गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान महुली क्षेत्र के जंगलों में जारी है साल बीजा पेड़ों की अवैध कटाई
बिहारपुर क्षेत्र के जंगल में पहाड़ी तक सैकड़ों नहीं हजारों की तादाद में साल के पेड़ों की अवैध कटाई की गई है। इनके टूट अभी भी मौजूद हैं जिन पर वन विभाग व गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान ने कोई कार्रवाई नहीं की है। इससे वन तस्करों के हौसले बुलंद हैं और अब वे सड़क किनारे के पेड़ों को काटकर मोटरसाइकिल साइकल एवं कंघा में परिवहन करने में लगे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण ग्राम कछवारी,खोहिर,कोल्हुआ का जंगल है जहां एक बड़ा वन तस्कर गिरोह कार्यरत है जो वन अधिकारी, कर्मचारियों की मिलीभगत से वनों को खत्म करने में लगा है। यदि यही हाल रहा तो आच्छादित वनों के लिए विख्यात यह आदिवासी क्षेत्र जल्द ही समाप्ति की ओर होगा। यही स्थिति रहा तो रिलायंस,ऐसार, अदानी, जैसे कंपनियां यहां कार्य करेंगे हाथी भालू हिरण जैसे अन्य जंगली जानवर दिन प्रतिदिन क्षेत्र में विलुप्त होते जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इसकी सूचना पर्यावरण प्रेमियों ने वन अधिकारियों को न दी हो किंतु तस्करों से मिलीभगत के चलते अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर प्रभारी रेंजर वनरक्षक व डिप्टी रेंजर को शिकायत भी की थी किंतु उन्होंने जंगल में कोई ध्यान नहीं दिया।

ईंट भट्टे भी बेखौफ चल रहे
वन क्षेत्र में इन दिनों ईंट भट्टों की भी भरमार है किंतु न तो राजस्व विभाग और न ही वन विभाग इन पर कोई कार्रवाई कर रहा। स्वयं के मकान बनाने के नाम पर बीस हजार ईंट बनाने की छूट का लोग धड़ल्ले से फायदा उठा रहे हैं और लाखों की तादाद में ईंट बन रही है। इसके लिए ईंधन के रूप में बेशकीमती लकड़ी वनों से काटकर लाई जा रही है इस पर वन विभाग का मौन रहना समझ से परे है।

वन सुरक्षा समितियां भी नदारथ

शासन ने पर्यावरण को बढ़ावा देने वनों की सुरक्षा करने गांव-गांव में वन सुरक्षा समितियों का गठन भी किया है जो वनों की सुरक्षा के साथ साथ पर्यावरण जागरूकता के लिए भी कार्य करती हैं किंतु यहां तो वन सुरक्षा समिति सिर्फ कागजों में बनी हुई है। इसलिए वनों की सुरक्षा ताक पर है और वन तस्कर खुलेआम शासन के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जब हमने क्षेत्र का पैदल भ्रमण किया तो सिर्फ 10 एकड़ के क्षेत्र में ही सैकड़ों की तादाद में साल के पेड़ों की कटाई दिखाई दी।

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