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तालिबान मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों की एंट्री बैन, भारत में बढ़ा बवाल — प्रियंका गांधी, चिदंबरम और महुआ मोइत्रा ने साधा निशाना

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के भारत दौरे के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। विदेश मंत्रालय ने कहा — इस फैसले में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा।

तालिबान मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों की एंट्री बैन, भारत में बढ़ा विवाद

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी इन दिनों भारत दौरे पर हैं। सात दिन की इस यात्रा के दौरान उन्होंने शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और द्विपक्षीय व्यापार, मानवीय सहायता व सुरक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत की।

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हालांकि, उनके भारत दौरे की चर्चा प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को प्रवेश न देने को लेकर सोशल मीडिया पर ज्यादा रही। मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे पत्रकार समुदाय और आम जनता में गुस्सा फूट पड़ा।


MEA ने दी सफाई

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि महिला पत्रकारों को बाहर रखने के निर्णय में मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं थी।
MEA ने कहा कि यह निर्णय केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजकों द्वारा लिया गया था। मंत्रालय ने दोहराया कि यह मुद्दा आयोजकों से जुड़ा था, न कि भारतीय सरकार से।

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विपक्ष का हमला

इस विवाद पर कई राजनीतिक दलों ने सरकार पर निशाना साधा।
पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, “जब महिला पत्रकारों को बाहर रखा गया, तो पुरुष पत्रकारों को विरोध में वॉकआउट करना चाहिए था।”

प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछा — “क्या आपके महिला अधिकारों के दावे सिर्फ चुनावी नारे हैं?”
वहीं टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि “यह हर भारतीय महिला का अपमान है। सरकार ने तालिबान मंत्री को ऐसी अनुमति देकर शर्मनाक काम किया है।”


तालिबान मंत्री का बयान

विदेश मंत्री मुत्तकी ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में सुधार के प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने अफगानिस्तान को अपने राजनयिक नई दिल्ली भेजने की अनुमति दी है।
अब अफगानिस्तान जाकर राजनयिकों का चयन किया जाएगा और उन्हें भारत भेजा जाएगा।


सोशल मीडिया पर बहस तेज

प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों के बहिष्कार के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर भारी बहस छिड़ गई।
लोगों ने इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता और महिला अधिकारों पर हमला बताया। कई पत्रकारों ने इस घटना को भारत की लोकतांत्रिक छवि पर धब्बा कहा।

Ashish Sinha

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