
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण: महतारी गौरव वर्ष और विष्णु देव साय सरकार की बड़ी उपलब्धियां
छत्तीसगढ़ में महतारी गौरव वर्ष 2026 के तहत महिलाओं के लिए महतारी वंदन और रानी दुर्गावती जैसी योजनाओं से आर्थिक क्रांति आ रही है। जानें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की बड़ी उपलब्धियां।
स्वाभिमान की नई पहचान: छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का स्वर्णिम दौर, ‘महतारी गौरव वर्ष’ से बदली तस्वीर
रायपुर: छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाते हुए महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान और आर्थिक सशक्तिकरण को एक नई और ऐतिहासिक दिशा दी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं अब जमीनी स्तर पर न केवल प्रभावी परिणाम दे रही हैं, बल्कि राज्य की आधी आबादी के जीवन में खुशहाली का नया सवेरा लेकर आई हैं।

मुख्यमंत्री का विजन: आत्मनिर्भर और सशक्त महतारी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि ‘महतारी गौरव वर्ष’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का एक व्यापक और समावेशी अभियान है। राज्य सरकार ने अपने बजट में महिलाओं और बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सरकार ने आंगनबाड़ी संचालन के लिए 800 करोड़ रुपए, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपए और कुपोषण मुक्ति के लिए 235 करोड़ रुपए का भारी-भरकम प्रावधान किया है। यह निवेश आने वाली पीढ़ी को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
महतारी वंदन योजना: आर्थिक आजादी का मील का पत्थर
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आंकड़ों के साथ राज्य की प्रगति का ब्यौरा पेश किया। उन्होंने बताया कि 10 मार्च 2024 को शुरू हुई ‘महतारी वंदन योजना’ आज छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच बन गई है। इस योजना के माध्यम से राज्य की लगभग 70 लाख महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने 1,000 रुपए की राशि सीधे हस्तांतरित की जा रही है।
| विवरण | आंकड़े / राशि |
|---|---|
| कुल लाभार्थी महिलाएं | लगभग 70 लाख |
| अब तक जारी किश्तें | 26 किश्तें |
| कुल हस्तांतरित राशि | 16,881 करोड़ रुपए से अधिक |
| वर्तमान बजट प्रावधान | 8,200 करोड़ रुपए |
रानी दुर्गावती योजना और महतारी सदन: भविष्य की तैयारी
बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए राज्य सरकार ने रानी दुर्गावती योजना का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत बेटी के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर उसे 1.50 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके लिए प्रारंभिक तौर पर 15 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। साथ ही, महिलाओं के सामाजिक मेल-जोल और कौशल विकास के लिए महतारी सदनों का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है। अब तक 368 सदनों को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से 137 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
मातृत्व सुरक्षा और पोषण में छत्तीसगढ़ अव्वल
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। अब तक 3.73 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं और 235 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि सीधे माताओं के खातों में भेजी जा चुकी है। फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने अपने वार्षिक लक्ष्य का 93 प्रतिशत से अधिक हासिल कर लिया है।
पोषण अभियान के मामले में भी छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर रहा है। पोषण माह 2024 के दौरान छत्तीसगढ़ को प्रति केंद्र प्रदर्शन में देश भर में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। इसके अलावा, ‘न्योता भोज’ जैसे अभिनव प्रयोगों के माध्यम से 1.83 लाख से अधिक बच्चों को लाभान्वित किया गया है, जो सामुदायिक सहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: लखपति दीदी और उज्ज्वला
महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उन्हें ‘रेडी-टू-ईट’ और अन्य सरकारी परियोजनाओं से जोड़ा गया है। ‘लखपति दीदी’ योजना के माध्यम से महिलाओं को बड़े व्यवसायिक अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। वहीं, उज्ज्वला योजना के तहत 38 लाख से अधिक महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिली है। सखी वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 27 से बढ़ाकर 34 करना इस बात का प्रमाण है कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा और त्वरित न्याय के लिए पूरी तरह गंभीर है।
निष्कर्ष: विकास की नई धुरी
विष्णु देव साय और लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार और धुरी बन चुकी हैं। ‘महतारी गौरव वर्ष’ के ये ठोस परिणाम बताते हैं कि राज्य अब महिला सशक्तिकरण के वास्तविक स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुका है।












