जशपुरनगर : विज्ञान एवं वाणिज्य शिक्षण केंद्र दुर्ग और जगदलपुर में प्रवेश हेतु 30 जून तक आवेदन आमंत्रित

जशपुरनगर : विज्ञान एवं वाणिज्य शिक्षण केंद्र दुर्ग और जगदलपुर में प्रवेश हेतु 30 जून तक आवेदन आमंत्रित

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सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जशपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए आर्यभट्ट विज्ञान एवं वाणिज्य शिक्षण प्रोत्साहन योजना अंतर्गत विज्ञान एवं वाणिज्य शिक्षण केन्द्र कन्या हेतु जिला-दुर्ग तथा बालक हेतु जिला जगदलपुर (बस्तर) में पात्रता रखने वाले छात्रों को प्रवेश दिया जाना है।
इच्छुक विद्यार्थी प्रवेश हेतु आवेदन-पत्र कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों एवं छात्रावासों से निर्धारित प्रारूप प्राप्त कर वांछित समस्त दस्तावेजों के साथ 30 जून तक कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास जशपुर में जामा कर सकते हैं।
प्रवेश हेतु अनुसूचित क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के छात्र-छात्राएं जिन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण किये हो एवं विज्ञान व वाणिज्य विषय के साथ आगामी पढ़ाई के इच्छुक हों। ऐसे इच्छुक विद्यार्थियों को विभाग के साथ अनुबंध पत्र हस्ताक्षर करना होगा कि विज्ञान एवं वाणिज्य विषयों के स्नातक/स्नातकोत्तर तथा बी.एड. की पढ़ाई के पश्चात् वे प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देने के लिए सहमत है।
बस्तर एवं दुर्ग जिला मुख्यालय पर संचालित विज्ञान वाणिज्य केन्द्र पर अस्थायी प्रवेश दिया जाएगा। अस्थायी रूप से प्रवेशित समस्त विद्यार्थियों को स्वयं की रुचि से संबंधित जिला मुख्यालय (दुर्ग/जगदलपुर) अथवा आस-पास संचालित शासकीय अथवा मान्यता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय/विश्वविद्यालय में संचालित विज्ञान/वाणिज्य विषय की स्नातक अथवा स्नातकोत्तर कक्षाओं में 15 दिवस के अंदर प्रवेश लेना अनिवार्य होगा। नियमित शिक्षण संस्थान में प्रवेश के बाद विद्यार्थियों को विज्ञान एवं वाणिज्य विकास केन्द्र में स्थायी प्रवेश दिया जायेगा। स्थाई प्रवेश के पश्चात् विद्यार्थी को योजना के तहत दी जाने वाली अन्य सुविधाओं की पात्रता होगी। स्नातक स्तर पर एक वर्ष परीक्षा अनुत्तीर्ण विद्यार्थी को पुनः शासकीय व्यय पर 1 वर्ष के लिये प्रवेश की पात्रता होगी। पुनः अनुत्तीर्ण होने पर आगामी 1 वर्ष तक विद्यार्थी को स्वयं के व्यय पर अध्ययन करना होगा। किसी भी स्थिति में स्नातक पाठ्यक्रम हेतु अधिकतम 4 वर्ष तक छात्रवृत्ति एवं अन्य सुविधाओं की पात्रता होगी।