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महासमुंद : जियो रेफ्रेंसिंग और भूमि रिकॉर्ड डिजिटलीकरण के संबंध में!

महासमुंद : जियो रेफ्रेंसिंग और भूमि रिकॉर्ड डिजिटलीकरण के संबंध में!

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महासमुंद //भूमि और फसल संबंधी रिकॉर्ड को अद्यतन करने जियो रेफ्रेंसिंग तकनीक के माध्यम से किया जाएगा तथा खसरा और नक्शा का मैप के माध्यम से वास्तविक रूप से मिलान किया जाएगा। इस संबंध में आज सभी राजस्व अधिकारियों को चिप्स के अधिकारी द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में बताया गया कि जो वास्तविक खसरा है उसे सैटेलाइट मैप के माध्यम से मिलान किया जाएगा। इससे गांव की सीमा सहित भूस्वामी का वास्तविक खसरा और नक्शा की जानकारी होगी तथा इसे ऑनलाईन देखा जा सकेगा। इसके लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। सर्वेक्षण में शासकीय जमीन का चिन्हांकन, विवादित जमीन का मौका जांच करना शामिल है। यह कार्य पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में महासमुंद, धमतरी और कबीरधाम जिला में प्रारम्भ है। महासमुंद में भी इस तरह का सर्वे कार्य किया गया है। प्रेजेंटेशन के दौरान राजस्व सचिव श्री अविनाश चम्पावत, संचालक लैंड रिकॉर्ड रमेश शर्मा, चिप्स के सीईओ रितेश अग्रवाल, कलेक्टर प्रभात मलिक, एडिशनल आयुक्त लैंड रिकॉर्ड संतोष देवांगन सहित जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और आरआई, पटवारी मौजूद थे।
राजस्व सचिव अविनाश चम्पावत ने कहा कि इस वर्ष धान खरीदी के पूर्व एप्प के माध्यम से बोये गए फसल का गिरदावरी किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक रणनीति बनाकर इसे सितम्बर, अक्टूबर माह में पूर्ण करना है। गिरदावरी में कृषकों का पंजीयन समेत फसलों की जानकारी फार्म और फार्मर आईडी बनाया जाएगा। इससे फसल बीमा सहित किसानों को लोन लेने में सहुलियत होगी। उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्ड को डिजिटलीकरण करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य है।

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