अंबिकापुर नगर निगम में सियासी संग्राम: महापौर के बयान पर कांग्रेस का विरोध, शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार

महापौर के शपथ ग्रहण से कांग्रेस का बहिष्कार, अलग से शपथ की रखी मांग

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महापौर के नफरती बयान पर कांग्रेस का विरोध जारी, पुलिस कार्रवाई की भी दी चेतावनी

अंबिकापुर नगर निगम में राजनीतिक टकराव गहराता जा रहा है। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह 2 मार्च को होने वाले महापौर और पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा नहीं लेगी। कांग्रेस का कहना है कि नवनिर्वाचित महापौर मंजूषा भगत के विवादित और नफरती बयान के विरोध में यह निर्णय लिया गया है। विपक्ष के नेता शफी अहमद ने कहा कि पार्टी ने पहले ही मांग की थी कि महापौर अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, लेकिन अब तक उन्होंने ऐसा नहीं किया।

कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षदों ने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि उनके लिए अलग से शपथ ग्रहण की व्यवस्था की जाए। कांग्रेस का कहना है कि महापौर द्वारा दिए गए बयान ने आदिवासी समुदाय, पूर्ववर्ती महापौरों और पूरे अंबिकापुर शहर का अपमान किया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराने के लिए भी आवेदन दे चुके हैं।

महापौर के बयान पर कांग्रेस का आक्रोश क्यों?

दरअसल, नवनिर्वाचित महापौर मंजूषा भगत ने हाल ही में एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि नगर निगम में पूर्ववर्ती प्रशासनिक कार्यकाल अशुद्ध था और वे गंगाजल से शुद्धीकरण कर कार्यभार ग्रहण करेंगी। उनके इस बयान को कांग्रेस ने न केवल पूर्व महापौरों बल्कि अंबिकापुर की जनता का भी अपमान बताया।

कांग्रेस का कहना है कि महापौर ने अपने बयान से साफ कर दिया कि वे राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं और जातिगत व धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा दे रही हैं। कांग्रेस नेताओं ने इसे संविधान के अनुच्छेद 17 का उल्लंघन बताया, जो कि जातिगत और धार्मिक अस्पृश्यता का निषेध करता है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा,

“महापौर का यह बयान न केवल कांग्रेस के कार्यकाल और पूर्व महापौरों का अपमान है, बल्कि यह भाजपा की आदिवासियों के प्रति हीनभावना को भी दर्शाता है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि शहर की पहली महिला महापौर अपने कार्यकाल की शुरुआत इस तरह के नफरती बयान से कर रही हैं।”

कांग्रेस ने दर्ज कराई एफआईआर की मांग, दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

महापौर के इस बयान को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार को राजीव भवन से कोतवाली तक एक विशाल रैली निकाली और पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन सौंपा। कांग्रेस ने अपने आवेदन के साथ महापौर के बयान का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी पुलिस को दिया।

पुलिस ने कांग्रेस को आश्वासन दिया कि वह मामले की जांच के बाद उचित कार्रवाई करेगी। लेकिन कांग्रेस ने चेतावनी दी कि अगर समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।

पूर्व औषधीय एवं पादप बोर्ड अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि,

“महापौर द्वारा पूरे अंबिकापुर शहर को अशुद्ध बताने का बयान बेहद आपत्तिजनक है। यह उस जनता का अपमान है, जिसने उन्हें महापौर के रूप में चुना है। शहर के नागरिकों ने कभी अपने जनप्रतिनिधियों का धर्म नहीं देखा, बल्कि उनकी क्षमता को देखा है।”

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कांग्रेस का शपथ ग्रहण समारोह से बहिष्कार

नगर निगम में विपक्ष के नेता शफी अहमद ने घोषणा की कि कांग्रेस इस शपथ ग्रहण समारोह से पूरी तरह अलग रहेगी। उन्होंने कहा कि,

> “हमने महापौर से अनुरोध किया था कि वे अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसलिए कांग्रेस पार्षद शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगे। हम कलेक्टर से अनुरोध करेंगे कि कांग्रेस पार्षदों के लिए अलग से शपथ ग्रहण की व्यवस्था की जाए।”

कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षदों को अलग से नगर निगम परिसर या कलेक्टर के कार्यालय में शपथ दिलाई जाए।

गंगाजल के उपयोग को लेकर भी हुआ विवाद

महापौर मंजूषा भगत के गंगाजल से नगर निगम का शुद्धिकरण करने के बयान को भी कांग्रेस ने विवादास्पद करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि,

“यदि महापौर कहतीं कि वे नगर निगम में सेवा कार्यों की पवित्र शुरुआत के लिए गंगाजल का उपयोग करेंगी, तो कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन उन्होंने इसे एक नफरती बयान के रूप में प्रस्तुत किया।”

जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने इस पर कहा,

“गंगाजल का उपयोग सनातन परंपरा में सात्विक और धार्मिक कार्यों के लिए होता है, न कि राजनीतिक द्वेष को बढ़ावा देने के लिए। महापौर ने इसे एक राजनीतिक हथियार बना दिया है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

महापौर के बयान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे को हल्के में नहीं लेगी और महापौर की जवाबदेही तय करने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।

इस पूरे विवाद के बाद यह देखना होगा कि भाजपा और नगर निगम प्रशासन कांग्रेस की मांगों पर क्या रुख अपनाता है। लेकिन यह स्पष्ट है कि अंबिकापुर नगर निगम में राजनीतिक टकराव जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा।

इस मुद्दे पर शहर में भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग मानते हैं कि महापौर को अपने शब्दों पर पुनर्विचार करना चाहिए, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि यह कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा है।

एक स्थानीय निवासी अविनाश वर्मा ने कहा,

“शहर के विकास से ज्यादा राजनीति हो रही है। हमें उम्मीद थी कि महापौर अपने कार्यकाल की शुरुआत सकारात्मक रूप से करेंगी, लेकिन यह बयान निराशाजनक है।”

वहीं, एक अन्य नागरिक सुरेश सिंह ने कहा,

“कांग्रेस सिर्फ मुद्दा बनाकर राजनीति कर रही है। महापौर को अपने तरीके से काम करने दिया जाए।”

अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि कांग्रेस के दबाव के बीच प्रशासन क्या निर्णय लेता है। क्या महापौर अपने बयान पर स्पष्टीकरण देंगी? क्या पुलिस कांग्रेस की शिकायत पर FIR दर्ज करेगी? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल, क्या यह विवाद नगर निगम की राजनीति में आगे और तनाव पैदा करेगा?

इन सभी सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा, लेकिन इतना तो तय है कि अंबिकापुर नगर निगम में सियासी सरगर्मी अभी और तेज होने वाली है।