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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ‘ज्ञान धारा – शिक्षा संवाद’ कार्यक्रम में हुए शामिल…

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय  ने आज राजधानी रायपुर में हरिभूमि और आईएनएच मीडिया समूह द्वारा आयोजित ‘ज्ञान धारा – शिक्षा संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की बुनियाद मानती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब से मैंने शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाली, उसी क्षण से मेरी प्राथमिकता रही कि विभाग को गहराई से समझते हुए उसमें सुधार की ठोस पहल की जाए।

सबसे पहले एक गहन समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें यह पाया गया कि राज्य में शिक्षक और छात्रों का अनुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर होने के बावजूद वितरण असमान है।ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों की संख्या अधिक है, लेकिन शिक्षक अपेक्षाकृत कम हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में शिक्षक अधिक संख्या में पदस्थ हैं। इस असंतुलन को दूर करने हेतु राज्य में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया आरंभ की गई। इसके परिणामस्वरूप आज छत्तीसगढ़ का कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है। इस प्रभाव का विस्तार इतना व्यापक रहा कि इरकभट्टी जैसे गांवों में वर्षों से बंद पड़े विद्यालय पुनः प्रारंभ हो गए हैं।

शिक्षा राष्ट्र निर्माण का आधार है – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब भी शिक्षकों की आवश्यकता बनी हुई है, जिसे ध्यान में रखते हुए 5000 नए शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शीघ्र आरंभ की जाएगी।

नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में लागू किया गया है, और राज्य में हमारी सरकार ने इसे तत्परता से अपनाया है। छत्तीसगढ़ में अब 18 स्थानीय भाषाओं एवं बोलियों में प्राथमिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। इससे न केवल स्थानीय भाषाओं के संरक्षण को बल मिला है, बल्कि बच्चों की सीखने की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

शिक्षा राष्ट्र निर्माण का आधार है – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम-श्री स्कूल योजना के अंतर्गत छात्रों को हाई-टेक सुविधाएँ मिल रही हैं। विद्यालय भवनों के रखरखाव हेतु ₹133 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। साथ ही, छात्रावासों की स्थिति सुधारने के लिए भी ठोस कदम उठाए गए हैं।

नक्सलवाद से विकास की ओर – बस्तर की नई दिशा

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन, उपजाऊ भूमि और जैव विविधता से परिपूर्ण एक समृद्ध प्रदेश है, किंतु यह भी सत्य है कि यह राज्य वर्षों से नक्सलवाद की पीड़ा झेलता आया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के साथ हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि नक्सल समस्या से दोहरे मोर्चे—सुरक्षा और विकास—पर समन्वित रणनीति से निपटा जाएगा। सरकार ने नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की, और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब तक 1500 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

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साथ ही, सुरक्षा बलों के द्वारा चलाए जा रहे अभियान में कई सक्रिय नक्सली न्यूट्रलाइज किए गए हैं। पुनर्वास हेतु ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद का स्थायी समाधान केवल सुरक्षा बलों से नहीं, बल्कि शिक्षा, सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से संभव है। सरकार इन क्षेत्रों में विशेष रूप से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर के धुड़मारास गांव को विश्व के 20 प्रमुख पर्यटन ग्रामों में स्थान मिला है, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया गया है, और बस्तर में बोधघाट परियोजना के माध्यम से 7 लाख हेक्टेयर सिंचाई सुविधा और 200 मेगावॉट बिजली उत्पादन के लक्ष्य पर कार्य प्रगति पर है।

शिक्षा राष्ट्र निर्माण का आधार है – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय प्रगति हुई है। एक समय था जब राज्य में मात्र 1 मेडिकल कॉलेज था, आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। राज्य में अब तक 19 निजी विश्वविद्यालय स्थापित हो चुके हैं और 3 नए विश्वविद्यालयों की स्थापना प्रक्रिया में है।

उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही विश्वगुरु रहा है और आज पुनः वह स्थान प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है। विदेशों से छात्र भारत में शिक्षा ग्रहण करने आ रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा का केंद्र बने।

2047 का लक्ष्य: विकसित भारत, विकसित छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2047 तक “विकसित छत्तीसगढ़” के लिए एक विस्तृत विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। डॉक्यूमेंट में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के विद्यालयों और महाविद्यालयों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो तथा राज्य की जीएसडीपी में शिक्षा का योगदान सशक्त और प्रभावशाली बने।

उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को “उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान” से अलंकृत किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों में सुश्री के. शारदा, श्री बी. आर. साहू, श्री भरत किशोर यादव,डॉ. धनंजय पाण्डेय, श्री बलदाऊ सिंह श्याम शामिल हैं।

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं खेल एवं राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में विधायकगण श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू, गुरु खुशवंत साहेब, प्रदेश के शिक्षाविद्, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ  उपस्थित थे।

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