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यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार बाबा चैतन्यानंद की कहानी: आध्यात्मिकता से अपराध तक

बाबा चैतन्यानंद का दोहरा चेहरा : लाल चोले और सफेद कपड़ों के पीछे छिपा यौन शोषण का साम्राज्य, अब बेनकाब हुआ फर्जी ‘आध्यात्मिक साम्राज्य’

उत्तराखंड से लेकर दिल्ली और ओडिशा तक फैले फर्जीवाड़े, यौन शोषण और छलावे की कहानी अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। लड़कियों के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार बाबा चैतन्यानंद दरअसल कभी सफेद पोश साधु बनकर घूमता था तो कभी लाल चोले वाले संत के रूप में भक्तों को भ्रमित करता था। जांच में पता चला है कि उसका हर वेश उसके अपराधों को ढकने का साधन था।

करीब दो दशक पहले चैतन्यानंद ने खुद को ‘पार्थसारथी रुद्र’ नाम से पेश किया और रामकृष्ण मिशन टिहरी से जुड़ गया। वहां रहते हुए उसने खातों में हेराफेरी की और मिशन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई। धोखाधड़ी के आरोपों के चलते उसे 2002 में मिशन से निकाल दिया गया, लेकिन इसके बाद उसने नए नामों और रूपों में अपनी पहचान गढ़नी शुरू की।

2004 में बाबा ने फर्जी एफिडेविट बनवाकर खुद को “लेक्चरर” बताया और दावा किया कि वह AICTE का सदस्य है, 22 किताबें और 122 शोधपत्र लिख चुका है। उसकी बातें सुनकर कई लोग प्रभावित हुए और उसने अपने संगठन रामकृष्ण विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के नाम पर दान और आर्थिक लाभ जुटाने शुरू कर दिए।

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बाबा के दोहरे जीवन का पर्दाफाश तब हुआ जब उसके खिलाफ महिलाओं और छात्राओं के यौन शोषण के मामले सामने आने लगे। पुलिस को अब यह भी जांचना है कि उसने अपने “लाल चोले” और “सफेद पोश” वाले रूप का इस्तेमाल महिलाओं को विश्वास में लेकर शोषण करने में कैसे किया।

रामकृष्ण मिशन ने स्पष्ट किया है कि यह व्यक्ति कभी भी मिशन का अधिकृत संन्यासी नहीं था। उसे केवल “मंत्र दीक्षा” मिली थी, लेकिन न तो वह ब्रह्मचारी था, न संन्यासी। मिशन ने 5 सितंबर 2025 को श्रींगेरी शारदा पीठ को पत्र भेजकर यह जानकारी दी, जिसमें कहा गया कि चैतन्यानंद को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसने झूठे दावे और फर्जी गतिविधियां जारी रखीं।

जांच में यह भी सामने आया है कि बाबा ने प्रधानमंत्री कार्यालय और नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के साथ काम करने का दावा भी झूठा किया था। उसके खिलाफ ओडिशा पुलिस ने भी 2014 में नोटिस जारी किया था।

अब पुलिस और जांच एजेंसियां बाबा के विभिन्न रूपों, फर्जी पहचान और आर्थिक स्रोतों की गहराई से जांच कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि बाबा ने “ज्ञान” और “आध्यात्मिकता” की आड़ में एक यौन और आर्थिक शोषण का जाल बुन रखा था।

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