आज का पंचांग: 1 मई 2026, शुक्रवार
वैशाख शुक्ल पक्ष, चतुर्दशी तिथि | विक्रम संवत 2083
हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त की गणना अनिवार्य मानी जाती है। आज **1 मई 2026** का दिन आध्यात्मिक और व्यावहारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज वैशाख पूर्णिमा की पूर्व संध्या है।
सूर्य और चंद्रमा की गणना
| सूर्योदय | सुबह 05:41 बजे |
|---|---|
| सूर्यास्त | शाम 06:51 बजे |
| चन्द्रोदय | शाम 05:32 बजे |
| चन्द्रास्त | अगली सुबह 05:04 बजे |
| चंद्र राशि | तुला (पूरा दिन और रात) |
| सूर्य राशि | मेष |
पंचांग के मुख्य अंग
| तिथि | चतुर्दशी (शाम 06:14 तक, इसके बाद पूर्णिमा शुरू) |
|---|---|
| नक्षत्र | चित्रा (दोपहर 01:23 तक, इसके बाद स्वाति) |
| योग | सिद्धि (दोपहर 12:45 तक, इसके बाद साध्य) |
| करण | गर (सुबह 06:02 तक), इसके बाद वणिज (शाम 06:14 तक) |
| वार | शुक्रवार |
शुभ मुहूर्त (Auspicious Timing)
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 से दोपहर 12:42 तक (यह दिन का सबसे शुभ समय है)।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:24 से दोपहर 03:15 तक।
अमृत काल: सुबह 07:10 से सुबह 08:45 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:50 से शाम 07:12 तक।
अशुभ समय (राहुकाल और वर्ज्य)
राहुकाल: सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक। (इस समय कोई भी नया काम या बड़ी खरीद न करें)।
यमगण्ड: दोपहर 03:30 से शाम 05:00 बजे तक।
गुलिक काल: सुबह 07:30 से सुबह 09:00 बजे तक।
भद्रा: शाम 06:14 से अगली सुबह 05:12 तक।
आज का विशेष महत्व
आज शुक्रवार का दिन है, जो माता लक्ष्मी को समर्पित है। चंद्रमा के तुला राशि में होने के कारण आज मानसिक शांति और भौतिक सुखों में वृद्धि होगी। वैशाख मास की चतुर्दशी तिथि भगवान नृसिंह की आराधना के लिए भी श्रेष्ठ मानी जाती है।
आज के विशेष उपाय:
- माता लक्ष्मी को कमल का फूल या सफेद मिठाई अर्पित करें।
- तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं।
- “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:” मंत्र का 108 बार जाप करें।
दिशाशूल
आज पश्चिम दिशा में दिशाशूल है। यदि आज आप इस दिशा में यात्रा करने जा रहे हैं, तो घर से दही या शक्कर खाकर निकलें, इससे यात्रा के दोष कम होते हैं।










