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अयोध्या रामलला दर्शन: 18 अक्टूबर (शनिवार) को ब्रह्मांड नायक का भव्य श्रृंगार, भोग और आरती का पूरा शेड्यूल

अयोध्या धाम, 18 अक्टूबर, शनिवार – संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी प्रभु श्री रामलला सरकार का आज, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि (तत्पश्चात 12.25 से पूर्णिमा तिथि), विक्रम संवत 2082 को भव्य और अलौकिक श्रृंगार हुआ। राम मंदिर में हर दिन और मौसम के हिसाब से रामलला को विशेष वस्त्र और भोग अर्पित किए जाते हैं, जिससे उनके दर्शन का अनुभव भक्तों के लिए और भी दिव्य हो जाता है।

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रामलला की दैनिक दिनचर्या और आरती का समय

रामलला की दिनचर्या सुबह उन्हें जगाने के साथ शुरू होती है और रात को शयन के साथ समाप्त होती है। मंदिर ट्रस्ट द्वारा निर्धारित दैनिक दर्शन और आरती का शेड्यूल इस प्रकार है:

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अनुष्ठान (Ritual) समय (Timing) विवरण (Details)
जगाना और स्नान सुबह 6:00 बजे से पहले रामलला को जगाने के साथ पूजन शुरू, उन्हें लेप लगाकर स्नान करवाया जाता है।
पहली आरती (श्रृंगार) सुबह 6:30 बजे दिन की पहली आरती (श्रृंगार आरती) होती है।
दर्शन प्रारंभ सुबह 6:30 बजे के बाद दर्शनार्थियों के लिए कपाट खुल जाते हैं।
दोपहर भोग आरती दोपहर 12:00 बजे रामलला को राज भोग लगाया जाता है और आरती होती है।
संध्या आरती शाम 7:30 बजे शाम की मुख्य आरती होती है।
दर्शन समाप्ति शाम 7:30 बजे तक दर्शनार्थियों के लिए दर्शन का अंतिम समय।
शयन रात 8:30 बजे संध्या आरती के बाद रामलला को शयन (विश्राम) करवाया जाता है।

रामलला के चार समय के भोग और श्रृंगार

रामलला को दिन में चार बार भोग लगाया जाता है, जिसके लिए व्यंजन मंदिर की रसोई में तैयार किए जाते हैं:

  1. बाल भोग: सुबह की शुरुआत मीठे व्यंजनों के साथ।
  2. राज भोग: दोपहर 12 बजे मुख्य भोजन।
  3. संध्या भोग: शाम के समय।
  4. शयन भोग: रात में हल्का भोग शयन से पहले।

रामलला को मौसम के हिसाब से वस्त्र पहनाए जाते हैं। गर्मियों में हल्के और सूती वस्त्र, तो जाड़े में ऊनी वस्त्र और स्वेटर पहनाए जाते हैं। विशेष रूप से, रामलला की फूलों की माला दिल्ली से मंगाई जाती है, जो उनके भव्य श्रृंगार को और भी अलौकिक बनाती है।