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मोदी सरकार ने रेलवे की विश्वसनीयता खत्म की, यात्री सेवा को निजीकरण की ओर धकेला: कांग्रेस

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने पिछले 11 वर्षों में भारतीय रेलवे की यात्री सुविधाओं को बर्बाद कर दिया है। बार-बार ट्रेनों का रद्द होना और निजीकरण की साजिश पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

मोदी सरकार ने 11 सालों में रेल यात्री सुविधा को बर्बाद कर दिया – कांग्रेस

📍 रायपुर, 10 जून 2025 | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि पिछले 11 वर्षों में रेल यात्री सुविधाओं को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने बयान जारी कर कहा कि मोदी सरकार के शासनकाल में भारतीय रेलवे की विश्वसनीयता और सुविधाएं लगातार गिरती गईं और अब यह हालत हो गई है कि देश में शायद ही कोई ट्रेन समय पर चलती हो

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उन्होंने कहा कि गर्मी की छुट्टियों में हजारों लोग महीनों पहले टिकट बुक कराते हैं, लेकिन यात्रा के दिन ट्रेनों को बिना किसी ठोस कारण के रद्द कर दिया जाता है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी होती है।


🎯 रेलवे को निजीकरण की दिशा में धकेलने का षड्यंत्र: कांग्रेस

शुक्ला ने कहा कि मोदी सरकार की नीयत रेलवे को आम जनता से छीनकर निजी उद्योगपतियों के हाथों सौंपने की है। यात्री ट्रेनों को बार-बार रद्द करके, लोगों को रेलवे से हतोत्साहित किया जा रहा है ताकि रेल यातायात को सिर्फ माल ढुलाई तक सीमित कर दिया जाए।

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उन्होंने कहा,

भारतीय रेल वर्षों से आम जनता का भरोसेमंद और सस्ता साधन रहा है, लेकिन अब यह विश्वसनीयता खतरे में है। मोदी सरकार रेलवे को केवल मुनाफे का जरिया मानती है, न कि जन सेवा का।


⚠️ छत्तीसगढ़ विरोधी रवैये का आरोप

शुक्ला ने दावा किया कि पिछले कुछ सालों से छत्तीसगढ़ की ट्रेनों को बिना ठोस कारण रद्द किया जाता है, जिससे प्रदेश के नागरिकों को यातायात के क्षेत्र में भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने इसे मोदी सरकार की तानाशाही और छत्तीसगढ़ विरोधी सोच करार दिया।


🛤️ रेल सेवाओं में गिरावट के आंकड़े और प्रभाव

  • ट्रेनों की लेटलतीफी: घंटों देरी अब सामान्य बात बन गई है

  • ट्रेनों का रद्द होना: कोयला आपूर्ति या तकनीकी बहाने बनाकर अचानक रद्दीकरण

  • विकल्पों का अभाव: यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं

  • मुनाफे की ओर झुकाव: यात्री ट्रेनों के बजाय माल गाड़ियों पर ज़ोर


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