योगी सरकार का ऊर्जा मॉडल: बिना दर बढ़ाए 6 साल और 54,000 युवाओं को रोजगार

उत्तर प्रदेश में लगातार छठे साल नहीं बढ़ीं बिजली दरें, सौर ऊर्जा में रिकॉर्ड प्रगति — योगी सरकार ने पेश किया ऊर्जा प्रबंधन का ‘यूपी मॉडल’

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बिजली टैरिफ में कोई बढ़ोतरी न करके लगातार छठे वर्ष भी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सुधारों, तकनीकी उन्नयन और राजस्व प्रबंधन के कारण यूपी देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां छह वर्षों से बिजली दरें स्थिर हैं। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में बढ़ती लागत के कारण बिजली दरें लगातार ऊपर जा रही हैं।

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ग्रीन एनर्जी टैरिफ में भी राहत

बिजली नियामक आयोग द्वारा जारी प्रमुख आंकड़ों के अनुसार, ग्रीन एनर्जी टैरिफ में भी कमी की गई है—

  • HV उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ ₹0.36 से घटाकर ₹0.34 प्रति यूनिट
  • LV उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ ₹0.17 प्रति यूनिट

यह कदम नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने को बढ़ावा देगा और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालेगा।

डिस्ट्रीब्यूशन लॉस: पूर्वांचल सबसे कमजोर, मध्यांचल-पश्चिमांचल ने लक्ष्य हासिल किया

ऊर्जा वितरण कंपनियों में—

  • मध्यांचल और पश्चिमांचल डिस्कॉम ने FY 24-25 का लक्ष्य हासिल कर लिया
  • पूर्वांचल डिस्कॉम का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा

वहीं आयोग ने—

  • FY 2023-24 के लिए ₹85,082.83 करोड़ का ARR और ₹1,246.55 करोड़ का रेगुलेटरी सरप्लस,
  • FY 2025-26 के लिए ₹1,10,993.33 करोड़ का ARR और 13.35% डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को मंजूरी दी है।
    राज्य सरकार इस वर्ष ₹17,100 करोड़ की सब्सिडी देगी।

सौर ऊर्जा में यूपी देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य बना

उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा का विस्तार तेज़ी से हुआ है।

  • राज्य में 13,46,040 आवेदन सौर योजना के तहत प्राप्त हुए।
  • 18 महीनों में 2,81,769 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए।
  • सिर्फ 4.5 महीनों में रिकॉर्ड 1,30,000 इंस्टॉलेशन पूरे हुए।

इन आंकड़ों ने यूपी को सौर ऊर्जा उत्पादन में महाराष्ट्र और गुजरात के बाद तीसरा स्थान दिया है।

54,000 युवाओं को मिला रोजगार

सौर ऊर्जा के विस्तार ने—

  • मॉड्यूल निर्माण
  • इन्वर्टर उत्पादन
  • वायरिंग
  • लॉजिस्टिक्स
  • इंस्टॉलेशन और सप्लाई चेन

जैसे क्षेत्रों में 54 हज़ार से अधिक युवाओं को सीधे रोजगार दिया है। देशभर में भी लाखों नौकरियां सृजित हुई हैं।

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स्थिर बिजली दरें: उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहत

छह वर्षों से बिजली दरें स्थिर रहने से—

  • घरेलू उपभोक्ताओं का बजट सुरक्षित रहा
  • किसानों की सिंचाई लागत पर रोक लगी
  • छोटे व्यापारियों पर आर्थिक दबाव कम हुआ
  • उद्योगों की उत्पादन लागत स्थिर बनी रही

यूपी का यह मॉडल निवेश माहौल को मजबूत करता है। ऊर्जा की स्थिर कीमतें उद्योगों को आकर्षित करती हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज देश के तेजी से उभरते औद्योगिक हब्स में से एक बन चुका है।


ऊर्जा अवसंरचना में व्यापक सुधार

सरकार द्वारा किए गए सुधारों में—

  • नई विद्युत उत्पादन परियोजनाएं
  • ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार
  • पुराने तारों और ट्रांसफॉर्मरों का बदलना
  • ओवरलोडिंग नियंत्रण
  • भूमिगत केबलिंग
  • स्मार्ट मीटरों का बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन

शामिल हैं। इन सुधारों ने बिजली आपूर्ति को विश्वसनीय बनाया और लाइन लॉस घटाया। स्मार्ट मीटरिंग से बिलिंग सिस्टम पारदर्शी हुआ और राजस्व बढ़ा।


राजस्व अधिशेष: अनुशासित बिजली प्रबंधन का परिणाम

यूपी की बिजली वितरण कंपनियां पिछले वर्षों में ₹15,000 करोड़ से अधिक का राजस्व अधिशेष अर्जित कर चुकी हैं। यह—

  • बिजली चोरी पर नियंत्रण
  • तकनीक आधारित बिलिंग
  • समय पर मेंटेनेंस
  • संरचनात्मक सुधार
    का नतीजा है।

जनता पर आर्थिक बोझ न डालने का संकल्प

सीएम योगी आदित्यनाथ की साफ रणनीति है कि—

“जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े, घरेलू बजट सुरक्षित रहे और उद्योगों के लिए ऊर्जा विश्वसनीय और किफायती बनी रहे।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में यूपी ने ऊर्जा क्षेत्र में ऐसा मॉडल पेश किया है जिसे कई राज्य अपनाने का प्रयास कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश ने यह साबित किया है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शी नीति और वित्तीय अनुशासन मिलकर जनता को वास्तविक राहत दे सकते हैं।
स्थिर बिजली दरें, सौर ऊर्जा में रिकॉर्ड प्रगति और मजबूत अवसंरचना—
यूपी को ऊर्जा प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल बना रही हैं।