Advertisement

राजधानी के ‘मंत्री वाले बंगले में मरीजों का डेरा’:गोपाल भार्गव के सरकारी आवास में बीमार बच्चों के लिए बना प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम

प्रदेश खबर स्टेट हेड प्रवीण कुमार दुबे

एमपी में कई ऐसे नेता हैं जो किसी पद पर नहीं हैं फिर भी मंत्रियों वाले सरकारी बंगलों पर कब्जा जमाए हुए हैं। वहीं भोपाल में ही मंत्रियों वाला एक ऐसा बंगला है जो मरीजों का ठिकाना बना हुआ है।

राजधानी के 74 बंगला क्षेत्र के बंगला नंबर बी-1 जो कि सागर जिले की रहली से विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का सरकारी आवास है। मंत्री के तौर पर भार्गव को आवंटित हुआ यह घर अब मरीजों का घर बना हुआ है।

बच्चों के लिए प्ले स्कूल की तरह बनाया गेस्ट रूम गोपाल भार्गव की पुत्रवधु शिल्पी भार्गव ने बीमार बच्चों विशेषकर जिन्हें दिल से जुड़ी बीमारियां हैं उनके ठहरने के लिए एक खास गेस्ट रूम प्ले स्कूल की तर्ज पर तैयार कराया है। इस किड्स गेस्ट रूम में बच्चों के लिए झूला, खिलौने से लेकर बच्चों के लिए स्पेशल बेड की व्यवस्था की है। बीमार बच्चों का मूड ठीक रखने के लिए दीवारों पर कार्टून और आकर्षक पेंटिंग्स बनवाई हैं।

बीमार बच्चों के लिए प्ले स्कूल की तरह बनाया गया गेस्ट रूम
बीमार बच्चों के लिए प्ले स्कूल की तरह बनाया गया गेस्ट रूम

 

मरीजों के लिए 50 बिस्तर गोपाल भार्गव के बंगले में बीमार मरीजों के लिए 50 बिस्तरों के तीन हॉल रेनोवेट कराए गए हैं। इस बंगले में मरीजों के रुकने से लेकर आने-जाने के लिए एम्बुलेंस, भोजन और राजधानी के अस्पतालों में इलाज कराने के लिए कर्मचारी मौजूद रहते हैं।

तीन हॉल में मरीजों के लिए 50 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है।
तीन हॉल में मरीजों के लिए 50 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है।

 

मरीजों के लिए खास मेन्यू भार्गव के बंगले में इलाज के पहले और बाद में रुकने वाले मरीजों के लिए सुबह नाश्ते, चाय के साथ दो टाइम फ्री भोजन की व्यवस्था है। इसे गोपाल जी की रसोई नाम दिया है। इस किचन में अलग-अलग दिनों में मरीजों के लिए मलाई कोफ्ता, मटर पनीर, पालक पनीर, शाही पनीर, बैगन भर्ता, बैगन मसाला, सेव टमाटर, आलू टमाटर, आलू पालक, भिंडी, आलू मैथी की भाजी, कढ़ी-पकौड़ा, बूंदी रायता, दाल तड़का, दाल फ्राइ, दाल मखनी, मूंग दाल, दलिया, जीरा राइस, हलवा, खिचड़ी, गरम रोटियों के साथ अचार, पापड़, चटनी और सलाद परोसा जाता है।

मरीजों के लिए भोजन शाला।
मरीजों के लिए भोजन शाला।

 

हर रविवार को तीन एम्बुलेंस से भोपाल पहुंचते हैं मरीज गोपाल भार्गव के गृह नगर गढ़ाकोटा स्थित निज निवास गणनायक से तीन एम्बुलेंस हर रविवार को भोपाल के लिए मरीजों को लेकर रवाना होती हैं। जिन मरीजों को भोपाल में इलाज के लिए आना होता है वे गढ़ाकोटा आवास पर रजिस्ट्रेशन कराते हैं। रविवार सुबह 10 बजे तक गढ़ाकोटा पहुंचने के बाद मरीजों को एम्बुलेंस से भोपाल रवाना कर दिया जाता है।

एक मरीज का हालचाल पूछते अभिषेक भार्गव।
एक मरीज का हालचाल पूछते अभिषेक भार्गव।

भोपाल में भार्गव के बंगले पर पहुंचते ही कर्मचारी मरीजों का पंजीयन करते हैं। इसमें मरीज का आधार कार्ड, बीमारी की जानकारी लेकर मरीज से इलाज के लिए अस्पताल का नाम पूछते हैं। फिर जांचें कराकर इलाज के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता है।

आने-जाने, रुकने-खाने और इलाज सब फ्री गोपाल भार्गव के क्षेत्र के मरीजों को गढ़ाकोटा, रहली से भोपाल तक आने-जाने की व्यवस्था फ्री है। भोपाल में रुकने और भोजन भी निशुल्क है। इलाज की व्यवस्था आयुष्मान कार्ड या मुख्यमंत्री सहायता से कराई जाती है यदि इन माध्यमों से भी इलाज में मदद नहीं मिल पाई तो गोपाल भार्गव अपने निजी फंड से इलाज की व्यवस्था करते हैं।

गोपाल भार्गव की ओर से मरीजों को भोपाल तक आने-जाने के लिए फ्री एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है।
गोपाल भार्गव की ओर से मरीजों को भोपाल तक आने-जाने के लिए फ्री एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है।

अभिषेक भार्गव ने मरीजों के लिए की गई व्यवस्थाओं को लेकर  जानकारी दी : प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम बनाने के पीछे की क्या सोच है?

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (4)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (3)
sjjj
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)

अभिषेक भार्गव: इसके पीछे मेरी पत्नी शिल्पी भार्गव की सोच है। वे ही वेदिका फाउंडेशन का संचालन करती हैं। उनकी सोच ऐसी थी कि जो बीमारी से ग्रस्त बच्चे होते हैं उनमें चिडचिड़ापन रहता है। जब बच्चे अनजान माहौल में जाते हैं तो असहज हो जाते हैं। शिल्पी भी एक मां हैं इसलिए बच्चों के मन को वे भी समझती हैं। उन्होंने इसीलिए यह एक कॉन्सेप्ट बनाया कि जब बच्चे इलाज के लिए आएं तो उन्हें ऐसा माहौल दें जहां प्ले स्कूल की तरह खिलौने, झूले हों। ताकि बच्चे यहां आकर न डरें, उन्हें अनुकूल वातावरण देने की कोशिश है।

 इस बंगले में रेनोवेशन का काम चल रहा है, काफी बदला सा लग रहा है? अभिषेक भार्गव: क्षेत्र से यहां पर बहुत सारे मरीज इलाज करवाने आते हैं। उनके लिए तमाम व्यवस्थाएं देने का काम हम लोग 25 वर्षों से कर रहे हैं। साल-दर-साल उसमें बेहतरी करने का प्रयास करते हैं। इसे और रेनोवेट किया है। ज्यादा से ज्यादा मरीज यहां पर रुक सकें इसके लिए व्यवस्थाएं बढ़ा रहे हैं।

2004 में जब गोपाल भार्गव मंत्री बने तब से यहां यह व्यवस्था भोपाल में हम लोग चला रहे हैं। पहले जब मरीज यहां पर आते थे तो उनके रुकने, खाने-पीने की समस्या रहती थी। ये भी जानकारी नहीं रहती थी कि इलाज कहां पर कराएं। उनके रूकने से लेकर आने-जाने, भोजन और इलाज की व्यवस्था हम लोग करते हैं।

कई मरीज आर्थिक अभाव के कारण इलाज नहीं करवा पाते। रविवार को गढ़ाकोटा निवास से मरीजों की संख्या के अनुसार एंबुलेंस चलतीं हैं वहां ये भोपाल तक निशुल्क एंबुलेंस आती है। भोपाल के बडे़ अस्पताल जिनमें कई प्रायवेट अस्पतालों में हम लोग निशुल्क इलाज कराते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आने वाले गरीब स्टूडेंट्स को भी रूकने की व्यवस्था की गई है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आने वाले गरीब स्टूडेंट्स को भी रूकने की व्यवस्था की गई है।

 

 यदि किसी मरीज की मृत्यु हो जाए तो उसके शव को पहुंचाने के लिए भी व्यवस्था है? अभिषेक भार्गव: कभी ऐसा होता है कि किसी मरीज की मृत्यु हो जाए तो हमारे वाहन से ही उनके शव को घर तक पहुंचाते हैं। “जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी”… हमारे और भी प्रकल्प हैं। जैसे किसी की हमारे क्षेत्र में जब मृत्यु हो जाती है तो बरमान घाट पर मां नर्मदा में अस्थि विसर्जन होता है। अस्थि विसर्जन के लिए भी हमारी ओर से यह व्यवस्था बनाई है कि अस्थि विसर्जन के लिए लोग फोन पर हमारे कार्यालय में संपर्क करते हैं तो उनके आने-जाने की व्यवस्था हमारी तरफ से करते हैं। बरमान घाट पर रहली क्षेत्र के लोगों के लिए अलग पंडित जी, नाई की व्यवस्था है।

नर्मदा जी में अस्थि विसर्जन के लिए नाव की व्यवस्था भी है। ये सारी व्यवस्थाएं भैया गोपाल भार्गव अपने क्षेत्र में करते आ रहे हैं। तेरहवीं संस्कार में सहयोग हो या बेटियों के कन्यादान में मदद करनी हो यथायोग्य सहायता गोपाल जी करते हैं।

बंगले में पीपल के पेड के नीचे गणेश जी का मंदिर भी बना हुआ है।
बंगले में पीपल के पेड के नीचे गणेश जी का मंदिर भी बना हुआ है।

 मंत्री बनने के बाद कुछ असर आया क्या?

अभिषेक भार्गव: जब सरकार में मंत्री थे तो लोग कहते हैं कि मंत्रियों के यहां ऐसी चीजें होती रहती हैं। लेकिन अब दो साल से हम सरकार में मंत्री नहीं हैं लेकिन, कोई प्रकल्प बंद नहीं हुआ। क्योंकि ये व्यवस्थाएं हम शासकीय रूप से नहीं करते बल्कि निजी स्तर से करते हैं।

जैसे यह सरकारी बंगला है तो यहां पर सिविल का काम जरूर सरकार ने कराया है लेकिन, बाकी के जो भी काम हैं साजो सामान है या मरीजों के लिए जो व्यवस्थाएं हैं वो सारी निजी खर्चे से होती हैं। ये एंबुलेंस भी निजी खर्चे पर चलतीं हैं। हमारे पिताजी का ध्येय वाक्य है निरंतर कर्म, यही मेरा धर्म।

बंगले की दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग्स बनाई गई हैं।
बंगले की दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग्स बनाई गई हैं।

आपकी ये व्यवस्थाएं सिर्फ रहली विधानसभा के लोगों के लिए हैं क्या दूसरे क्षेत्रों के लोग भी आते हैं?

अभिषेक भार्गव: हम लोग बाध्यता इसलिए रखते हैं क्योंकि बहुत प्रयास के बाद भी यहां पर अधिकतम सौ लोगों के रूकने की व्यवस्था हो पाती है। सोचिए एक घर में सौ लोग हों तो उनके लिए होटल या आश्रम चाहिए होगा। बहुत ज्यादा भीड न हो इसलिए बाध्यता रखते हैं। कई बार क्षेत्र के रिश्तेदार हमारे क्षेत्र के किसी व्यक्ति को लेकर आ जाते हैं तो उनके लिए पिताजी मना नहीं करते। वो लोग भी यहां पर रुकते हैं। कोई गरीब ऐसा है जिसके पास कोई व्यवस्था नहीं हैं उसके लिए भी यहां व्यवस्था करते हैं। कुल मिलाकर 90% यहां पर क्षेत्र और 10% बाहर के लोग रहते हैं।बच्चों में भी क्या क्षेत्र के

मरीजों को ही प्राथमिकता रहती है? अभिषेक भार्गव: वेदिका फाउंडेशन में हमने क्षेत्र की बाध्यता नहीं रखी। ह्रदय रोग से संबंधित बीमारियों से ग्रस्त बच्चा रहली नहीं पूरे भारत देश ही नहीं दुनिया का कोई बच्चा संपर्क करता है तो उसके आने-जाने और इलाज सर्जरी की पूरी व्यवस्था हम करते हैं। बंगले में मरीजों के लिए

व्यवस्थाएं कर दीं आपके परिवार का कौन यहां रहता है? अभिषेक भार्गव: मजेदार बात ये है कि हमारे परिवार का कोई यहां नहीं रहता। पिताजी को जब काम होता है तब वे यहां आते हैं। बाकी मरीजों की देखरेख में लगा रहता स्टाफ यहां रहता है। जो बच्चे एग्जाम देने के लिए भोपाल आते हैं उनके लिए भी यहां व्यवस्था रहती है। यहां पर एक हॉल, एक पिताजी का पूजा कक्ष, शयन कक्ष और एक ऑफिस…बस ये निजी हमारे लिए हैं बाकी पूरा बंगला मरीजों और क्षेत्र के लोगों के लिए है।

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.16.05