Budget 2026 पर अखिलेश यादव का हमला: बोले– ‘भाजपाई बजट से शेयर बाजार धड़ाम, आम जनता को कोई राहत नहीं’

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बजट के बाद शेयर बाजार में आई गिरावट को लेकर कहा कि “आ गया भाजपाई बजट का परिणाम, शेयर मार्केट हुआ धड़ाम।”

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लगातार पोस्ट कर बजट को निराशाजनक और निंदनीय बताया और आरोप लगाया कि यह बजट आम जनता के लिए नहीं बल्कि चुनिंदा 5 प्रतिशत लोगों के हित में तैयार किया गया है।

“भाजपा का हर बजट 1/20 का बजट”

सपा अध्यक्ष ने कहा—

“हम तो भाजपा के हर बजट को 1/20 (एक बंटे बीस) का बजट मानते हैं, क्योंकि यह केवल 5% लोगों के लिए होता है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का बजट अपने लोगों को फायदा पहुंचाने और कमीशन सेट करने का माध्यम बन गया है।

शेयर बाजार को लेकर तंज

अखिलेश यादव ने कहा—

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)
  • सवाल यह नहीं कि शेयर बाजार रविवार को खुलेगा
  • सवाल यह है कि और कितना गिरेगा
  • जब भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं, तो उसके बजट से क्या उम्मीद की जाए

बजट 2026 पर मुख्य आपत्तियां

अखिलेश यादव ने बजट 2026 को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए—

  • इस बजट में न आम जनता का ज़िक्र है, न फ़िक्र
  • महंगाई बेतहाशा बढ़ने के बावजूद टैक्स में कोई राहत नहीं, जिसे उन्होंने ‘टैक्स-शोषण’ बताया
  • अमीरों के कारोबार और घूमने-फिरने पर छूट, लेकिन बेरोजगार युवाओं के लिए कुछ नहीं
  • मध्यम वर्ग खुद को ठगा महसूस कर रहा है
  • शोषित, वंचित और गरीब व्यक्ति की स्थिति और बदतर हुई है
  • सामाजिक सुरक्षा केवल शाब्दिक औपचारिकता बनकर रह गई है
  • किसान, मजदूर, श्रमिक, छोटे दुकानदार राहत को दूरबीन लेकर भी नहीं ढूंढ पा रहे

“उम्मीदों की थाली खाली”

सपा प्रमुख ने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई से जूझ रहे लोगों की उम्मीदों की थाली खाली रह गई है। यह बजट न रोजगार देता है, न सुरक्षा और न ही राहत।

अंत में उन्होंने बजट को एक बार फिर निराशाजनक और निंदनीय करार दिया।