SIR प्रक्रिया पर ममता बनर्जी का हमला: ‘लोकतंत्र पर असंवैधानिक हमला, बंगाल को निशाना बनाया जा रहा’

नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर केंद्र और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित बंगा भवन में SIR प्रक्रिया से प्रभावित लोगों से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि यह पूरी कवायद लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ और अमानवीय है।

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ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है, और ऐसे नागरिकों से भी जो जीवित होते हुए भी मतदाता सूची में ‘मृत’ घोषित कर दिए गए। उन्होंने कहा कि इन लोगों की गवाही बेहद पीड़ादायक है और लोकतंत्र में जनता पर ऐसा अत्याचार अक्षम्य है।

महिलाओं, बुज़ुर्गों और मज़दूरों को किया गया प्रभावित

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से

  • महिलाएं,
  • वरिष्ठ नागरिक,
  • प्रवासी श्रमिक,
  • दिहाड़ी मजदूर,
  • मरीज

सहित समाज के कमजोर तबकों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

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चुनाव कानून के उल्लंघन का आरोप

ममता बनर्जी ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) का उल्लंघन करते हुए, बिना किसी वैधानिक अधिकार के, बंगाल में अभूतपूर्व संख्या में माइक्रो-ऑब्ज़र्वर्स तैनात किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन माइक्रो-ऑब्ज़र्वर्स के जरिए ERO और ARO के अधिकार छीने जा रहे हैं

उन्होंने यह भी कहा कि

  • नियमों को प्रक्रिया के बीच बदला जा रहा है,
  • तकनीक का दुरुपयोग किया जा रहा है,
  • और प्रक्रियाओं को हथियार बनाकर
    चुनिंदा तौर पर बंगाल और बंगाल के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है

‘भाजपा राजनीतिक रूप से विफल हो चुकी है’

मुख्यमंत्री ने तीखे शब्दों में कहा कि भाजपा जनता का भरोसा जीतने में असफल रही है और राजनीतिक रूप से विफल होने के बाद अब वह एक संवैधानिक संस्था का दुरुपयोग कर रही है, ताकि वह वह हासिल कर सके जो लोकतांत्रिक तरीके से संभव नहीं हो पाया।

संवैधानिक लड़ाई का ऐलान

ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि भाजपा की यह साजिश तृणमूल कांग्रेस और बंगाल के लोगों के संकल्प को और मजबूत करेगी। उन्होंने कहा,

“हम लोकतंत्र पर इस हमले के खिलाफ हर संवैधानिक माध्यम से लड़ेंगे। हम हर नागरिक के मतदान अधिकार की रक्षा करेंगे, बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान की रक्षा करेंगे और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की पवित्रता बनाए रखेंगे।”