
खाद संकट का खतरा? खाड़ी देशों में तनाव और ‘Strait of Hormuz’ बंद होने से भारत की बढ़ी चिंता
लोकसभा में मनीष तिवारी ने उठाया फर्टिलाइजर आयात का मुद्दा। कतर में प्लांट बंद और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव से भारत की 49% नाइट्रोजन फर्टिलाइजर सप्लाई पर खतरा। जानिए क्या है पूरा मामला।
खाड़ी संकट की आग और भारतीय किसान: क्या ‘Strait of Hormuz’ की नाकाबंदी बिगाड़ेगी खरीफ का गणित?
लोकसभा में मनीष तिवारी ने दागे सवाल, सरकार ने ‘Priority Sector’ आदेश से दिया जवाब – जानिए क्या है असल स्थिति।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष ने अब भारतीय रसोई और खेतों की चिंता बढ़ा दी है। लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसद **मनीष तिवारी** ने एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि कैसे भारत का 11 बिलियन डॉलर का फर्टिलाइजर आयात संकट में है क्योंकि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, **स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz)**, पिछले चार हफ्तों से लगभग बंद पड़ा है।
1. संकट की गहराई: क्यों डरा रहा है ‘Strait of Hormuz’?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह संकरा समुद्री रास्ता है जहाँ से दुनिया का 20% तेल और 30% फर्टिलाइजर ट्रेड गुजरता है। युद्ध के कारण यहाँ जहाजों की आवाजाही 22 मिलियन बैरल से घटकर मात्र 0.5 मिलियन बैरल रह गई है। लगभग 3,000 मालवाहक जहाज ओमान और फारस की खाड़ी में खड़े हैं, जिनमें भारत आने वाला यूरिया और डीएपी (DAP) भी शामिल है।
2. सरकार का जवाब: ‘Natural Gas Order 2026’
विपक्ष के हमलों के बीच, मोदी सरकार ने **’Natural Gas (Supply Regulation) Order 2026’** जारी कर एक मास्टरस्ट्रोक खेला है। इस आदेश के तहत खाद कारखानों को **’Priority Sector-2’** में रखा गया है।
- गैस की गारंटी: खाद बनाने वाले प्लांट्स को अब 70% गैस सप्लाई की कानूनी गारंटी दी गई है।
- उत्पादन में उछाल: गैस सप्लाई बढ़ने से देश में रोजाना यूरिया उत्पादन 54,500 टन से बढ़कर 67,000 टन पहुँच गया है।
3. स्टॉक की स्थिति: घबराने की जरूरत है या नहीं?
सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों (मार्च 2026) के अनुसार, भारत ने खरीफ सीजन के लिए पहले ही बफर स्टॉक तैयार कर लिया है। पिछले साल के मुकाबले इस बार स्टॉक की स्थिति काफी बेहतर है:
| फर्टिलाइजर का प्रकार | मार्च 2025 स्टॉक (LMT) | मार्च 2026 स्टॉक (LMT) | वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|
| यूरिया (Urea) | 50.90 | 61.51 | +20.8% |
| डीएपी (DAP) | 12.50 | 24.24 | +100% (दोगुना) |
| कुल स्टॉक | 131.79 | 180.12 | +36.6% |
4. छत्तीसगढ़ और सरगुजा के किसानों पर असर
प्रदेश खबर की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ के **सरगुजा, बलरामपुर और सूरजपुर** जिलों में फिलहाल खाद की कोई किल्लत नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरिया की कीमतें 30-40% तक बढ़ गई हैं, जिसका वित्तीय बोझ सरकार सब्सिडी के जरिए खुद वहन कर रही है। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि किसानों को पुरानी कीमतों पर ही खाद मिलती रहेगी।
5. आगे की राह: वैकल्पिक बाजार की तलाश
खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत अब **रूस, मोरक्को और जॉर्डन** जैसे देशों के साथ नए समझौते कर रहा है। साथ ही, घरेलू स्तर पर नैनो यूरिया के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि भविष्य में विदेशी सप्लाई चेन टूटने पर भी खेती पर कोई आंच न आए।
संपादकीय टिप्पणी: सरकार ने स्टॉक तो जमा कर लिया है, लेकिन यदि युद्ध 3 महीने से ज्यादा खिंचता है, तो ‘Replenishment Cost’ (नया स्टॉक खरीदने की लागत) भारत के बजट पर ₹25,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।












