महतारी वंदन योजना बनी खुशहाली का आधार: बलरामपुर की मानकुंवर की प्रेरक कहानी






Mahtari Vandan Yojana: Success Story | Pradesh Khabar

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महतारी वंदन योजना बनी खुशहाली का आधार: बलरामपुर की मानकुंवर के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव, खेती से लेकर घर तक मिली मजबूती

संवाददाता: आशीष सिन्हा | संपादक, प्रदेश खबर न्यूज़ नेटवर्क
27 मार्च, 2026 | बलरामपुर-रामानुजगंज (छ.ग.)

बलरामपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ केवल एक आर्थिक सहायता मात्र नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की लाखों महिलाओं के स्वावलंबन और आत्मविश्वास का प्रतीक बनती जा रही है। बलरामपुर जिले के विकासखंड वाड्रफनगर के अंतर्गत आने वाले ग्राम रघुनाथनगर की निवासी **श्रीमती मानकुंवर** के जीवन की कहानी इस योजना की सफलता का एक जीवंत उदाहरण है।

“पहले घर की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब हर महीने मिलने वाले 1000 रुपये मेरे लिए एक मजबूत सहारा बन गए हैं।” – श्रीमती मानकुंवर

आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह

श्रीमती मानकुंवर बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के शुरू होने से पहले उन्हें दैनिक खर्चों और बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। मध्यम वर्गीय ग्रामीण परिवारों में अक्सर नकदी की किल्लत रहती है, लेकिन अब हर महीने नियमित रूप से मिलने वाली सहायता राशि ने उनकी इस समस्या का समाधान कर दिया है।

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योजना का बहुआयामी प्रभाव:

  • घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति: राशन, दैनिक खर्च और बच्चों की छोटी-मोटी जरूरतों के लिए अब मानकुंवर को सोचना नहीं पड़ता।
  • खेती-किसानी में संबल: यह राशि खेती के समय बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्रियों के लिए संजीवनी का काम कर रही है।
  • आत्मविश्वास में वृद्धि: आर्थिक रूप से सशक्त होने के बाद अब वे परिवार के निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

खेती में सुधार और बेहतर उत्पादन की उम्मीद

एक ग्रामीण गृहणी होने के नाते मानकुंवर खेती के कार्यों में भी हाथ बटाती हैं। उन्होंने इस योजना से मिली राशि का उपयोग अपने खेतों की देखभाल बेहतर तरीके से करने के लिए किया है। उचित समय पर खाद और गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने से उनके खेतों में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जागी है, जो अंततः उनके परिवार की आय में वृद्धि करेगा।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की प्रत्येक विवाहित महिला आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सके। मानकुंवर जैसी हजारों महिलाएं अब पहले की तुलना में अधिक सशक्त महसूस कर रही हैं। बलरामपुर जिले के रघुनाथनगर से निकली यह प्रेरक कहानी प्रदेश की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

यह योजना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि जब महिलाओं के हाथ में सीधे तौर पर आर्थिक संसाधन पहुँचते हैं, तो उसका लाभ पूरे परिवार और अंततः समाज को मिलता है।