1857 की क्रांति स्वाभिमान और राष्ट्र चेतना का अमर अध्याय: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वर्षगांठ के अवसर पर देश की स्वाधीनता के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि 1857 का संग्राम भारत के स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की वह मशाल है, जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की नींव रखी थी।
— डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि मेरठ से उठी क्रांति की चिंगारी ने पूरे देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एकजुटता का शंखनाद किया था। हमारे क्रांतिकारियों ने जिस वीरता के साथ विदेशी शासन को चुनौती दी, वह इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
डॉ. यादव ने कहा कि आज का स्वतंत्र भारत उन्हीं वीर सेनानियों के संघर्षों का परिणाम है। हमें उनके बलिदान को याद रखते हुए राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक मजबूत करना चाहिए। उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे स्वाधीनता संग्राम के इतिहास से गौरव की प्रेरणा लें और देश की अखंडता के लिए समर्पित रहें।









