मध्यप्रदेश में श्रमिकों के जीवन का ‘कायाकल्प’: जन्म से वृद्धावस्था तक सुरक्षा की गारंटी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। श्रम विभाग के माध्यम से संचालित कल्याणकारी योजनाओं ने अब श्रमिकों को हर कदम पर आर्थिक संबल प्रदान करना शुरू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की संपूर्ण गारंटी मिले।
प्रसूति सहायता
बेटी विवाह अनुदान
आयुष्मान इलाज
ई-स्कूटर अनुदान
विदेश में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रोत्साहन
श्रमिकों के बच्चों को वैश्विक अवसर प्रदान करने के लिए ‘विदेश अध्ययन योजना’ के तहत 40 हजार डॉलर तक की सहायता और 10 हजार डॉलर का वार्षिक निर्वाह भत्ता दिया जा रहा है। साथ ही, सिविल सेवा (UPSC/MPPSC) की तैयारी करने वाले प्रतिभावान बच्चों को 50 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। सरकार चाहती है कि आर्थिक तंगी किसी भी बच्चे के सपनों की बाधा न बने।
योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने के लिए ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर ‘श्री’ अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक श्रमिकों का पंजीयन सुनिश्चित करना है ताकि कोई भी पेंशन या स्वास्थ्य लाभ से वंचित न रहे।
‘श्रमणा’ योजना: महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा
महिला श्रमिकों के लिए ‘श्रमणा’ पहल के माध्यम से कार्यस्थलों को सुरक्षित और सुविधायुक्त बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत पेयजल, विश्राम स्थल और बच्चों की देखभाल (चाइल्डकेयर) जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि महिलाएं सम्मानजनक वातावरण में काम कर सकें।
आवास और उपकरण के लिए सीधी मदद
आवास निर्माण के लिए एक लाख रुपये तक की मदद और कार्य के लिए जरूरी औजारों के लिए अनुदान राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों (DBT) में भेजी जा रही है। पात्र श्रमिक ‘श्रम सेवा पोर्टल’ या पास के ‘लोक सेवा केंद्र’ के माध्यम से इन सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।








