अम्बिकापुर: साइबर सुरक्षा और बैंक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और बैंक प्रबंधकों की महत्वपूर्ण बैठक
अम्बिकापुर, सरगुजा: डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.), पुलिस अधीक्षक सरगुजा के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में, नगर पुलिस अधीक्षक अम्बिकापुर राहुल बंसल द्वारा शहर के विभिन्न बैंक शाखा प्रबंधकों के साथ एक उच्च-स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई, धन की बहाली और बैंक शाखाओं की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाना था।
बैठक का मुख्य उद्देश्य: NCRP-CFCFRMS और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP)
बैठक के दौरान, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र’ द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेष रूप से NCRP-CFCFRMS (National Cybercrime Reporting Portal – Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System) के तहत अभिरक्षा, धन की बहाली और शिकायत निवारण हेतु निर्धारित ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) को समझने और लागू करने पर जोर दिया गया।
राहुल बंसल ने बैंक प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी खाता धारक का खाता फ्रीज या लीन (Lien) किया जाता है, तो उसे अनफ्रीज करने की प्रक्रिया पूरी तरह से SOP के अनुसार होनी चाहिए। इसके अलावा, साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों के पैसे की वापसी की प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाने पर विशेष चर्चा हुई ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
बैंक शाखाओं के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश
बैठक में बैंक परिसरों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए, जिनका पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है:
- सुरक्षाकर्मी: सभी बैंक शाखाओं में अनिवार्य रूप से प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
- CCTV सर्विलांस: उच्च गुणवत्ता और पर्याप्त स्टोरेज क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरों का उपयोग किया जाए, जो बैंक के हर कोने और एंगल को कवर करें।
- अलार्म सिस्टम: शाखा में साइरन (Siren) को हमेशा सक्रिय स्थिति में रखा जाए।
- सुरक्षा डेमो: सुरक्षाकर्मियों और बैंक स्टाफ को सतर्क रखने के लिए समय-समय पर सुरक्षा मॉक ड्रिल या डेमो आयोजित किए जाएं।
- संदिग्ध गतिविधि: किसी भी ग्राहक के खाते में सीमा से अधिक राशि के लेनदेन पर कड़ी नजर रखी जाए। यदि बैंक परिसर में कोई व्यक्ति संदिग्ध गतिविधि करता हुआ पाया जाए, तो तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना दी जाए।
- जागरूकता: बैंक प्रबंधकों को निर्देश दिया गया कि वे ग्राहकों को पैसा निकालने के बाद सतर्क रहने और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए प्रोत्साहित करें।
जी.आर.एम. (GRM) पोर्टल संचालन से होने वाले लाभ
बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने जी.आर.एम. पोर्टल के फायदों के बारे में जानकारी दी:
- बैंक खाताधारक अपनी होल्ड/लीन राशि के संबंध में अब सीधे अपनी बैंक शाखा में ही आवेदन कर सकेंगे।
- बैंक को आवेदन प्राप्त होने के बाद, पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
- नियमों के तहत, बैंक आवेदक को 90 दिनों की समय-सीमा के भीतर समाधान उपलब्ध कराएगा।
खाता धारकों के लिए बड़ी राहत
अंत में यह स्पष्ट किया गया कि अब किसी भी खाता धारक को अपने होल्ड किए गए खाते को खुलवाने के लिए इधर-उधर भटकने या चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। यदि किसी का खाता होल्ड है, तो वे ट्रांजैक्शन से संबंधित संपूर्ण जानकारी और केवाईसी (KYC) दस्तावेजों के साथ अपनी संबंधित बैंक शाखा में आवेदन कर सकते हैं।
इस प्रक्रिया के तहत, पुलिस आवश्यकता पड़ने पर बैंक के माध्यम से नोटिस भेजकर आवेदक को तलब कर सकेगी। साथ ही, सत्यापन और प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए वीडियो कॉलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की भी मदद ली जा सकेगी।
बैठक में उपस्थित अधिकारी: थाना गांधीनगर प्रभारी प्रवीण द्विवेदी, थाना प्रभारी मणीपुर सी.पी. तिवारी, साइबर सेल से सउनि अजीत मिश्रा, आरक्षक अनुज जायसवाल, विरेन्द्र पैंकरा, प्रदीप केरकेट्टा एवं शहर के विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक उपस्थित रहे।











