बलरामपुर: राजपुर स्वास्थ्य केंद्र में अवैध पेड़ कटाई का मामला, प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर आरोप।




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विशेष रिपोर्ट: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (C.H.C.) राजपुर परिसर में पेड़ों की अवैध कटाई का मामला

बलरामपुर (छत्तीसगढ़): जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (C.H.C.) राजपुर में कथित रूप से मिलीभगत और बिना अनुमति के हरे-भरे पेड़ों को काटने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों को आक्रोशित किया है, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त दस्तावेजों और साक्ष्यों के अनुसार, यह मामला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मनमानी और नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।

मामले की पृष्ठभूमि

शिकायतकर्ता द्वारा कलेक्टर बलरामपुर को प्रेषित पत्र में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि सी.एच.सी. राजपुर के प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी (B.M.O.) डॉ. रमेश जायसवाल ने अपने निजी स्वार्थ के लिए वन विभाग की सक्षम अनुमति के बिना अस्पताल परिसर के भीतर और बाहर लगे कई विशालकाय, हरे-भरे पेड़ों को कटवा दिया।

आरोप और साक्ष्य

शिकायतकर्ता ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि डॉ. जायसवाल ने अस्पताल परिसर के सौंदर्यीकरण का बहाना बनाकर इस कृत्य को अंजाम दिया। पत्र में दावा किया गया है कि अस्पताल परिसर के अंदर और बाहर लगे पेड़ मरीजों और राहगीरों को छाया प्रदान करते थे। कटाई के बाद लकड़ी को ट्रैक्टर के माध्यम से निजी लाभ के लिए बेचा गया।

उपलब्ध तस्वीरों (दस्तावेजों का हिस्सा) में निम्नलिखित विवरण स्पष्ट हैं:

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  • अस्पताल परिसर से सटे विशालकाय पेड़ों की कटाई।
  • पेड़ संख्या 2, 3 और अन्य को परिसर से हटाना।
  • बी.एस.एन.एल. कार्यालय के पास के पेड़ों का गायब होना।
  • तस्वीरों में ‘पहले’ और ‘बाद’ की स्थिति का अंतर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जो कटाई की पुष्टि करता है।

विभागीय पत्राचार और विरोधाभास

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात विभागीय पत्राचार में सामने आई है। रिकॉर्ड के अनुसार, बी.एम.ओ. ने वन विभाग को पत्र लिखकर ‘सूखे और सड़ चुके पेड़ों’ को काटने की अनुमति मांगी थी (दिनांक 16/9/2025 और 22/12/2025 के पत्र)।

हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि बी.एम.ओ. ने वन विभाग से किसी भी प्रकार की अंतिम अनुमति प्राप्त होने से पहले ही अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आनन-फानन में हरे-भरे और विशालकाय पेड़ कटवा दिए। यहाँ प्रशासनिक पत्राचार का इस्तेमाल केवल अपनी कार्रवाई को वैध बनाने की कोशिश के रूप में किया गया प्रतीत होता है।

प्रशासनिक जांच और मांग

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) बलरामपुर ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण को संज्ञान में लिया है और खंड चिकित्सा अधिकारी से स्पष्टीकरण व रिपोर्ट मांगी है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच निष्पक्ष हो। उनका तर्क है कि चूंकि बी.एम.ओ. स्वयं इस मामले में मुख्य आरोपी हैं, इसलिए जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, उन्हें उनके पद से पृथक किया जाना चाहिए ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।

प्रमुख मांगें:

  • डॉ. रमेश जायसवाल को पद से हटाकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना।
  • अवैध कटाई के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई।
  • नष्ट किए गए पर्यावरण की क्षतिपूर्ति के लिए व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम।

सी.एच.सी. राजपुर का यह मामला पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक उत्तरदायित्व के बीच का बड़ा संघर्ष है। एक स्वास्थ्य केंद्र, जो लोगों को जीवन देने का स्थान है, वहां पेड़ों की इस तरह से कटाई न केवल अनैतिक है, बल्कि नियमों का खुला उल्लंघन भी है। प्रशासन अब इस मामले में किस प्रकार का रुख अपनाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।