अम्बिकापुर: सरगंवा में ‘खेत बचाओ अभियान’ के जरिए किसानों को मिली प्राकृतिक खेती की नई दिशा!





कृषक जागरूकता कार्यक्रम: सरगंवा में प्राकृतिक खेती की नई लहर

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खेत बचाओ अभियान: सरगंवा में कृषकों को मिली प्राकृतिक और वैज्ञानिक खेती की नई दिशा

अम्बिकापुर, 08 जून 2026:

कार्यक्रम का उद्देश्य

छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत सरगंवा में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत एक भव्य कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को कम करना और किसानों को टिकाऊ, लागत-मुक्त और प्राकृतिक कृषि तकनीकों की ओर प्रेरित करना था।

विशेषज्ञों का मार्गदर्शन: प्राकृतिक खेती का महत्व

कृषि विज्ञान केन्द्र, अजिरमा के मृदा विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि, “मिट्टी हमारी जीवनदायिनी है, यदि हम इसका ध्यान नहीं रखेंगे, तो भविष्य में उत्पादन असंभव हो जाएगा।”

मुख्य तकनीकी बिंदु:

  • हरित खाद (Green Manure): मिट्टी की भौतिक संरचना और उर्वरा शक्ति को सुधारने के लिए ढैंचा और सनई जैसी फसलों का महत्व।
  • ब्लू ग्रीन एल्गी (नील-हरित शैवाल): धान की फसल में नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए इसकी भूमिका और उत्पादन तकनीक पर विस्तृत चर्चा।

जैविक आदानों का निर्माण: आत्मनिर्भर किसान

कार्यक्रम में किसानों को ‘स्व-निर्मित जैविक समाधान’ बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया:

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जैविक उत्पाद उपयोगिता
जीवामृत मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाने हेतु।
बीजामृत बीज उपचार और जड़ जनित रोगों से बचाव।
निमास्त्र/ब्रह्मास्त्र प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में सुरक्षा।
वेस्ट डी-कंपोजर कृषि अवशेषों को जल्दी खाद में बदलने हेतु।

नैनो उर्वरकों का युग

डॉ. कुमार ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में नैनो उर्वरक न केवल सस्ते हैं, बल्कि पौधों द्वारा इनका अवशोषण 80-90% तक होता है, जिससे भूमि का प्रदूषण कम होता है। छिड़काव की सही विधि और समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।

सरकारी योजनाएं और एग्रीस्टेक

कृषि विभाग की ओर से उपस्थित अधिकारियों ने किसानों को निम्नलिखित बिंदुओं पर जागरूक किया:

  • एग्रीस्टेक (AgriStack): कृषि के डिजिटल दस्तावेजीकरण और योजनाओं के लाभ को सीधे किसानों तक पहुँचाने की प्रक्रिया।
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि: अपंजीकृत किसानों को पोर्टल पर पंजीयन के लिए प्रोत्साहित किया गया।
  • मृदा परीक्षण: “स्वस्थ धरा, खेत हरा” के मंत्र के साथ किसानों को सलाह दी गई कि वे प्रतिवर्ष मिट्टी की जांच करवाएं और रिपोर्ट के अनुसार ही संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें।

कार्यक्रम में श्रीमती श्वेता पटेल (कृषि विकास अधिकारी) एवं श्री दीपक कुमार कश्यप (ग्राम कृषि विस्तार अधिकारी) सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने किसानों का मनोबल बढ़ाया। अंत में, उपस्थित सभी किसानों ने शपथ ली कि वे धीरे-धीरे रासायनिक खेती को छोड़कर प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएंगे ताकि आने वाली पीढ़ियों को उपजाऊ भूमि मिल सके।

रिपोर्ट: कृषि विज्ञान केन्द्र, अम्बिकापुर टीम